अल नीनो की आफत में फंसे किसान, 60 फीसदी कम बारिश से सूखने लगी पौध.. बुवाई पर संकट
Jharkhand Rain Deficit Due to El Nino: कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अल नीनो के असर को देखते हुए जलवायु के अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है. सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए एक आकस्मिक योजना (contingency plan) तैयार किया है.
अल नीनो के प्रभाव में मॉनसूनी बारिश कमजोर हो गई है. पूरे देश के साथ ही झारखंड में भी अल नीनो के चलते बीते कई सालों से कम बारिश हुई है, जिससे सूखे की आहट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य की कृषि मंत्री नेहा शिल्पी तिर्की ने कहा कि विभाग ने सूखा की स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन योजना तैयार की गई है. वहीं, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से कम बारिश वाले इलाकों के किसानों को सूखा झेलने वाली किस्मों की बुवाई करने की सलाह दी जा रही है.
रांची मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 जून को झारखंड में दाखिल हुआ, लेकिन इसकी धीमी गति के कारण यह 23 जून तक 24 में से 22 जिलों को ही कवर कर पाया. मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने पीटीआई (PTI) को बताया कि फिलहाल झारखंड में मानसून कमजोर है. हमें उम्मीद है कि अगले 2-3 दिनों में यह बाकी दो जिलों गढ़वा और पलामू को कवर कर लेगा. 26 जून के बाद मानसून के सक्रिय होने की संभावना है.
16 से ज्यादा जिलों में 60 फीसदी से कम बारिश
झारखंड के गढ़वा और साहिबगंज सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं, जहां बारिश की कमी क्रमशः 99 प्रतिशत और 98 प्रतिशत है. रांची और दुमका को छोड़कर पूरे झारखंड में बारिश की कमी 41 प्रतिशत से 99 प्रतिशत के बीच है और 16 जिलों में यह कमी 60 प्रतिशत से अधिक है. इस दौरान सामान्य बारिश 122.6 mm होती है, लेकिन राज्य में 23 जून तक सिर्फ 49.5 mm बारिश हुई है.
अभी तक खरीफ बुवाई की तैयारी शुरू भी नहीं हो सकी
झारखंड में बारिश की कमी 60% तक पहुंचने से किसान खरीफ फसलों को लेकर परेशान हैं. राज्य के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को जारी अपडेट में कहा कि कई जिलों में किसान इस साल खरीफ फसल को लेकर परेशान हैं क्योंकि जून में कम बारिश के कारण उन्होंने धान की बुवाई की तैयारी शुरू नहीं की है. उन्होंने कहा कि राज्य में बारिश की कमी पहले ही 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है और इसके और बढ़ने की आशंका है.
बारिश नहीं होने से नर्सरी और खेत तैयार नहीं
कृषि विभाग के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि कई जिलों में किसानों ने धान की बुवाई के लिए तैयारी शुरू नहीं की है. जिन किसानों ने धान के पौधों के लिए नर्सरी तैयार की है, वे अब चिंतित हैं क्योंकि कम बारिश से पौधे सूख सकते हैं. गढ़वा जिले में बारिश की कमी देखी जा रही है. किसानों का कहना है कि धान के पौधों के लिए नर्सरी भी तैयार नहीं की जा सकी है. आम तौर पर इस समय तक पौधे और खेत तैयार कर लिए जाते हैं और जुलाई के पहले सप्ताह से खेतों में पौधे लगाना शुरू कर दी जाती है.
निचले इलाकों में धान और ऊंचे इलाकों में दलहन की बुवाई करें- बिरसा कृषि यूनिवर्स्टी
रांची के बिरसा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (BAU) ने कृषि सलाह में मौजूदा हालात को देखते हुए किसानों के लिए खरीफ का मौसम मुश्किल भरा होने की चिंता जताई गई है. किसानों को धान के मुकाबले कम पानी वाली दूसरी फसलें उगाने की सलाह दी गई है. किसानों से निचले इलाकों में धान की सीधी बुआई और ऊंचे इलाकों में दालें उगाने को कहा गया है.
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन योजना तैयार- नेहा शिल्पी तिर्की
झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मीडिया से कहा कि अल-नीनो के असर को देखते हुए जलवायु के अनुकूल फसलों जैसे रागी (मडुआ), मक्का और दालों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है. मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए एक आकस्मिक योजना (contingency plan) तैयार किया है. उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी में स्थिरता करने और संभावित आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम की खेती, मछली पालन और जंगल से मिलने वाले उत्पादों पर आधारित दूसरे कामों को बढ़ावा दिया जा रहा है.