हिमाचल प्रदेश के किसान मौसम की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं. जुलाई में बुवाई के वक्त सूखा ने उन्हें बुरी तरह प्रभावित किया और अब लगातार बारिश के साथ बाढ़-भूस्खलन की स्थितियों ने फसल चौपट कर दी है. इस बार पारंपरिक खरीफ फसलों के अलावा किसानों ने ऑफ सीजन सब्जी फसलों की खूब बुवाई की है ताकि मुनाफा अच्छा हासिल किया जा सके. लेकिन, उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है और 50 फीसदी तक उत्पादन घटने की चिंता बढ़ गई है. सर्वाधिक नुकसान खीरे की फसल को हुआ है. जबकि अन्य सब्जी फसलों में शिमला मिर्च, मटर और फूलगोभी की फसल भी मौमस की मार से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
लगातार बारिश से सब्जी फसलों को भारी नुकसान
हिमाचल प्रदेश में इस समय मध्य और उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों ने फूलगोभी, शिमला मिर्च, टमाटर, फ्रेंच बीन और मटर की खूब खेती की है. लेकिन, उन्हें विपरीत मौसम ने नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है. कांगड़ा जिले में लगातार बारिश और भूस्खलन की स्थितियों ने खीरे की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है. स्थानीय किसानों का कहना है कि ऑफ सीजन फसलों की बुवाई की गई है ताकि अच्छा भाव मिल सके, लेकिन मौसम ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
महंगे दाम पर ऑफ सीजन फसलों के बीज खरीदे
जिला कृषि विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि कांगड़ा के निचले मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है. इंदौरा, फतेहपुर, ज्वाली और नूरपुर क्षेत्र में खीरे की फसल पर बारिश के साथ बीमारी की मार भी पड़ी है. किसानों ने कहा कि इस बार ऑफ सीजन की फसलें फूलगोभी, शिमला मिर्च, टमाटर, फ्रेंच बीन और मटर की खेती की गई है और इनके बीज महंगे दाम पर मिले हैं.
6 क्विंटल उत्पादन की बजाय 3 क्विंटल ही उपज मिली
किसानों का कहना है कि शुरुआत में मौसम अनुकूल रहने से फसल भी अच्छी नजर आ रही थी, लेकिन लगातार बारिश के बाद खीरे के पौधों के पत्ते सूखने लगे और फसल प्रभावित हो गई. बारिश की सबसे ज्यादा मार छोटे किसानों पर पड़ी है. इस बार उत्पादन आधे से भी कम रह गया है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. किसान विजय डोगरा ने मीडिया को बताया कि पहले 5 कनाल भूमि से 6 क्विंटल तक खीरे का उत्पादन हो जाता था, लेकिन इस बार यह घटकर महज 2-3 तीन क्विंटल रह गया है. बाजार में खीरे के दाम ठीक होने के बावजूद कम उत्पादन के कारण किसानों को मुनाफा नहीं मिल पा रहा.

किसान विजय डोगरा ने बताया कि पत्तियां पीली हो रही हैं और जड़े सड़ रही हैं.
कृषि विभाग ने फसल बचाव के उपाय करने की सलाह दी
किसानों का कहना है कि फसल को बीमारी और बारिश से बचाने के लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है. उन्होंने कृषि विभाग से प्रभावित खेतों का निरीक्षण करवाने, फसल में लगी बीमारी से बचाव के लिए उचित सलाह देने और फसल नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करने की मांग की है. किसानों की मेहनत और लागत तो पूरी है, लेकिन लगातार बारिश और बीमारी ने उनकी मुनाफे की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
कृषि विभाग ने किसानों को बारिश और जलभराव से फसलों के बचाने के उपाय करने की सलाह दी है. पत्तियों के पीले होने और पौधों की जड़ों को सड़ने से बचाने के लिए अनुशंसित दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी है. इसके साथ ही नुकसान के आकलन कर भरपाई का भरोसा भी दिया गया है.