एक पेड़ में 234 वैरायटी के आम देख अचंभे में पड़े शिवराज सिंह चौहान, बोले- विचित्र है पर सत्य है

Fruit Horizon 2026: उत्तर प्रदेश में एक ऐसा आम का पेड़ चर्चा में है, जिस पर 234 अलग-अलग किस्मों के आम लगे हैं. नई ग्राफ्टिंग तकनीक से तैयार इस पेड़ को देखकर हर कोई हैरान है. खेती और बागवानी में विज्ञान का यह अनोखा प्रयोग किसानों के लिए भविष्य में नई कमाई और बेहतर उत्पादन का रास्ता खोल सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 7 May, 2026 | 03:56 PM

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित फ्रूट होराइजन 2026 (Fruit Horizon 2026) कार्यक्रम के दौरान ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी को चौंका दिया. यहां बागवानी संस्थान में एक ऐसा आम का पेड़ तैयार किया गया है, जिसमें एक-दो नहीं बल्कि पूरे 234 तरह के आम लगे हुए हैं. इस अनोखे पेड़ को देखकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) भी हैरान रह गए. उन्होंने कहा कि विज्ञान और नई तकनीक से खेती में चमत्कार संभव है. ये पेड़ इन दिनों किसानों, बागवानी विशेषज्ञों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. खास बात ये है कि इतने प्रकार के आम एक ही पेड़ पर ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए तैयार किए गए हैं.

52 फीट के पेड़ को बनाया 16 फीट का

बागवानी संस्थान के वैज्ञानिकों ने कृषि मंत्री से बताया कि ये आम का पेड़ पहले करीब 52 फीट ऊंचा था और इसकी उम्र लगभग 55 साल थी. बाद में इसकी प्रूनिंग यानी कटाई-छंटाई की गई  और इसे 16 फीट तक छोटा किया गया. इसके बाद इस पेड़ पर अलग-अलग किस्मों की टहनियां जोड़कर नई किस्मों के आम तैयार किए गए. अब इस एक पेड़ पर देश के अलग-अलग हिस्सों में मिलने वाले आम दिखाई दे रहे हैं. इसमें दशहरी, लखनऊ सफेदा, बैंगनपल्ली, तोतापुरी, समृद्धि और कई दूसरी किस्मों के आम लगे हैं. हर डाल पर अलग तरह का आम देखकर लोग हैरान हो रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्रयोग को सफल बनाने में कई साल की मेहनत लगी. खास बात यह रही कि नई तकनीक अपनाने के बाद केवल 16 महीनों में पेड़ पर अलग-अलग किस्मों के फल आने लगे.

कैसे संभव हुआ एक पेड़ में 234 वेराइटी का कमाल

इस अनोखे पेड़ को तैयार करने में ग्राफ्टिंग तकनीक  का इस्तेमाल किया गया. ग्राफ्टिंग यानी कलम लगाने की ऐसी विधि, जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को जोड़कर एक मजबूत और बेहतर पौधा तैयार किया जाता है. इसमें अच्छी किस्म वाली टहनी को दूसरे मजबूत पेड़ पर लगाया जाता है. जब दोनों हिस्से आपस में जुड़ जाते हैं, तो नई टहनी उसी पेड़ का हिस्सा बन जाती है और फल देने लगती है. इसी तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों ने एक ही आम के पेड़ पर 234 अलग-अलग किस्मों की टहनियां जोड़ दीं. यही वजह है कि अब इस पेड़ की हर शाखा पर अलग स्वाद, रंग और आकार के आम दिखाई दे रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. इससे कम जगह में ज्यादा किस्मों के फल उगाए जा सकते हैं.

ग्राफ्टिंग तकनीक किसानों के लिए क्यों फायदेमंद

ग्राफ्टिंग तकनीक केवल वैज्ञानिक प्रयोग नहीं है, बल्कि किसानों की कमाई बढ़ाने का भी एक शानदार तरीका माना जा रहा है. इस तकनीक से किसान एक ही पेड़ पर कई किस्मों के फल तैयार कर सकते हैं. इससे बागवानी में जगह की बचत होती है और उत्पादन भी बढ़ता है. ग्राफ्टिंग से तैयार पौधों में फल जल्दी आने लगते हैं और पौधे ज्यादा मजबूत भी होते हैं. कई बार यह तकनीक पौधों को बीमारियों  से बचाने में भी मदद करती है. अगर किसान इस तकनीक को सही तरीके से अपनाएं, तो वे बाजार की मांग के हिसाब से अलग-अलग किस्मों के फल उगा सकते हैं. इससे उनकी आमदनी बढ़ने की संभावना भी ज्यादा रहती है.

खेती में विज्ञान से बदल रही तस्वीर

आज खेती और बागवानी में नई तकनीकें  तेजी से बदलाव ला रही हैं. पहले जहां किसान पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब विज्ञान की मदद से कम समय में बेहतर उत्पादन लिया जा रहा है. एक पेड़ में 234 तरह के आम लगना इसी बदलाव का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. यह प्रयोग दिखाता है कि अगर वैज्ञानिक तकनीकों का सही इस्तेमाल किया जाए, तो खेती में बड़े चमत्कार किए जा सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसी तकनीकें किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी. यही वजह है कि ये अनोखा आम का पेड़ अब लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.

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