1 सितंबर से बदलेगी CBG व्यवस्था! 23,731 करोड़ की गोबरधन योजना से CNG-PNG ग्राहकों पर क्या होगा असर?

GOBARdhan scheme 2026: केंद्र सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की गोबरधन योजना को मंजूरी दी है. 2026-27 से 2035-36 तक चलने वाली इस योजना का लक्ष्य CBG उत्पादन बढ़ाना, कचरे से ऊर्जा तैयार करना और CBG प्लांट को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. नए प्लांट, पाइपलाइन, MSME और जैविक खाद के लिए वित्तीय मदद दी जाएगी.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 30 Aug, 2026 | 10:21 AM

GOBARdhan Yojana: केंद्र सरकार ने कचरे से ऊर्जा बनाने और देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ी पहल की है. सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की ‘गोबरधन’ योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना का मकसद गोबर और दूसरे जैविक कचरे का इस्तेमाल कर बायोगैस तैयार करना, CBG प्लांट लगाने वालों को मदद देना और इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की यह योजना 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी और 1 सितंबर 2026 से लागू होगी.

CBG की खरीद को बनाया जाएगा जरूरी

CBG प्लांट लगाने वालों के सामने सबसे बड़ी समस्या इसकी बिक्री और कीमत को लेकर अनिश्चितता रहती है. नई योजना में केंद्र सरकार ने इस समस्या को दूर करने की कोशिश की है. इसके तहत CNG और घरेलू PNG बेचने वाली कंपनियों के लिए CBG की तय मात्रा को अपनी गैस में मिलाना यानी ब्लेंडिंग करना जरूरी होगा. यह लक्ष्य 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत रखा गया है. इससे CBG बनाने वाली कंपनियों को पहले से बाजार मिलने की संभावना बढ़ेगी. तय लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियों पर नियामकीय कार्रवाई भी हो सकती है.

CBG की कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBtu तय

सरकार ने CBG के लिए नई प्रशासित कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBtu तय की है. इसमें टैक्स और कंप्रेशन चार्ज शामिल नहीं होंगे. यह व्यवस्था कम से कम 10 साल तक लागू रहने की बात कही गई है. केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कीमत बढ़ने का पूरा बोझ सीधे ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. इसके लिए CBG पर 10 रुपये प्रति किलो की सहायता दी जाएगी. सरकार के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में CBG उत्पादकों को मिलने वाली कीमत करीब 1,478 रुपये प्रति MMBtu है. सहायता को शामिल करने के बाद प्रभावी लागत करीब 1,895 रुपये प्रति MMBtu रहने का अनुमान है.

नए प्लांट लगाने के लिए हजारों करोड़ की मदद

गोबरधन योजना में नए CBG प्लांट लगाने के लिए 7,063 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया गया है. ग्रीनफील्ड CBG प्लांट को उसकी क्षमता के हिसाब से प्रति TPD अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक सहायता मिल सकती है. इस मदद में प्लांट की मशीनरी के अलावा कच्चा माल जुटाने और जैविक खाद तैयार करने से जुड़े उपकरण भी शामिल होंगे. कुछ विशेष क्षेत्रों में लगने वाली परियोजनाओं को मशीनरी के लिए अतिरिक्त सहायता भी मिल सकती है.

पाइपलाइन कनेक्शन पर भी सरकार का जोर

CBG बनाने के बाद उसे बाजार तक पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती है. इसे देखते हुए योजना में 5,133 करोड़ रुपये पाइपलाइन और सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने के लिए रखे गए हैं. क्लस्टर आधारित ट्रंक पाइपलाइन के लिए पात्र लागत का 80 प्रतिशत तक और अलग-अलग CBG प्लांट को नजदीकी सिटी गैस नेटवर्क से जोड़ने के लिए लागत का 50 प्रतिशत तक सहयोग दिया जा सकेगा.

MSME को भी मिलेगा फायदा

छोटे और मध्यम कारोबारियों यानी MSME के लिए भी योजना में खास प्रावधान किया गया है. इसके लिए 625 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी व्यवस्था बनाई जाएगी. पात्र परियोजनाओं में डिफॉल्ट राशि के 85 प्रतिशत तक की गारंटी दी जा सकेगी. सामान्य MSME परियोजनाओं के लिए यह सीमा 20 करोड़ रुपये और महिला नेतृत्व वाली परियोजनाओं के लिए 25 करोड़ रुपये तक होगी.

गोबर से गैस के साथ बनेगी जैविक खाद

योजना का फायदा सिर्फ CBG तक सीमित नहीं रहेगा. प्लांट से निकलने वाले जैविक अवशेषों से खाद तैयार करने और उसके लिए बाजार बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा. फर्मेंटेड ऑर्गेनिक खाद (FOM), लिक्विड FOM और PROM जैसे उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे एक तरफ कचरे का उपयोग होगा, वहीं दूसरी तरफ जैविक खाद का उत्पादन भी बढ़ सकता है. सरकार का लक्ष्य गोबरधन योजना के जरिए कचरे को ऊर्जा में बदलना, CBG उद्योग को आर्थिक रूप से मजबूत करना और किसानों व ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर पैदा करना है. इससे देश में सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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