MP News: करोड़ों खर्च कर हुआ था रेस्क्यू, फिर भी नहीं बच सके 13 हिरण, वन विभाग पर उठे सवाल
Madhya Pradesh Deer Death: मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के कालापीपल क्षेत्र में एक खेत के खुले कुएं से 13 हिरणों और एक आवारा कुत्ते के शव मिले हैं. शुरुआती जांच के मुताबिक, हिरणों का झुंड कुत्ते से बचने के लिए भाग रहा था और टूटी मुंडेर वाले कुएं में गिर गया. वन विभाग ने पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों का अंतिम संस्कार कराया.
Shajapur Deer Incident: मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के कालापीपल क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है. यहां एक खेत के खुले कुएं में 13 हिरणों और एक आवारा कुत्ते के शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. यह हादसा खरदौनकलां गांव के एक खेत में हुआ, जहां खेत मालिक फसल पर कीटनाशक का छिड़काव करने पहुंचे थे. खेत के पास पहुंचते ही उन्हें तेज बदबू महसूस हुई. जब उन्होंने कुएं के अंदर झांककर देखा तो वहां कई हिरणों और एक कुत्ते के शव पड़े थे. इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी.
कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?
वन विभाग की शुरुआती जांच के अनुसार यह घटना करीब दो से तीन दिन पुरानी बताई जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि हिरणों का एक झुंड किसी आवारा कुत्ते से बचने के लिए तेजी से भाग रहा था. भागते समय खेत में बने खुले कुएं की टूटी हुई मुंडेर उन्हें दिखाई नहीं दी. एक हिरण के गिरते ही बाकी हिरण भी पीछे-पीछे उसी कुएं में गिर गए. उनका पीछा कर रहा आवारा कुत्ता भी कुएं में गिर गया और सभी की मौत हो गई.
4 नर और 9 मादा हिरणों की गई जान
वन विभाग ने बताया कि, मृत हिरणों में 4 नर और 9 मादा हिरण शामिल हैं. सभी वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित जीव हैं. इसलिए पूरे मामले की कार्रवाई प्रशासन की मौजूदगी में की गई. नायब तहसीलदार की निगरानी में सभी शवों को कुएं से बाहर निकाला गया. इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया और तय प्रक्रिया के अनुसार सभी शवों का अंतिम संस्कार कराया गया.
करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं बदली जमीनी स्थिति
इस घटना ने वन विभाग की व्यवस्थाओं पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कुछ महीने पहले ही कालापीपल इलाके में किसानों की फसलों को बचाने के लिए वन विभाग ने करोड़ों रुपये खर्च कर हेलीकॉप्टर की मदद से हिरणों और नीलगायों का रेस्क्यू अभियान चलाया था. उस समय कई वन्यजीवों को दूसरे अभ्यारण्यों में भेजा गया था.
लेकिन अब एक ही जगह 13 हिरणों की मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि जंगल और खेतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था.
खुले कुएं बन रहे हैं बेजुबानों के लिए खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि, इलाके में कई खेतों में खुले और बिना सुरक्षा दीवार वाले कुएं हैं. रात के समय या घबराहट में भागते हुए जंगली जानवर अक्सर इनमें गिर जाते हैं. पहले सड़क हादसों में वन्यजीवों की मौत की खबरें आती थीं, लेकिन अब खुले कुएं भी उनके लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं. पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे सभी खुले कुओं को सुरक्षित किया जाए. यदि समय रहते इन पर जाली या मजबूत मुंडेर नहीं बनाई गई, तो भविष्य में भी ऐसे दर्दनाक हादसे दोहराए जा सकते हैं.
सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाने की जरूरत
यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है. विशेषज्ञों का मानना है कि खेतों में बने खुले कुओं को सुरक्षित करना, वन्यजीवों की निगरानी बढ़ाना और गांवों के आसपास बचाव के इंतजाम करना बेहद जरूरी है. इससे न सिर्फ बेजुबान जानवरों की जान बचेगी, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव भी कम होगा.