मारुति ने लॉन्च की भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, 85 फीसदी एथेनॉल पर चलेगी गाड़ी
E85 ईंधन पर चलेगी WagonR Flex Fuel; 2027 तक 5,000 E85 पंप लगाने की तैयारी, ISMA ने भारत की एथेनॉल क्रांति का अगला चरण बताते हुए कहा- ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के लिए महत्वपूर्ण
एथेनॉल आधारित कार की दिशा में एक बड़ी तरक्की हुई है. मारुति सुजुकी ने अपनी फ्लेक्स–फ्यूल वैगनआर (WagonR Flex Fuel) के प्रोडक्शन मॉडल को पेश कर दिया है. इसके साथ ही मारुति देश की पहली ऑटोमोबाइल कंपनी बन गई है जिसने फ्लेक्स–फ्यूल वाहन को उत्पादन स्तर तक पहुंचाया है.
यह वाहन E85 ईंधन पर चल सकता है. आसान भाषा में इसका मतलब यह है कि इसमें 85 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग किया जा सकता है. तकनीकी रूप से यह E20 से लेकर E100 तक विभिन्न एथेनॉल मिश्रणों के साथ काम करने में सक्षम है. फिलहाल इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया है और कंपनी ने इसकी कीमत की घोषणा नहीं की है.
यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब भारत सरकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू स्तर पर उत्पादित जैव ईंधनों को बढ़ावा देने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे दुनिया में चल रही उथल–पुथल का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है और उसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
फ्लेक्स–फ्यूल वैगनआर में कंपनी के 1.2 लीटर K12N पेट्रोल इंजन का उपयोग किया गया है, लेकिन इसे एथेनॉल अनुकूल बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं. जिनमें बदलाव या सुधार किए गए हैं, उनमें फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप, फ्यूल लाइन, ECU कैलिब्रेशन और एथेनॉल सेंसर शामिल हैं.
E85 पंपों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी
फ्लेक्स–फ्यूल वाहनों की सफलता काफी हद तक E85 ईंधन की उपलब्धता पर निर्भर करेगी. अभी इस सुविधा की कमी है. हालांकि केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में घोषणा की है कि दिल्ली–एनसीआर और मुंबई–पुणे–नागपुर कॉरिडोर में शुरुआती चरण में 50 से 100 E85 ईंधन स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. साल के अंत तक इनकी संख्या 500 और 2027 के अंत तक देश के प्रमुख शहरों में लगभग 5,000 E85 डिस्पेंसर तक पहुंचाने का लक्ष्य है. सरकार का मानना है कि E85 ईंधन की कीमत भी मौजूदा E20 पेट्रोल की तुलना में कम रखी जा सकेगी, जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ मिलेगा.
ISMA ने बताया एथेनॉल क्रांति का नया चरण
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर इंडियन शुगर एंड बायो–एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने इस लॉन्च का स्वागत करते हुए इसे भारत की एथेनॉल क्रांति का अगला चरण बताया है. ISMA के अनुसार, E20 कार्यक्रम की सफलता के बाद फ्लेक्स–फ्यूल वाहन देश में एथेनॉल आधारित व्यापक मोबिलिटी इकोसिस्टम की नींव रखेंगे। संस्था का मानना है कि इससे न केवल स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा.
ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. वहीं, महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि एथेनॉल अब केवल पेट्रोल में मिलाया जाने वाला ईंधन नहीं, बल्कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभर रहा है.
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन ने भी किया स्वागत
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) ने भी फ्लेक्स-फ्यूल कार लॉन्च किए जाने का स्वागत करते हुए इसे देश की स्वच्छ ऊर्जा और एथेनॉल आधारित मोबिलिटी की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. एथेनॉल, बायोएनर्जी और अल्कोहल उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले AIDA ने कहा कि उसके कई सदस्य इस वाहन के शुरुआती खरीदारों में शामिल होंगे, जो एथेनॉल आधारित परिवहन के प्रति उद्योग के विश्वास को दर्शाता है. AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि वाहन निर्माताओं, एथेनॉल उत्पादकों और नीति-निर्माताओं की बढ़ती भागीदारी भारत में स्वच्छ परिवहन के लिए मजबूत माहौल बना रही है.
किसानों और चीनी उद्योग के लिए भी अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स–फ्यूल वाहनों का दायरा बढ़ता है तो एथेनॉल की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. इसका सीधा फायदा गन्ना किसानों, चीनी मिलों और एथेनॉल उत्पादक इकाइयों को मिल सकता है. भारत पहले ही एथेनॉल उत्पादन क्षमता में तेजी से विस्तार कर चुका है और सरकार जैव ईंधन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है.
ब्राजील जैसे देशों में फ्लेक्स–फ्यूल वाहन वर्षों से सफलतापूर्वक चल रहे हैं. अब भारत भी उसी राह पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां खेतों में पैदा होने वाला गन्ना केवल चीनी ही नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा का भी आधार बन सकता है.