टेक्सटाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव, पॉलिएस्टर छोड़ इस वजह से कपास की ओर बढ़ रहीं मिलें

कपास के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी मांग बढ़ रही है. हाल के समय में चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कॉटन यार्न की मांग में तेजी आई है. इसका एक बड़ा कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाएं हैं, जिनके चलते कई देश भारत से खरीदारी बढ़ा रहे हैं.

नई दिल्ली | Published: 21 Mar, 2026 | 11:06 AM

Cotton demand: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब कृषि और टेक्सटाइल सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से मैनमेड फाइबर (MMF) जैसे पॉलिएस्टर के दाम तेजी से बढ़ गए हैं. इसका सीधा फायदा अब कपास (कॉटन) को मिलता नजर आ रहा है, क्योंकि उद्योग एक बार फिर प्राकृतिक फाइबर की ओर लौटने लगा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कपास की मांग और कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

कच्चे तेल की कीमतों ने बदला खेल

दरअसल, MMF यानी पॉलिएस्टर जैसे फाइबर पेट्रोकेमिकल्स से बनते हैं, जो सीधे तौर पर कच्चे तेल पर निर्भर होते हैं. जैसे ही तेल की कीमत बढ़ती है, वैसे ही इन फाइबर की लागत भी बढ़ जाती है.

हाल के दिनों में पॉलिएस्टर फाइबर की कीमतों में 10 से 25 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है. ऐसे में कपड़ा उद्योग के लिए MMF का इस्तेमाल महंगा हो गया है और अब कई मिलें फिर से कपास की ओर रुख कर रही हैं.

कपास की खपत बढ़ने की उम्मीद

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अध्यक्ष विनय एन. कोटक के अनुसार, इस सीजन 2025-26 में कपास की खपत पहले के अनुमान से करीब 10 लाख गांठ अधिक हो सकती है.

उन्होंने बताया कि MMF महंगा होने के कारण कई टेक्सटाइल यूनिट्स, जो पहले मैनमेड फाइबर का इस्तेमाल कर रही थीं, अब कपास की तरफ लौट रही हैं. इससे घरेलू बाजार में कपास की मांग मजबूत हो रही है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी मिल रहा सहारा

कपास के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी मांग बढ़ रही है. हाल के समय में चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कॉटन यार्न की मांग में तेजी आई है. इसका एक बड़ा कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाएं हैं, जिनके चलते कई देश भारत से खरीदारी बढ़ा रहे हैं.

कीमतों में भी दिख रही तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कपास के दाम बढ़े हैं. ICE पर कॉटन फ्यूचर्स मार्च की शुरुआत में करीब 60.65 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर 69.34 सेंट तक पहुंच गए थे. इसी ट्रेंड को देखते हुए कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने भी घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी की है. पिछले कुछ दिनों में CCI ने कपास के दाम 1,400 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) तक बढ़ाए हैं.

CCI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता के अनुसार, यह बढ़ोतरी वैश्विक बाजार के रुझान के अनुरूप है और कपास की मांग भी अच्छी बनी हुई है.

उत्पादन और खरीद का आंकड़ा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 सीजन में CCI ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 104 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद की है. इसके अलावा, रोजाना 1.5 से 1.6 लाख गांठ कपास की बिक्री भी हो रही है, जिससे बाजार में इसकी मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है.

बाजार में अनिश्चितता भी बरकरार

हालांकि मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में कुछ अनिश्चितता भी बनी हुई है. रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, MMF की कीमतें कच्चे तेल पर निर्भर होने के कारण अस्थिर बनी रहेंगी. उन्होंने बताया कि कई मिलें फिलहाल जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रही हैं, क्योंकि युद्ध और वैश्विक हालात को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है.

कपास के लिए बड़ा मौका

पिछले कुछ वर्षों में कपास को MMF से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही थी. इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी काउंसिल के अनुसार, वैश्विक फाइबर खपत में कपास की हिस्सेदारी 40 फीसदी से घटकर 25 फासदी से नीचे आ गई थी.

लेकिन अब बदलते हालात कपास के लिए नया अवसर लेकर आए हैं. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो कपास एक बार फिर टेक्सटाइल उद्योग में अपनी मजबूत पकड़ बना सकता है.

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