सोयाबीन रिसर्च के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी, कृषि विश्वविद्यालय के लिए 795 करोड़ पास
राज्य सरकार ने नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही कृषि विश्वविद्यालय के अधीन 19 कृषि संस्थानों में शोध कार्यों के साथ अन्य कार्यों के संचालन के लिए 795 रुपये भी स्वीकृत किए हैं.
सोयाबीन किसानों को उन्नत बीजों की उपलब्धता के साथ ही कीटों और रोगों से बचाव के लिए रिसर्च पर पैसा खर्चा किया जाएगा. मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में सोयाबीन रिसर्च संस्थान के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही राज्य में सोयाबीन की खेती और उत्पादन में उछाल की संभावनाएं बढ़ गई हैं. इसके साथ ही राज्य कैबिनेट ने जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के लिए भी 795 करोड़ रुपये के आवंटन को मंजूरी दी है.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई और परिषद की सहमति से विभिन्न योजनाओं और जनहितैषी कार्यों को मंजूरी दी गई है. निर्णयों की जानकारी देते हुए स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि कैबिनेट ने किसान कल्याण वर्ष के तहत सोयाबीन किसानों को भी सौगात दी है. कैबिनेट ने राज्य में सोयाबीन रिसर्च संस्थान बनाने को मंजूरी दे दी है.
50 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन उगाने वाले किसानों को लाभ
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि सोयाबीन संस्थान को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के गठित किया जाएगा. नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए सीहोर जिला की तहसील इछावर में ग्राम भाऊखेड़ी में 20 हैक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ की संस्थान निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इससे करीब 50 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती करने वाले 20 लाख से ज्यादा किसान किसानों को लाभ पहुंचेगा. सोयाबीन रिसर्च संस्थान उन्नत बीजों, सूखा सक्षम और हाई क्वालिटी उत्पादन पर फोकस करेगा. इससे स्थानीय किसानों की कमाई बढ़ेगी.
कृषि विश्वविद्यालय के लिए 795 करोड़ की मंजूरी
कैबिनेट ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के लिए 795 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. इसके तहत वेतन भत्तों, मानदेय आदि के लिए ब्लाक ग्रांट योजना के आगामी 5 वर्षो वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की स्वीकृति दी है. विश्वविद्यालय में कार्यरत अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के अतिरिक्त लगभग 500 ओल्ड पेंशनरों के वेतन, भत्तों, मानदेय एवं पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्वों के साथ-साथ संस्थानों के आवश्यक प्रशासनिक एवं आकस्मिक व्ययों की पूर्ति राज्य शासन द्वारा ब्लॉक ग्रांट के माध्यम से की जाती है.
19 कृषि संस्थानों के शोध कार्यों में तेजी आएगी
वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के अधीन 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केन्द्र संचालित हैं, जिनके माध्यम से कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है. विश्वविद्यालय के निर्देशन में इन कृषि महाविद्यालयों में कई फसलों पर शोध कार्य चल रहा है. ताजा राशि की मंजूरी मिलने से इन कार्यों को और गति मिलने की संभावना बढ़ गई है.