कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरकर 100 के करीब पहुंच रही है और इंडस्ट्रियल ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. उन्होंने इसे आने वाली महंगाई के साफ संकेत बताया और कहा कि ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि भविष्य की महंगाई का इशारा हैं. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल, डीजल के साथ-साथ एलपीजी गैस महंगे हो जाएंगे. केंद्र सरकार इनकी कीमतें बढ़ा देगी.
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महंगाई के जो संकेत दिख रहे हैं, सरकार इसे ‘सामान्य’ बता सकती है, लेकिन हकीकत में उत्पादन और परिवहन महंगा होगा. MSME सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे और विदेशी निवेश तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा. यानी हर परिवार की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा.
रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी – ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं।
और पढ़ेंसरकार चाहे इसे “नॉर्मल” बताए, लेकिन हकीकत ये है:
• उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे
• MSMEs को सबसे ज्यादा चोट…— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 21, 2026
पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम बढ़ना तय है
राहुल गांधी ने कहा कि चुनावों के बाद पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम बढ़ना तय है. उनका कहना है कि मोदी सरकार के पास कोई ठोस दिशा या रणनीति नहीं है, सिर्फ बयानबाजी है. असली सवाल यह है कि सरकार क्या कह रही है, बल्कि आपकी थाली में क्या बचा है. दरअसल, पिछले शुक्रवार को रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.12 पर पहुंच गई. यह गिरावट मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में परेशानी के बीच आई. रुपये ने 0.55 फीसदी की गिरावट के साथ 93.12 का स्तर छू लिया, जबकि बुधवार को इसका पिछला निचला स्तर 92.63 था. पश्चिम एशिया तनाव शुरू होने के बाद रुपया लगभग 2 फीसदी कमजोर हो चुका है.
विशेषज्ञों के अनुसार, USD-INR जोड़ी 92.8 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रही है, जो बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक जोखिम के कारण रुपये पर दबाव को दर्शाता है. अगर रुपया 93.00 से ऊपर बना रहता है तो इसकी कमजोरी और बढ़ सकती है, जिसमें 93.20- 93.40 का रेजिस्टेंस और 92.70, 92.50- 92.40 का सपोर्ट नजर आ रहा है.
ईरान- इजरायल जंग से आम कारोबार प्रभावित
बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में आम के कारोबार पर असर पड़ा है. खासकर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के किसान और व्यापारी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. पिछले कुछ हफ्तों में सैकड़ों करोड़ रुपये के आम पल्प कई गल्फ देशों के बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. जिले से लगभग 300 करोड़ रुपये के पल्प दुबई, मस्कट और अन्य बंदरगाहों पर रुके हुए हैं, जबकि नए 1,000 करोड़ रुपये के कंसाइनमेंट भी एक्सपोर्ट के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी डिलीवरी अनिश्चित है.
87,000 हेक्टेयर में तोतापुरी आम की खेती होती है
चित्तूर, आंध्र प्रदेश का एक बड़ा आम प्रसंस्करण केंद्र है. यहां 87,000 हेक्टेयर में तोतापुरी आम की खेती होती है और लगभग 47 प्रोसेसिंग यूनिटें आम से पल्प तैयार कर इसे दुनियाभर के फूड और बेवरेज मार्केट में भेजती हैं. युद्ध के कारण यह कारोबार पूरी तरह प्रभावित हुआ है और व्यापारियों को नुकसान का डर सता रहा है.