फसल कटाई के बाद 30 फीसदी तक बर्बाद हो जाती है उपज, भंडार निगम CWC का नुकसान घटाने पर जोर

Crop harvest loss : केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के प्रबंध निदेशक संतोष सिन्हा ने कहा कि हर साल अनुमानित 25-30 फीसदी फसल कटाई के बाद खराब भंडारण सुविधाओं समेत अन्य वजहों से बर्बाद हो जाती है.

Kisan India
नोएडा | Published: 9 Sep, 2026 | 01:25 PM

भंडारण सुविधाओं में कमी समेत अन्य दिक्कतों की वजह से किसानों की फसल कटाई के बाद लगभग 30 फीसदी तक बर्बाद हो जाती है. इस नुकसान को कम की तत्काल जरूरत है. सरकारी क्षेत्र की भंडार गृह कंपनी केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के प्रबंध निदेशक संतोष सिन्हा ने कहा कि कंपनी कृषि निर्यातकों को एकीकृत समाधान देने के लिए अपने बड़े भंडारण और एक्जिम नेटवर्क का इस्तेमाल करने पर काम कर रही है. उन्होंने भारत के कृषि-निर्यात लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया.

कटाई के बाद बर्बाद हो जाती है 30 फीसदी तक उपज

केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के प्रबंध निदेशक संतोष सिन्हा ने बीते दिनों उद्योग निकाय पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के कार्यक्रम में कहा कि भारत हर साल लगभग 36 करोड़ टन फल और सब्जियों का उत्पादन करता है, जिसमें से अनुमानित 25-30 फीसदी फसल कटाई के बाद खराब भंडारण सुविधाओं, शीत श्रृंखला की कमियों और लॉजिस्टिक की दिक्कतों के कारण बर्बाद हो जाती है.

किसानों को मजबूरी में उपज बिक्री रोकने के लिए भंडारण सुविधाएं

निगम ने साल 1957 में खराब भंडारण सुविधाओं के कारण किसानों को होने वाली मजबूरी में बिक्री को रोकने के लिए सिर्फ 7 भंडारगृह के साथ शुरुआत की थी. आज इसका देशभर में 950 से ज्यादा भंडारगृह का नेटवर्क है. उन्होंने कहा कि प्रमुख बंदरगाहों, इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) और कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (CFS) में अपनी मौजूदगी के साथ निगम खुद को खेत से लेकर अंतिम ग्राहक तक एकल खिड़की लॉजिस्टिक समाधान देने के लिए तैयार कर रहा है. इसमें सड़क, हवाई और तटीय परिवहन को जोड़कर निर्यातकों के लिए लागत कम करने की कोशिश की जा रही है.

एआई तकनीक से कंटेनर निगरानी सिस्टम की शुरुआत

उन्होंने कहा कि निगम की तकनीकी विशेषज्ञता उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘फाइटो-सैनिटरी’ (स्वच्छता संबंधी) प्रमाणपत्र देने में सक्षम बनाती है, जिससे विदेशों में भारतीय खेप के अस्वीकार होने का जोखिम कम हो सकता है. उन्होंने लागत प्रभावी, जिंस विशिष्ट शीत भंडारण समाधान पर निगम के काम का भी जिक्र किया, जिसमें आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग और प्रमुख सुविधाओं पर डिजिटल और एआई आधारित कंटेनर निगरानी प्रणाली की शुरुआत शामिल है.

कृषि निर्यात लॉजिस्टिक इकोसिस्टम बेहतर करने की जरूरत

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियामकीय अनुपालन प्रकोष्ठ के उप निदेशक अखिलेश गुप्ता ने खाद्य व्यवसायों और निर्यातकों को नियंत्रित करने वाले नियामकीय ढांचे के बारे में बताया और उचित अनुपालन और प्रमाणन प्रक्रियाओं के महत्व पर जोर दिया. PHDCCI के सहायक महासचिव नासिर जमाल ने कहा कि भारत के बढ़ते कृषि आधार, खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और वैश्विक मांग को देखते हुए एक ज्यादा कुशल कृषि निर्यात लॉजिस्टिक इकोसिस्टम बनाना जरूरी हो गया है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

लेटेस्ट न्यूज़