किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ SKM ने खोला मोर्चा, 10 अगस्त को रेल रोको, जेल भरो आंदोलन
संयुक्त किसान मोर्चा ने विभिन्न मुद्दों को लेकर 10 अगस्त को देशभर की 1000 जगहों पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. 17 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों, विपक्ष के नेताओं, सांसदों और विधायकों को मांगों का चार्टर सौंपा जाएगा. मोर्चा ने नवंबर तक होने वाले प्रदर्शनों की तारीखों का ऐलान किया है.
देशभर के किसान संगठनों के मंच संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते समेत कई देशों के साथ किए जा रहे फ्री ट्रेड डील को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है. दिल्ली में आयोजित एसकेएम के अखिल भारतीय सम्मेलन में कई मुद्दों पर किसान संगठनों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया. एसकेएम ने 10 अगस्त को देशभर के 1000 जगहों, शहरों में रेल रोको, जेल भरो आंदोलन करने की घोषणा की है. वहीं, 17 अगस्त से नवंबर तक के कार्यक्रम जारी किए गए हैं.
इन 10 मांगों को पूरी कराने के लिए आंदोलन होगा
संयुक्त किसान मोर्चा ने नई दिल्ली के मिंटो रोड स्थित सिविक सेंटर ऑडिटोरियम में अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें 10 मुख्य मांगों पर किसान संगठनों ने सहमति जताते हुए धरना, विरोध प्रदर्शन, पैदल मार्च, रेल रोको समेत मांगों का चार्ट जारी किया गया है. एसकेएम ने कहा कि है कि FTA नहीं चलेगा, MSP@C2+50% पर फसलों की खरीद तय की जाए. किसानों का पूरा कर्ज माफ किया जाए. आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और बिजली का निजीकरण नहीं किया जाए.
- भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को न करना और सभी FTA को रद्द करना
- सभी फसलों की गारंटीकृत खरीद के साथ MSP@C2+50% के लिए कानून बनाना
- ग्रामीण कर्ज और किसानों व दिहाड़ी मजदूरों की आत्महत्या को खत्म करने के लिए पूरा कर्ज माफ करना
- आत्महत्या करने वाले प्रत्येक किसान परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देना
- 4 लेबर कोड को खत्म करना और सभी मजदूरों के लिए 26,000 रुपये का न्यूनतम वेतन
- MGNREGA को बहाल करना जिसमें 200 दिन का काम और 700 रुपये मजदूरी सुनिश्चित हो
- बिजली निजीकरण बिल 2025 को रद्द किया जाए
- बीज बिल 2025 और NFSA संशोधन बिल को वापस लिया जाए
- जबरन जमीन अधिग्रहण करना बंद किया जाए और कॉर्पोरेट-समर्थक भूमि पूलिंग पर रोक लगाई जाए
- आदिवासियों व गैर-आदिवासी वन निवासियों के लिए LARR एक्ट 2013 और FRA 2006 के आधार पर भूमि अधिकारों की रक्षा की जाए
10 मार्च को देशभर में रेल रोको और जेल भरो आंदोलन
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 10 अगस्त को जो ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ है. इस मौके पर देश भर में 1,000 जगहों पर किसान ‘जेल भरो’, ‘रेल रोको’ और ‘सड़क रोको’ जैसे बड़े विरोध प्रदर्शन करेंगे और देश-विरोधी FTA (मुक्त व्यापार समझौतों) के खिलाफ आवाज उठाएंगे. कई संगठनों और मंचों ने SKM का समर्थन करने और उनके साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है.
17 अगस्त को पीएम, सांसदों को मांग चार्ट सौंपेगे किसान
इसके बाद 17 अगस्त को SKM का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं, सांसदों और विधायकों को अपनी मुख्य मांगों का चार्टर सौंपेगा और उन पर सकारात्मक कार्रवाई की मांग करेगा.
आंदोलन की तैयारियों के लिए देशभर में राज्य स्तरीय सम्मेलन होंगे
SKM आने वाले दो महीनों में राज्य-स्तरीय सम्मेलन आयोजित करेगा ताकि लंबे समय तक चलने वाले स्वतंत्र और संयुक्त संघर्षों की तैयारी की जा सके. सभी सदस्य संगठन स्वतंत्र और संयुक्त अभियान शुरू करेंगे, जैसे कि बड़ी पदयात्राएं, वाहन जत्थे और ट्रैक्टर मार्च, जिनका समापन जनसभाओं, महापंचायतों और राज्य-स्तरीय रैलियों में होगा.
3 अक्तूबर को लखीमपुर में महापंचायत
3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी शहीद दिवस पर ग्राम महापंचायत आयोजित की जाएगी और सदस्य संगठन 26 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले लंबे संघर्ष के लिए स्वयंसेवकों की सूची तैयार करेंगे, जो अहम मांगों के पूरा होने तक चलेगा.
26 नवंबर से पूरे देश में किसार मार्च होगा
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि अगर BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार MSP और कर्ज माफी समेत 9 दिसंबर 2021 के अपने लिखित वादे का उल्लंघन करती रहती है और मांगों का चार्टर स्वीकार नहीं करती है, तो SKM अपने संघर्ष को और तेज करेगा. सम्मेलन ने किसानों से 26 नवंबर 2026 से नई दिल्ली और पूरे भारत में 100 जगहों पर किसान मार्च और कई दिनों तक चलने वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों की तैयारी करने का आह्वान किया है. संघर्ष का स्वरूप, जगह और तारीख समय आने पर तय की जाएगी.
एसकेएम ने 10 मांगों का चार्टर जारी किया है.
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेताओं में से एक, आशुतोष रंका ने सम्मेलन का अभिवादन किया और छात्रों के उस सफल संघर्ष का अनुभव साझा किया जिसके कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. साथ ही उन्होंने आने वाले संघर्षों में छात्रों और किसानों के बीच और मजबूत एकता की अपील की.
2020 के आंदोलन में शहीद किसानों की याद में शहीद स्मारक बनेगा
सम्मेलन में दो प्रस्ताव पारित किए गए. एक मांग यह थी कि दिल्ली सरकार, दिल्ली बॉर्डर पर चले ऐतिहासिक एक साल लंबे किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए 736 किसानों के सम्मान में ‘शहीद स्मारक’ बनाने के लिए सिंघू बॉर्डर पर पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराए. दूसरी मांग गंभीर सूखे, बाढ़ और पर्यावरण संकट से निपटने, और फसल, पशुधन, घर व आजीविका के नुकसान की भरपाई के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के साथ एक प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली की जरूरत पर थी.