ओडिशा सरकार का नया एक्शन प्लान, उर्वरक वितरण में SOP लागू, पारदर्शिता पर जोर
ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026 के लिए उर्वरक आपूर्ति में सख्ती बरती है. यूरिया के डायवर्जन और नकद ट्रांसपोर्ट चार्ज पर रोक लगाई गई है. PACS की पूरी मांग पूरी होने तक निजी बिक्री बंद रहेगी. खाद भुगतान DCCB के जरिए होगा और MARKFED को 60 फीसदी वितरण जिम्मेदारी दी गई है. पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाई गई है.
Odisha News: पश्चिम एशिया में जारी संकट के चलते खाद की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच ओडिशा सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए सख्त कदम उठाए हैं. सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि यूरिया सहित उर्वरकों का अवैध रूप से निजी व्यापारियों की ओर होने वाला डायवर्जन रोका जाए. साथ ही पूरी वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके. सहकारिता विभाग ने कहा है कि कई जगहों पर प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) की जरूरत पूरी होने से पहले ही खाद निजी दुकानदारों तक पहुंच रही है. इसे गंभीर मानते हुए विभाग ने ओडिशा राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करे.
निर्देशों के अनुसार, जब तक जिला स्तरीय समितियों (DLC) द्वारा तय PACS और LAMPS की पूरी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक निजी रिटेलरों को खाद की आपूर्ति नहीं की जाएगी. सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को समय पर और बराबरी से खाद उपलब्ध हो सके और किसी तरह की कालाबाजारी या डायवर्जन न हो. विभाग ने यह भी कहा है कि कुछ जगहों पर ट्रांसपोर्ट ठेकेदार PACS और LAMPS से खाद ढुलाई के नाम पर नकद पैसे वसूल रहे हैं. इसके साथ ही खाद कंपनियों की ओर से मिलने वाले मार्जिन का गलत तरीके से बंटवारा किए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं.
तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए
सरकार ने इसे सहकारी वितरण व्यवस्था का उल्लंघन बताया है और ओडिशा राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही जिलों में खाद की आवाजाही पर सख्त निगरानी बढ़ाने को कहा गया है. विभाग ने अपने पत्र में साफ निर्देश दिया है कि PACS और LAMPS से किसी भी हालत में नकद में ट्रांसपोर्ट चार्ज नहीं लिया जाएगा, ताकि पूरी व्यवस्था पारदर्शी और सही तरीके से चल सके.
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वितरण पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए
सरकार ने निर्देश दिया है कि खाद और उसके परिवहन से जुड़ी सभी लागतों को अब आधिकारिक बिलिंग सिस्टम में शामिल किया जाए और पूरा भुगतान केवल जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) के जरिए ही किया जाए. इसके साथ ही ओडिशा राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) के क्षेत्रीय प्रबंधकों को इस नियम के पालन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी गई है. सरकार ने यह भी कहा है कि खाद कंपनियों की ओर से मिलने वाले मार्जिन का वितरण पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए. सामान्य नियम के अनुसार यह मार्जिन PACS/LAMPS और MARKFED के बीच 75:25 के अनुपात में बांटा जाएगा, जब तक कि किसी विशेष स्थिति में अलग से मंजूरी न दी गई हो.
खाद आपूर्ति की रोजाना समीक्षा करने के निर्देश
सरकार ने कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा जारी संयुक्त उर्वरक SOP को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया है. इसके तहत MARKFED को एक मजबूत निगरानी प्रणाली बनाने और खाद आपूर्ति की रोजाना समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही, हर हफ्ते अनुपालन रिपोर्ट सहकारिता विभाग को भेजनी होगी. ये निर्देश इसलिए अहम हैं क्योंकि सरकार ने तय किया है कि खरीफ 2026 में जिलेवार खाद की कुल जरूरत का 60 प्रतिशत वितरण PACS के जरिए MARKFED द्वारा किया जाएगा. इसका उद्देश्य सहकारी व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को खासकर यूरिया जैसी खाद समय पर उपलब्ध कराना है, ताकि कृषि सीजन में किसी तरह की कमी न हो.