किसानों को राहत, सरकार ने गेहूं खरीद बढ़ाकर 34.5 मिलियन टन की, MSP पर मिलेगा फायदा
मार्च और अप्रैल के दौरान कई राज्यों में अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया. खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में इसका असर ज्यादा देखने को मिला. फसल के दाने भीगने और गिरने से उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ा, जिससे किसानों को डर था कि उनकी उपज कम कीमत पर बेचना पड़ेगा.
India wheat procurement 2026 target: इस साल गेहूं किसानों के लिए हालात थोड़े चुनौतीपूर्ण जरूर रहे हैं, लेकिन सरकार के कुछ बड़े फैसलों ने उन्हें राहत देने की कोशिश की है. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने कई राज्यों में फसल को नुकसान पहुंचाया, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी. ऐसे में केंद्र सरकार ने आगे बढ़कर गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ाने का फैसला लिया है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके और उन्हें नुकसान से बचाया जा सके.
बेमौसम बारिश से बढ़ी किसानों की मुश्किल
मार्च और अप्रैल के दौरान कई राज्यों में अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया. खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में इसका असर ज्यादा देखने को मिला. फसल के दाने भीगने और गिरने से उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ा, जिससे किसानों को डर था कि उनकी उपज सरकारी मानकों पर खरी नहीं उतरेगी और उन्हें कम कीमत पर बेचना पड़ेगा.
सरकार का बड़ा फैसला: खरीद लक्ष्य में बढ़ोतरी
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, किसानों की इसी परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 34.5 मिलियन टन कर दिया है, जो पहले 30 मिलियन टन था. यानी करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. इस फैसले की जानकारी केंद्रीय खाद्य सचिव संजेव चोपड़ा ने दी. उन्होंने बताया कि यह कदम राज्यों की मांग और किसानों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.
अलग-अलग राज्यों में बढ़े लक्ष्य
इस बार राज्यों के हिसाब से भी खरीद के लक्ष्य में बदलाव किया गया है. मध्य प्रदेश से अब करीब 10 मिलियन टन गेहूं खरीदे जाने की उम्मीद है, जो पहले 7.8 मिलियन टन था. उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 1 मिलियन टन से बढ़कर 2.5 मिलियन टन हो गया है.
राजस्थान में खरीद का लक्ष्य 2 मिलियन टन से बढ़ाकर 2.35 मिलियन टन किया गया है. उत्तराखंड में भी यह बढ़कर 5,000 टन हो गया है, जो पहले सिर्फ 1,000 टन था. दिल्ली से भी इस बार चार साल बाद गेहूं खरीद होने की संभावना है, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
गुणवत्ता नियमों में भी दी गई राहत
सरकार ने सिर्फ खरीद बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि गुणवत्ता मानकों में भी कुछ राहत दी है. पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में गेहूं की गुणवत्ता से जुड़े नियमों को थोड़ा आसान किया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों की फसल खरीदी जा सके. इससे उन किसानों को खास फायदा मिलेगा, जिनकी फसल मौसम की वजह से थोड़ी प्रभावित हुई है.
उत्पादन के आंकड़ों में बदलाव
इस साल गेहूं उत्पादन के अनुमान में भी थोड़ा बदलाव देखा गया है. पहले जहां उत्पादन 120.21 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद थी, वहीं अब यह घटकर 110 से 120 मिलियन टन के बीच रहने का अनुमान है. एग्रीवॉच के सर्वे के अनुसार, 2025-26 में गेहूं उत्पादन करीब 110.65 मिलियन टन रहने की संभावना है, जो पिछले साल के 109.63 मिलियन टन से थोड़ा ज्यादा है.
एग्रीवॉच के निदेशक नलिन रावल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि फरवरी में उत्पादन 115.7 मिलियन टन के आसपास रहने की उम्मीद थी, लेकिन बेमौसम बारिश के कारण यह कम हो गया.
उत्पादन में गिरावट के बावजूद संतुलन
हालांकि उत्पादन में थोड़ी कमी आई है, लेकिन इस बार गेहूं की खेती का क्षेत्र बढ़ा है. इसी वजह से कुल उत्पादन पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा और स्थिति संतुलित बनी हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम सामान्य रहता, तो उत्पादन और ज्यादा हो सकता था.
भंडारण और सप्लाई की स्थिति मजबूत
सरकार की बढ़ी हुई खरीद से देश में गेहूं का स्टॉक भी मजबूत रहेगा. अनुमान है कि 2026-27 के लिए शुरुआती स्टॉक करीब 22 मिलियन टन होगा. कुल उपलब्धता लगभग 56.5 मिलियन टन तक पहुंच सकती है, जबकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए जरूरत लगभग 20 मिलियन टन है. इसका मतलब है कि देश में गेहूं की कमी होने की संभावना फिलहाल नहीं है.
किसानों के लिए क्यों अहम है यह फैसला
यह फैसला किसानों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी पूरी फसल बेचने का मौका मिलेगा. अगर खरीद का लक्ष्य कम रहता, तो कई किसानों को मजबूरी में अपनी फसल बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ती. लेकिन अब ज्यादा खरीद होने से उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का फायदा मिलेगा.