India-Bhutan Timber Trade: भारत सरकार ने भूटान से लकड़ी (टिंबर) मंगाने के नियमों में बदलाव किया है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने पौधों और वनस्पतियों से जुड़े आयात नियमों में संशोधन करते हुए भूटान की 16 तरह की लकड़ियों को भारत लाने का रास्ता साफ किया है. हालांकि, इन लकड़ियों को भारत लाने से पहले उनकी अच्छी तरह जांच और कीटरोधी उपचार करना जरूरी होगा. सरकार का मकसद भूटान के साथ लकड़ी का कारोबार बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ भारत के पेड़-पौधों और जंगलों को बाहर से आने वाले कीट और बीमारियों से बचाना भी है.
दो साल से चल रही थी बातचीत
भारत और भूटान के बीच पिछले करीब दो साल से लकड़ी की नई प्रजातियों को भारत में लाने को लेकर बातचीत चल रही थी. भूटान लगातार मांग कर रहा था कि उसकी कुछ और लकड़ियों को भारत में बेचने की अनुमति दी जाए. इसी बातचीत के बाद भारत सरकार ने अब 16 नई लकड़ी प्रजातियों को आयात सूची में शामिल किया है. इनके लिए असम के तामुलपुर जिले में भारत-भूटान सीमा पर स्थित दर्रंगा सीमा चौकी पर पौध स्वास्थ्य जांच की विशेष व्यवस्था की जाएगी.
लकड़ी के साथ कीट आने का खतरा
दूसरे देशों से लकड़ी मंगाने पर सबसे बड़ी चिंता इस बात की होती है कि उसके साथ कोई हानिकारक कीट या बीमारी भारत में न पहुंच जाए. अगर ऐसा होता है तो यहां के पेड़-पौधों और जंगलों को नुकसान हो सकता है. इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने इन लकड़ियों के लिए विशेष जांच व्यवस्था बनाई है. भारत आने से पहले लकड़ी का तय तरीके से उपचार करना होगा. इस उपचार की पूरी जानकारी आधिकारिक पौध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र में दर्ज करनी होगी. इसका मकसद तने में लगने वाले कीड़ों और दूसरे हानिकारक जीवों को भारत में आने से रोकना है.
लकड़ी को गर्म करके या धुआं देकर किया जाएगा उपचार
नए नियमों के तहत भूटान से असम में आने वाली लकड़ी को कीटरोधी उपचार से गुजरना होगा. इसके लिए गैस से उपचार, गर्मी से उपचार या भारत सरकार की ओर से मंजूर किसी दूसरे तरीके का इस्तेमाल किया जा सकता है. गैस से उपचार के दौरान लकड़ी को कम से कम 21 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 24 घंटे तक तय मात्रा में गैस के संपर्क में रखना होगा. वहीं गर्मी से उपचार में लकड़ी के अंदर का तापमान 56 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचाकर कम से कम 30 मिनट तक बनाए रखना होगा. इन प्रक्रियाओं के बाद ही लकड़ी को भारत में लाने की अनुमति दी जाएगी.
कौन-कौन सी लकड़ियां शामिल हैं?
नई सूची में कई तरह की लकड़ियों को शामिल किया गया है. इनमें खैर, तून, कचनार, शीशम जैसी उपयोगी लकड़ी वाली प्रजातियों के साथ कई अन्य पेड़ शामिल हैं. सूची में एल्नस नेपेलेंसिस, लेगरस्ट्रोमिया पार्वीफ्लोरा, एकेशिया कैटेचू, एक्रोकार्पस फ्रैक्सिनिफोलियस, अल्टिंगिया एक्सेल्सा, बेटुला यूटिलिस, बाइल्समिडिया रॉक्सबर्गियाना, कैस्टानोप्सिस हाइस्ट्रीक्स, क्यूप्रेसस कैश्मेरियाना, डुआबांगा ग्रैंडिफ्लोरा, एक्सबकलैंडिया पॉपुलनिया, एंगेलहार्डिया स्पिकाटा, पॉपुलस सिलिएटा, शीमा वालिची, सिजिजियम क्यूमिनी, टेट्रामेल्स नुडिफ्लोरा और टूना सिलिएटा शामिल हैं.
फर्नीचर से लेकर घर बनाने तक में होगा इस्तेमाल
इन लकड़ियों का इस्तेमाल कई तरह के कामों में किया जाता है. इनसे फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां, प्लाईवुड, लकड़ी की परत, पैकिंग का सामान और घर की सजावट से जुड़ी चीजें बनाई जा सकती हैं. खास तौर पर तून की लकड़ी महंगे फर्नीचर, अलमारी, लकड़ी की परत और कुछ वाद्य यंत्र बनाने के लिए इस्तेमाल होती है.