यूपी में गन्ने की पैदावार बढ़ने की उम्मीद, फिर भी चीनी उत्पादन 90 लाख टन तक रहने का अनुमान

Sugarcane Production: उत्तर प्रदेश में इस साल गन्ने की पैदावार करीब 10 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, खासकर पश्चिमी यूपी में फसल बेहतर बताई जा रही है. इसके बावजूद 2026-27 सीजन में चीनी उत्पादन करीब 90 लाख टन रहने का अनुमान है. गन्ने के रकबे में कमी और समय से पहले पेराई इसका कारण बन सकती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 9 Sep, 2026 | 01:59 PM

Sugar Production UP: उत्तर प्रदेश में इस साल गन्ना किसानों के लिए तस्वीर कुछ हद तक बेहतर नजर आ रही है. खेतों में फसल की हालत अच्छी बताई जा रही है और औसत पैदावार में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की उम्मीद है. खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल को लेकर किसान उत्साहित हैं. इसके बावजूद अगले चीनी सीजन 2026-27 में राज्य का चीनी उत्पादन करीब 90 लाख टन रहने का अनुमान लगाया जा रहा है. पहले उम्मीद थी कि यूपी में इस बार चीनी का उत्पादन 1 करोड़ टन के पार जा सकता है. लेकिन गन्ने के रकबे में कमी और चीनी मिलों की ओर से पेराई जल्दी शुरू किए जाने की स्थिति में उत्पादन पर असर पड़ सकता है.

गन्ने की पैदावार बढ़ेगी, लेकिन रकबा घट सकता है

चीनी मिलों से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस साल उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती का क्षेत्र करीब 1 से 2 लाख हेक्टेयर कम हो सकता है. राज्य सरकार के शुरुआती आंकड़ों में इस साल गन्ने का रकबा करीब 28.13 लाख हेक्टेयर बताया गया है, जबकि पिछले साल यह 28.61 लाख हेक्टेयर था. हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़े इससे अलग तस्वीर दिखाते हैं. मंत्रालय के मुताबिक इस साल गन्ने का रकबा पिछले साल के 28.02 लाख हेक्टेयर से करीब 36 हजार हेक्टेयर ज्यादा है. इसी गन्ने की पेराई अगले चीनी सीजन 2026-27 में होनी है.

नवंबर में पेराई शुरू हुई तो किसानों को ज्यादा फायदा

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, गन्ने की मशहूर किस्म CO-0238 विकसित करने वाले कृषि वैज्ञानिक बख्शी राम के मुताबिक इस साल गन्ने की औसत पैदावार कम से कम 10 प्रतिशत बढ़ सकती है. लेकिन इसका पूरा फायदा किसानों और चीनी मिलों को तभी मिलेगा, जब पेराई सही समय पर शुरू हो. उनका कहना है कि अगर गन्ने की कटाई और पेराई बहुत जल्दी कर दी गई तो गन्ने में चीनी की मात्रा कम हो सकती है. इसका सीधा असर चीनी की रिकवरी पर पड़ेगा. यानी ज्यादा गन्ना होने के बावजूद उससे कम चीनी निकल सकती है. इससे किसानों और मिलों दोनों को नुकसान हो सकता है.

इस बार फसल की हालत अच्छी

मौजूदा स्थिति में गन्ने की फसल को काफी अच्छा बताया जा रहा है. अभी तक कीटों के बड़े हमले की कोई खास खबर सामने नहीं आई है. इससे भी पैदावार बेहतर रहने की उम्मीद बढ़ी है. हालांकि, हाल में उत्तर प्रदेश के करीब 24 जिलों में नदियों में आई बाढ़ से गन्ने को कितना नुकसान हुआ है, इसकी पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है. बाढ़ से प्रभावित इलाकों की फसल का आकलन होने के बाद ही वास्तविक नुकसान का पता चल सकेगा.

यूपी में बारिश ने भी बदली फसल की स्थिति

मौसम के आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त से 8 सितंबर के बीच पूर्वी उत्तर प्रदेश के 42 जिलों में सामान्य से 85 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई. हालांकि पूरे मॉनसून सीजन यानी 1 जून से अब तक यहां बारिश सामान्य से करीब 5 प्रतिशत कम रही है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 33 जिलों में पिछले 15 दिनों में सामान्य से करीब 80 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई. पूरे मॉनसून सीजन में पश्चिमी यूपी में बारिश सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा रही है. पश्चिमी यूपी गन्ने की खेती का बड़ा क्षेत्र है, इसलिए यहां अच्छी फसल से उत्पादन को सहारा मिलने की उम्मीद है.

शामली के किसान भी पैदावार को लेकर उम्मीद में

रिपोर्ट के अनुसार, शामली के किसानों के मुताबिक इस साल गन्ने की फसल पिछले साल के मुकाबले बेहतर है. उनका अनुमान है कि पैदावार 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. पिछले साल कीटों के हमले से उनकी फसल को करीब 30 प्रतिशत तक नुकसान हुआ था. हालांकि, इस बार वह धीरे-धीरे गन्ने का रकबा कम करके दूसरी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार की ओर से तय 400 रुपये प्रति क्विंटल का गन्ने का भाव कम है, खासकर तब जब कई मिलों में चीनी की रिकवरी 10 प्रतिशत से ज्यादा है.

100 किलो गन्ने से कितनी चीनी निकलती है?

चीनी की रिकवरी का मतलब है कि 100 किलो गन्ने की पेराई करने पर कितनी चीनी तैयार होती है. उदाहरण के लिए, अगर रिकवरी 10.19 प्रतिशत है तो 100 किलो गन्ने से करीब 10.19 किलो चीनी बनती है. यही वजह है कि सिर्फ गन्ने की पैदावार बढ़ना ही काफी नहीं है. गन्ने में चीनी की मात्रा और मिलों की रिकवरी भी उत्पादन के लिए बेहद अहम होती है.

सही आंकड़ों से ही बनेगी बेहतर चीनी नीति

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के पास गन्ने के रकबे और संभावित उत्पादन के सही आंकड़े होना जरूरी है. इन्हीं आंकड़ों के आधार पर चीनी के आयात-निर्यात और एथनॉल से जुड़ी नीतियां तय की जाती हैं. पिछले सीजन में भी उत्पादन के अनुमान में बड़ा बदलाव देखने को मिला था. जुलाई 2025 में देश में सकल चीनी उत्पादन 3.49 करोड़ टन रहने का अनुमान था, लेकिन बाद में इसे घटाकर करीब 3.09 करोड़ टन कर दिया गया. ऐसे में इस बार सही अनुमान जरूरी है, ताकि चीनी की घरेलू जरूरत, आयात और एथनॉल से जुड़े फैसले समय पर लिए जा सकें.

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