कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी से कृषि क्षेत्र के नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) में कमी आई है. नाबार्ड के चेयरमैन शाजी कृष्णन वी ने मुंबई में बृहस्पतिवार को कहा कि कृषि क्षेत्र में नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) काफी कम हुई हैं और फसल उत्पादकता बढ़ाने के साथ ऋण सुविधा में सुधार से इसमें और कमी लाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादकता बढ़ने से किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता भी बढ़ेगी.
उत्पादकता बढ़ने से किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता बढ़ेगी
नाबार्ड के चेयरमैन शाजी कृष्णन वी ने मुंबई में वैश्विक वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) सम्मेलन में उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में एनपीए एक समय दोहरे अंक में था, जो अब घटकर एकल अंक यानी 10 फीसदी से नीचे आ गया है. उन्होंने कहा कि उत्पादकता बढ़ने से इसमें और सुधार हो सकता है और ऐसा होना जरूरी है. कृषि उत्पादकता बढ़ने से किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता बढ़ेगी.
बीमा और ऋण जरूरत पर काम कर रहा नाबार्ड
उन्होंने कहा कि इसके बाद हमें बीमा और ऋण सहायता की जरूरत होगी. हम इन्हीं क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं. कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर करीब 3.5 फीसदी रहने का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के चेयरमैन ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसमें तेजी लाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जब भारत को बहुत तेजी से आगे बढ़ना है और सरकार का लक्ष्य विकसित भारत है, तो समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ना होगा.
लोन देने के ढांचे और बेहतर किया जा रहा
एग्री स्टैक के बारे में उन्होंने कहा कि इसे तीन स्तर वाले बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने ऐसा ऋण वितरण तंत्र लागू किया है, जो एग्री स्टैक और इंडिया स्टैक दोनों को एकीकृत करता है. उन्होंने कहा कि इससे करीब 7.5 करोड़ किसानों को जरूरत के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है.