Dr. Verghese Kurien: भारत में दूध और डेयरी कारोबार की बात होती है तो डॉ. वर्गीज कुरियन का नाम सबसे पहले याद किया जाता है. उन्हें देश में ‘मिल्क मैन ऑफ इंडिया’ और श्वेत क्रांति के जनक के तौर पर जाना जाता है. उन्होंने सिर्फ दूध का उत्पादन बढ़ाने पर काम नहीं किया, बल्कि किसानों को सहकारी समितियों से जोड़कर उन्हें अपने कारोबार में हिस्सेदारी और बेहतर आमदनी का रास्ता दिया. 9 सितंबर को उनकी 14वीं पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है.
किसानों को साथ जोड़कर खड़ा किया मजबूत मॉडल
डॉ. कुरियन का मानना था कि दूध का कारोबार करने वाले किसानों को सिर्फ कच्चा माल बेचने वाला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का मालिक होना चाहिए. इसी सोच के तहत उन्होंने दूध उत्पादकों को किसान-स्वामित्व वाली सहकारी समितियों से जोड़ने पर जोर दिया. गुजरात के आनंद में तैयार हुआ यह मॉडल आगे चलकर देशभर में चर्चा का विषय बना. इसी सहकारी व्यवस्था ने अमूल जैसे मजबूत ब्रांड की नींव तैयार की. इसमें किसानों से सीधे दूध खरीदा जाता है और बिक्री से मिलने वाले लाभ का फायदा भी उत्पादकों तक पहुंचता है.
ऑपरेशन फ्लड से आई डेयरी सेक्टर में क्रांति
डॉ. कुरियन के काम को सबसे बड़ी पहचान 1970 में शुरू हुए ‘ऑपरेशन फ्लड’ से मिली. इस कार्यक्रम के जरिए आनंद में सफल हुए सहकारी मॉडल को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाया गया. उस समय भारत में दूध की कमी एक बड़ी समस्या थी. ऑपरेशन फ्लड ने दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ गांवों में दूध खरीद और वितरण का नेटवर्क मजबूत किया. धीरे-धीरे भारत दूध की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में शामिल हो गया. इस बदलाव का असर सिर्फ दूध की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहा. बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों के लिए डेयरी आय का एक अहम साधन बनी और किसानों को अपने उत्पाद की बेहतर कीमत पाने का अवसर मिला.
किसानों को मिला अपने कारोबार पर ज्यादा अधिकार
कुरियन का मॉडल इस बात पर आधारित था कि किसान खुद अपनी सहकारी संस्था के मालिक हों और पेशेवर तरीके से उसका संचालन किया जाए. इससे किसानों और बाजार के बीच सीधा संबंध बनाने में मदद मिली. इस व्यवस्था ने बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और दूध उत्पादकों को बाजार की वैल्यू चेन में ज्यादा मजबूत भूमिका देने का रास्ता खोला. गांवों की अर्थव्यवस्था में डेयरी सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ी और बड़ी संख्या में महिलाओं को भी इससे रोजगार और आय के अवसर मिले.
अमूल आंदोलन से जुड़ी है कुरियन की विरासत
अमूल ने डॉ. वर्गीज कुरियन की 14वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. अमूल उन्हें श्वेत क्रांति का जनक मानता है. उनके निधन के बाद भी किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने की उनकी सोच भारतीय डेयरी क्षेत्र को प्रभावित करती रही है. डॉ. कुरियन का निधन 9 सितंबर 2012 को हुआ था. हालांकि, उनकी बनाई व्यवस्था और विचार आज भी देश के डेयरी क्षेत्र में दिखाई देते हैं.
सिर्फ दूध उत्पादन नहीं, किसानों को मजबूत बनाना था लक्ष्य
डॉ. कुरियन की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ भारत में दूध का उत्पादन बढ़ाना नहीं थी. उनकी असली सोच यह थी कि किसान अपने उत्पाद की कीमत और कारोबार की पूरी प्रक्रिया में मजबूत भूमिका निभाएं. उन्होंने दिखाया कि अगर किसानों को स्वामित्व, सही प्रबंधन और बाजार से सीधा जुड़ाव मिले तो सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल सकती हैं. यही वजह है कि आज भी उनकी विरासत को दूध उत्पादन से आगे बढ़कर किसान सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के सफल मॉडल के रूप में देखा जाता है.