कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) ने केंद्र सरकार से सिफारिश की है कि गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की कीमत में संशोधन किया जाए. आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि घरेलू और व्यावसायिक इस्तेमाल करने वालों के लिए चीनी की दोहरी मूल्य व्यवस्था की संभावनाओं को तलाशा जाए. साथ ही गन्ने की खेती के क्षेत्र और राजस्व-बंटवारे के फॉर्मूले से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी सिफारिश की है.
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को CACP की सिफारिशों के आधार पर 2026-27 के सीजन के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही गन्ने का FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.
कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) ने यह पाया कि गन्ने से बनने वाले इथेनॉल के लिए लागू ‘प्रशासित मूल्य व्यवस्था’ और ‘इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम’ के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की ओर से की जाने वाली इथेनॉल की गारंटीशुदा खरीद ने भारतीय चीनी उद्योग को स्थिर बनाने में अहम भूमिका निभाई है. साथ ही इस व्यवस्था से किसानों को गन्ने का भुगतान भी समय पर होना पक्का हुआ है.
गन्ने के रस, चीनी, चाशनी और ‘B-हैवी शीरे’ वाले इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी
आयोग ने कहा कि हालांकि पिछले पांच वर्षों के दौरान गन्ने के FRP और अनाज से बनने वाले इथेनॉल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की तुलना में गन्ने के रस,चीनी, चीनी की चाशनी और ‘B-हैवी शीरे’ से बनने वाले इथेनॉल की कीमतों में बहुत मामूली बढ़ोतरी हुई है. इसलिए आयोग यह सिफारिश करता है कि सरकार को गन्ने के FRP में हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की कीमतों में संशोधन करना चाहिए. ये सिफारिशें इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि चीनी उद्योग लंबे समय से इथेनॉल की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग करता आ रहा है.
चीनी की घरेलू और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए अलग कीमतें होंगी
आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि घरेलू और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए चीनी की ‘दोहरी मूल्य व्यवस्था’ की संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए. इसका मुख्य कारण यह है कि देश में चीनी के कुल उत्पादन का लगभग 60-65 फीसदी हिस्सा औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में ही इस्तेमाल हो जाता है. आयोग ने बताया कि विभिन्न राज्य सरकारों, चीनी उद्योग और संबंधित उद्योग संघों ने भी चीनी के लिए इस ‘दोहरी मूल्य नीति’ को अपनाने का सुझाव दिया है.
नियमों में बदलाव और सिफारिशों के लिए समिति गठित होगी
CACP ने यह भी पाया कि पिछले एक दशक के दौरान भारतीय चीनी उद्योग में एक बड़ा बदलाव आया है. इस उद्योग ने इथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखते हुए अपने कारोबार को विस्तार दिया है और अपनी उत्पादन क्षमता में भी भारी बढ़ोतरी की है. लेकिन गन्ने की उपलब्धता और चीनी की बाजार में मांग में उस हिसाब से बढ़ोतरी नहीं हुई. इस वजह से क्षमता का इस्तेमाल कम हुआ और 2024-25 के सीजन में 30 फीसदी से ज्यादा चीनी मिलें बंद हो गईं. सुझाव दिया कि एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई जानी चाहिए. यह समिति गन्ने के क्षेत्र के आरक्षण, न्यूनतम दूरी के नियम, राजस्व-बंटवारे के फार्मूले, दोहरी कीमत आदि से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करेगी.
इथेनॉल खरीद कीमतों और चीनी के एमएसपी में संशोधन जरूरी- दीपक बल्लानी
चीनी उद्योग के शीर्ष निकाय इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि सरकार चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) और इथेनॉल खरीद मूल्यों को गन्ने के संशोधित FRP के साथ तालमेल बिठाना जरूरी है. चीनी के MSP और इथेनॉल खरीद मूल्यों में आनुपातिक संशोधन से मिलें बिना किसी वित्तीय दबाव के इन बढ़ी हुई लागतों को वहन कर पाएंगी, जिससे परिचालन स्थिरता बना रहेगा और किसानों को गन्ने का समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा.
इथेनॉल का कम आवंटन मिलने से स्थापित आसवन क्षमता (distillation capacity) और घरेलू खपत के बीच असंतुलन भी पैदा हुआ है. इसके चलते क्षमताओं का कम इस्तेमाल हो रहा है, जिससे उद्योग के भीतर वित्तीय तनाव बढ़ रहा है और रेवेन्यू सोर्स कमजोर पड़ रहे हैं. फीडस्टॉक संतुलन बहाल करने, क्षमता उपयोग में सुधार करने और निवेशकों और हितधारकों को लंबे समय तक नीतिगत मदद देने के लिए, चीनी और इथेनॉल की कीमतों में समय पर संशोधन के साथ-साथ इथेनॉल का न्यायसंगत आवंटन भी जरूरी है.