Indigenous Cows: गांवों में गाय सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानी जाती है. खासकर भारत की देशी गायें अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण आज भी पशुपालकों की पहली पसंद बनी हुई हैं. बदलते मौसम और बढ़ती लागत के दौर में ये गायें किसानों के लिए भरोसे का सहारा बन रही हैं. पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्रालय के अनुसार, देशी गायें न सिर्फ कम देखभाल में बेहतर रहती हैं, बल्कि खेती और पर्यावरण के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं.
जलवायु के अनुसार खुद को ढालने में माहिर
पशुपालन एवं डेयरी विभाग मंत्रालय के अनुसार, देशी गायों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये भारत के अलग-अलग मौसम में आसानी से खुद को ढाल लेती हैं. चाहे गर्मी हो, सर्दी या बारिश-इन पर मौसम का असर कम पड़ता है. विदेशी नस्लों के मुकाबले देशी गायें ज्यादा मजबूत होती हैं और कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह सकती हैं. यही वजह है कि छोटे और मध्यम किसान इन्हें ज्यादा पसंद करते हैं. कम संसाधनों में भी ये अच्छी तरह से रह लेती हैं, जिससे पशुपालकों को ज्यादा परेशानी नहीं होती.
कम देखभाल में भी रहती हैं स्वस्थ
देशी गायों को ज्यादा खास देखभाल की जरूरत नहीं होती. साधारण चारा, साफ पानी और सामान्य देखरेख में भी ये स्वस्थ रहती हैं. इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे ये जल्दी बीमार नहीं पड़तीं. इससे पशुपालकों का इलाज पर खर्च भी कम होता है. पशुपालन विभाग का मानना है कि कम लागत और कम जोखिम के कारण देशी गायें ग्रामीण इलाकों के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं.
क्यों खास हैं भारत की देशी गायें?
जलवायु के अनुकूल, कम देखभाल में टिकाऊ और बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता भारत की देशी गायें पशुपालकों के लिए बेहद उपयोगी हैं।
साथ ही ये जैविक खेती को भी मजबूत बनाती हैं।#DesiBreeds #OrganicFarming #AnimalHusbandry #DairyFarming pic.twitter.com/PAA2KkKeSR— Dept of Animal Husbandry & Dairying, Min of FAH&D (@Dept_of_AHD) March 17, 2026
जैविक खेती में बड़ा योगदान
देशी गायें सिर्फ दूध ही नहीं देतीं, बल्कि खेती के लिए भी बहुत उपयोगी होती हैं. इनके गोबर और गोमूत्र का इस्तेमाल जैविक खेती में किया जाता है. गोबर से खाद बनाकर खेतों की मिट्टी को उपजाऊ बनाया जाता है, जिससे फसल की गुणवत्ता बढ़ती है. आजकल जैविक खेती की मांग बढ़ रही है, ऐसे में देशी गायों की अहमियत और भी बढ़ गई है. यह खेती को प्राकृतिक और सुरक्षित बनाने में मदद करती हैं.
देशी नस्लों का संरक्षण क्यों जरूरी
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, देशी नस्लों को बचाना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये हमारी पारंपरिक धरोहर भी हैं. अगर इन नस्लों का सही तरीके से संरक्षण और विकास किया जाए, तो यह पशुपालन को और मजबूत बना सकती हैं. सरकार भी विभिन्न योजनाओं के जरिए देशी गायों को बढ़ावा दे रही है, ताकि किसान इनका लाभ उठा सकें और पशुधन सुरक्षित रह सके.