खेत में हुआ हादसा तो सरकार देगी 4 लाख रुपये! जानें योजना के पूरे नियम और आवेदन प्रक्रिया

Kisan Accident Insurance Scheme: भारत में खेती के दौरान मशीन हादसा, करंट, सांप काटना, ट्रैक्टर दुर्घटना जैसी कई जोखिमपूर्ण घटनाएं होती हैं. इन्हीं को देखते हुए सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना शुरू की है, जिसके तहत दुर्घटना में प्रभावित किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है.

नोएडा | Published: 24 May, 2026 | 06:10 PM

Krishak Jeevan Kalyan Yojana: भारत में खेती सिर्फ मेहनत का काम नहीं है, बल्कि इसमें कई तरह के खतरे भी जुड़े रहते हैं. खेतों में काम करते समय मशीन से हादसा, बिजली का करंट लगना, सांप काट लेना, ट्रैक्टर दुर्घटना या खेती में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों के छिड़काव के दौरान हादसे जैसी घटनाएं कई बार किसानों और उनके परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती हैं.

ऐसे मुश्किल समय में मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए राहत देने वाली योजना बनकर सामने आई है. इस योजना के तहत दुर्घटना का शिकार हुए किसानों या मजदूरों के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि संकट के समय उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके.

सरकार ने करोड़ों की मदद पहुंचाई

राज्य सरकार के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक इस योजना के तहत करीब 14.35 करोड़ रुपये की सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है. सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती के दौरान किसी भी दुर्घटना की स्थिति में किसान परिवार आर्थिक संकट में न फंसे और उन्हें समय पर मदद मिल सके. इस योजना के जरिए प्रभावित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहारा देकर उनकी मुश्किलों को कम करने की कोशिश की जा रही है.

योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

खेती के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं कई बार पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर देती हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस योजना को लागू किया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों और कृषि मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा देना, दुर्घटना की स्थिति में तुरंत आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना और खेती-किसानी पर निर्भर परिवारों की आजीविका को सुरक्षित रखना है. इससे संकट के समय परिवारों को सहारा मिलता है और उनकी आर्थिक परेशानियां कुछ हद तक कम हो जाती हैं.

कितनी मिलती है आर्थिक सहायता?

इस योजना के तहत दुर्घटना की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग सहायता राशि दी जाती है.

हादसे की स्थिति मिलने वाली मदद
मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये
पूरी तरह दिव्यांग होने पर 1 लाख रुपये
आंशिक दिव्यांगता होने पर 50 हजार रुपये
अंतिम संस्कार के लिए 4 हजार रुपये

सरकार का कहना है कि यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है.

किन परिस्थितियों में मिलेगा योजना का लाभ?

योजना के तहत खेती-किसानी से जुड़े कई तरह के हादसों को शामिल किया गया है. इनमें मुख्य रूप से ये स्थितियां आती हैं:

जैसी परिस्थितियों में सहायता दी जाती है.

आवेदन की प्रक्रिया क्या है?

अगर किसी किसान या खेतिहर मजदूर के साथ दुर्घटना हो जाती है, तो उसके परिवार को योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन करने का अधिकार होता है. इसके लिए जरूरी है कि दुर्घटना की तारीख से 1 साल के अंदर आवेदन किया जाए. आवेदन फॉर्म भरकर संबंधित जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा करना होता है. सरकार ने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सहायता राशि की स्वीकृति और भुगतान की पूरी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर को दी है, ताकि किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और समय पर मदद मिल सके.

कब नहीं मिलेगा योजना का लाभ?

कुछ खास परिस्थितियों में इस योजना का लाभ नहीं दिया जाता. अगर किसी प्राकृतिक आपदा का मुआवजा पहले से ही किसी दूसरी सरकारी योजना के तहत मिल चुका है, तो उसी नुकसान के लिए इस योजना से दोबारा सहायता नहीं दी जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि एक ही घटना के लिए दो अलग-अलग योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि खेती में जोखिम हमेशा बना रहता है, इसलिए हर किसान और खेतिहर मजदूर को इस योजना की पूरी जानकारी होना जरूरी है. किसान अपने नजदीकी पंचायत कार्यालय, कृषि विभाग या जिला प्रशासन कार्यालय से इस योजना की जानकारी और आवेदन फॉर्म आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.

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