आलू-शकरकंद रिसर्च में भारत की लंबी छलांग! आगरा में बनेगा देश का सबसे बड़ा अनुसंधान हब

Spice Conference 2026: जयपुर में 19 और 20 सितंबर को राष्ट्रीय मसाला सम्मेलन 2026 का आयोजन होगा. इसमें मसाला किसानों की आय बढ़ाने, बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और मसाला निर्यात बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. सम्मेलन में किसान, किसान उत्पादक संगठन, कारोबारी, निर्यातक, वैज्ञानिक और सरकारी अधिकारी शामिल होंगे.

नोएडा | Published: 7 Sep, 2026 | 06:45 PM

CIP Agra Research Centre: भारत में आलू और शकरकंद की खेती को नई तकनीक और बेहतर किस्मों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. इसी सिलसिले में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. नई दिल्ली के कृषि भवन में हुई इस बैठक में आगरा में बन रहे दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में जोर दिया गया कि नई तकनीक और बेहतर बीजों का फायदा सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए. साथ ही, भारत और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के मिलकर काम करने से आलू और शकरकंद की खेती को और बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी.

आगरा में तैयार हो रहा बड़ा अनुसंधान केंद्र

उत्तर प्रदेश के आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (CSARC) बनाया जा रहा है. इसे खेती में नई तकनीक और नए तरीकों पर काम करने वाला अहम केंद्र बनाने की योजना है. यह केंद्र सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए भी खेती से जुड़ी नई जानकारी और तकनीक पर काम करने का बड़ा मंच बन सकता है. यहां आलू की नई किस्मों, अच्छे बीज तैयार करने के बेहतर तरीकों और बदलते मौसम के हिसाब से खेती करने की तकनीकों पर काम किया जाएगा.

किसानों को मिलेंगी बेहतर और नई किस्में

बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के काम में बेवजह दोहराव नहीं होना चाहिए. दोनों संस्थाएं अपनी-अपनी विशेषज्ञता के हिसाब से काम करें, ताकि समय और संसाधनों की बचत हो और किसानों के लिए कुछ नया तैयार किया जा सके. मंत्री ने यह भी कहा कि आगरा केंद्र के जरिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विकसित उन्नत बीजों और पौधों की किस्मों को भारत लाया जाना चाहिए. इसके बाद भारतीय मिट्टी और मौसम के हिसाब से नई किस्में तैयार की जा सकती हैं. इससे आलू उगाने वाले किसानों को बेहतर उत्पादन और नई बाजार संभावनाओं का फायदा मिल सकता है.

मौसम की मार झेलने वाली किस्मों पर भी काम

आज खेती के सामने बदलता मौसम एक बड़ी चुनौती है. कभी ज्यादा गर्मी तो कभी कम बारिश से फसलों को नुकसान होता है. ऐसे में ऐसी किस्मों की जरूरत बढ़ गई है, जो मौसम में बदलाव का कुछ हद तक सामना कर सकें. अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के महानिदेशक ने बताया कि आगरा केंद्र में ऐसे आलू की किस्मों और खेती की तकनीकों पर काम किया जाएगा. इसमें ऐसी नई किस्में विकसित करने पर ध्यान रहेगा, जो कम पानी या बदलते मौसम की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन दे सकें. इसके साथ ही आलू के बीज तैयार करने की व्यवस्था को भी तेज और बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा.

शकरकंद को बनाया जाएगा ‘सुपरफूड’

बैठक में शकरकंद को लेकर भी खास चर्चा हुई. शकरकंद को आमतौर पर सिर्फ एक साधारण कंद वाली फसल के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. खास तौर पर नारंगी रंग वाले शकरकंद की उन्नत किस्मों में आयरन, जिंक और विटामिन-ए जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. सरकार और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र ऐसी किस्मों को किसानों तक पहुंचाने पर काम करेंगे. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शकरकंद को सिर्फ गांवों और खेतों तक सीमित रखने के बजाय इसे बड़े बाजार में एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ के तौर पर पहचान दिलाने की जरूरत है. अगर इसकी मांग बढ़ती है तो किसानों को भी अपनी फसल का बेहतर दाम मिल सकता है.

खेती के साथ बढ़ेगा कारोबार और निवेश

नई तकनीक और बेहतर किस्मों के आने से केवल उत्पादन बढ़ाने का ही फायदा नहीं होगा, बल्कि आलू और शकरकंद से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है. बेहतर बीज, प्रोसेसिंग और नए उत्पादों के क्षेत्र में निजी कंपनियों के निवेश की संभावना भी बढ़ेगी. बैठक में कृषि मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, बागवानी विभाग और अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. सरकार का जोर इस बात पर है कि वैज्ञानिक संस्थाओं की नई खोज सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा फायदा खेत और किसान तक पहुंचे.

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