Mango Export Crisis: भारतीय आमों को डबल झटका! जापान ने लगाई रोक, अमेरिका की बढ़ी लागत ने बढ़ाई टेंशन

Indian Mango Export: जापान ने भारत से आम आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है, क्योंकि निरीक्षण के दौरान आमों की सफाई और कीटाणु नियंत्रण प्रक्रिया में कमियां पाई गईं. इससे केसर, हापुस और लंगड़ा जैसी भारतीय आम किस्मों का निर्यात प्रभावित हुआ है. हालांकि जापान भारत का बड़ा आम बाजार नहीं है, फिर भी पिछले साल भारत ने वहां 15.4 लाख डॉलर के आम और आम उत्पाद निर्यात किए थे.

नोएडा | Updated On: 24 May, 2026 | 12:30 PM

Mango Export India 2026: भारत में आम का सीजन शुरू होते ही निर्यात कारोबार को बड़ा झटका लगा है. जापान ने इस बार भारत से आमों के आयात पर रोक लगा दी है, जिससे आम निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब विदेशों में भारतीय आमों की मांग लगातार बढ़ रही है. एक्सपर्ट के मुताबिक, इस रोक का सबसे ज्यादा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो जापान में प्रीमियम क्वालिटी के भारतीय आम भेजते थे.

हालांकि जापान भारत के लिए सबसे बड़ा आम बाजार नहीं है, लेकिन वहां भारतीय आमों की अच्छी पहचान और खास मांग रही है. ऐसे में इस फैसले से निर्यात कारोबार को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है.

निरीक्षण के दौरान मिली खामियां

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जापान के अधिकारियों ने मार्च में भारत के ट्रीटमेंट प्लांट्स का निरीक्षण किया था. जांच के दौरान आमों की सफाई और कीट नियंत्रण प्रक्रिया में कुछ कमियां सामने आईं. इसके बाद जापान ने एहतियात के तौर पर भारत से ताजे आमों के आयात पर फिलहाल अस्थायी रोक लगा दी. जापानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक भारतीय ट्रीटमेंट प्लांट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सभी जरूरी नियम पूरी तरह नहीं अपनाते, तब तक यह रोक जारी रहेगी. इस फैसले से आम निर्यात से जुड़े कारोबारियों और किसानों की चिंता बढ़ गई है.

भारतीय आमों की जापान में अच्छी मांग

जापान में भारतीय आमों की कई किस्में बेहद पसंद की जाती हैं. इनमें गुजरात का केसर आम, महाराष्ट्र का हापुस यानी अल्फांसो और उत्तर भारत का लंगड़ा आम काफी लोकप्रिय हैं. हर साल जापानी बाजार में इन आमों की अच्छी मांग रहती है लेकिन इस बार जापान के लगाए गए बैन से इन किस्मों के निर्यात पर असर पड़ा है. इससे आम कारोबारियों और निर्यातकों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है. खासकर प्रीमियम क्वालिटी के आम भेजने वाले व्यापारियों के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है.

जापानी संस्था ने जारी किया बयान

जापान के कृषि मंत्रालय के साथ काम करने वाली योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने 31 मार्च को जारी बयान में कहा था कि 25 मार्च 2026 या उसके बाद जारी निरीक्षण प्रमाणपत्र वाले भारतीय आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी. संस्था ने साफ कहा है कि जब तक भारत की सफाई, जांच और कीट नियंत्रण से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार नहीं होता और जापानी अधिकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते, तब तक भारत से ताजे आमों का आयात बंद रहेगा.

करोड़ों के कारोबार पर असर

हालांकि जापान भारत के सबसे बड़े आम निर्यात बाजारों में शामिल नहीं है, फिर भी वहां भारतीय आमों का अच्छा कारोबार होता है. पिछले साल भारत ने जापान को करीब 15.4 लाख डॉलर के ताजे और प्रोसेस्ड आम उत्पाद निर्यात किए थे. इसमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी गुजरात के मशहूर केसर आम की रही थी. ऐसे में जापान द्वारा लगाए गए इस बैन से आम निर्यातकों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है. खासकर उन कारोबारियों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है, जो जापान के बाजार में प्रीमियम क्वालिटी के भारतीय आम भेजते थे.

अमेरिका में बढ़ा हवाई मालभाड़ा

निर्यातकों की चिंता केवल जापान तक सीमित नहीं है. अमेरिका को आम भेजने की लागत भी तेजी से बढ़ी है. जानकारी के अनुसार, अमेरिका के लिए हवाई मालभाड़ा अब बढ़कर 580 से 590 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यही लागत करीब 250 से 350 रुपये प्रति किलो थी. इससे निर्यातकों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है.

अमेरिका और यूएई बने सबसे बड़े बाजार

आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारतीय आमों के सबसे बड़े निर्यात बाजार अमेरिका, यूएई, यूके, नीदरलैंड और सऊदी अरब रहे हैं. इन देशों में भारतीय आमों की काफी मांग रहती है. ताजे आमों और आम से बने उत्पादों के निर्यात के लिए जरूरी फाइटोसैनिटरी यानी पौध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र डायरेक्टरेट ऑफ प्लांट प्रोटेक्शन, क्वारंटाइन एंड स्टोरेज द्वारा जारी किया जाता है. वहीं आम निर्यात को बढ़ावा देने वाली सरकारी एजेंसी एपीडा की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

निर्यातकों का कहना है कि भारतीय अधिकारी लगातार जापानी अधिकारियों के संपर्क में हैं, ताकि तय मानकों को पूरा कर जल्द से जल्द आमों का निर्यात फिर से शुरू किया जा सके. हालांकि कारोबारियों को आशंका है कि मौजूदा आम सीजन खत्म होने से पहले इस समस्या का समाधान होना मुश्किल हो सकता है.

Published: 24 May, 2026 | 12:30 PM

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