ईरान-इजरायल जंग से कारोबार प्रभावित.. बंदरगाहों पर फंसा 300 करोड़ रुपये का आम

गल्फ देशों में चल रहे संघर्ष के चलते कर्नाटक के धारवाड़, बेलगावी और हवेली जिले के आम उत्पादक भी प्रभावित हुए हैं. ऐसे में उत्पादकों को अपने निर्यात योजना पर फिर से विचार करना पड़ रहा है. अब वे अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 20 Mar, 2026 | 04:23 PM

Mango Export: ईरान-इजरायल के बीच चल रही जंग के चलते आंध प्रदेश और कर्नाटक में आम कारोबार पर असर पड़ा है. बात अगर आंध प्रदेश की करें तो चित्तूर जिले के किसान और व्यापारी इस युद्ध से ज्यादा प्रभावित हुए हैं. पिछले कुछ हफ्तों में सैकड़ों करोड़ रुपये के आम पल्प कई पश्चिम एशियाई बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. आम निर्यातकों का कहना है कि जिले से भेज गए करीब 300 करोड़ रुपये के आम पल्प कंसाइनमेंट दुबई, मस्कट और अन्य गल्फ बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. इसके अलावा लगभग 1,000 करोड़ रुपये के नए कंसाइनमेंट भी एक्सपोर्ट के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी स्थिति अनिश्चित है. ऐसे में व्यापारियों को नुकसान का भय सता रहा है.

दरअसल, चित्तूर, आंध्र प्रदेश का एक बड़ा आम प्रसंस्करण केंद्र है. यहां से कई देशों में आम पल्प का निर्यात  किया जाता है, लेकिन जंग के चलते पल्प व्यापार पूरी तरह प्रभावित हुआ है. चित्तूर जिले में लगभग 87,000 हेक्टेयर में तोतापुरी आम की खेती होती है. यहां लगभग 47 आम प्रोसेसिंग यूनिटें हैं, जो आम से पल्प तैयार करके उसे दुनियाभर के फूड और बेवरेज बाजारों में भेजती हैं.

1,300 करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित

पुथलपत्तु विधायक के मुरली मोहन ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि चित्तूर, तिरुपति और अन्नामय्या जिलों में फैली पल्प इंडस्ट्री साल में दो बार पारंपरिक रूप से निर्यात करती है. फरवरी से अप्रैल और अक्टूबर से दिसंबर तक आम पल्प  निर्यात किए जाते हैं. लेकिन ईरान-इजरायल जंग  के चलते कारोबार प्राभिवत हो रहा है. के मुरली मोहन ने कहा कि तोतापुरी आम की खरीद के लिए मई से सितंबर के बीच का समय बेहतर रहता है, जिन्हें प्रोसेस करके एसेप्टिक पल्प के रूप में विदेशों में भेजा जाता है. तिरुपति के विधायक ने कहा कि चित्तूर जिले की आम पल्प इंडस्ट्री संकट में है, क्योंकि लगभग 1,300 करोड़ रुपये के निर्यात पहले ही युद्ध के कारण प्रभावित हो चुके हैं. अगर यह बाधा लंबी चली, तो मई से अगस्त तक होने वाली अगली आम खरीद पर भी असर पड़ेगा, जिससे हजारों किसान, जो तोतापुरी आम पल्प फैक्ट्रियों में बेचते हैं, प्रभावित हो सकते हैं.

अब दूसरे देश की तरफ रूख करेंगे व्यापारी

वहीं, गल्फ देशों में चल रहे संघर्ष के चलते कर्नाटक के धारवाड़, बेलगावी और हवेली जिले के आम उत्पादक भी प्रभावित हुए हैं. ऐसे में उत्पादकों को अपने निर्यात योजना पर फिर से विचार करना पड़ रहा है. अब वे अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं. पिछले दस सालों से इस क्षेत्र के अल्फांसो क्वालिटी आम गल्फ देशों जैसे UAE, ईरान, कुवैत और इराक में अच्छे दाम पर बिकते रहे हैं. लेकिन नई फसल के आने में सिर्फ कुछ ही हफ्ते बचे हैं और किसान डर रहे हैं कि संघर्ष से पुराने व्यापार रास्ते और मांग प्रभावित हो सकती है. धारवाड़ के आम उत्पादकों का कहना है कि गल्फ निर्यात हमारे लिए सालों से रीढ़ की हड्डी रहा है, लेकिन इस समय की स्थिति ने सब कुछ अस्थिर कर दिया है, इसलिए इस मौसम में हम पूरी तरह उन बाजारों पर भरोसा नहीं कर सकते.

अंडा कारोबार भी हुआ प्रभावित

बता दें कि ईरान-इजरायल जंग से केवल आम कारोबार ही प्रभाविक नहीं हुआ है, बल्कि पोल्ट्री उद्योग  पर पड़ रहा है. इसके चलते खाड़ी देशों में तेलंगाना से अंडे का निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है. अभी अंडे का भाव गिरकर करीब 4.20 रुपये प्रति पीस रह गया है. ऐसे में अंडा किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. हालांकि, चिकन महंगा हो रहा है. अभी यह 335 रुपये किलो बिक रहा है. अंडा व्यापारियों का कहना है कि अगर इसी तरह खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति बनी रही, तो अंडे की कीमतों में और कमी आ सकती है.

 

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