Report: जायद सीजन में 15 लाख हेक्टेयर पार पहुंची बुवाई, धान पीछे तो तिलहन-दलहन ने पकड़ी रफ्तार

जायद फसलों की अच्छी शुरुआत के पीछे पानी की उपलब्धता भी बड़ा कारण है. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का 64 प्रतिशत है. मौजूदा भंडारण 118.140 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत और सामान्य स्तर से 25 प्रतिशत अधिक है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 19 Feb, 2026 | 01:39 PM

zaid crop sowing 2026: रबी की फसल कटने के बाद खेत खाली नहीं रहते. किसान तुरंत अगली तैयारी में जुट जाते हैं. यही समय होता है जायद सीजन का, जो गर्मियों की फसलों के लिए जाना जाता है. इस साल जायद फसलों की बुवाई ने शुरुआत में ही रफ्तार पकड़ ली है. ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कुल रकबा पिछले साल से ज्यादा हो गया है. खास बात यह है कि मक्का और मूंगफली जैसी फसलों की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है, जबकि धान की बुवाई में हल्की गिरावट दर्ज की गई है.

कुल बुवाई में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी

कृषि मंत्रालय के 13 फरवरी तक के आंकड़ों के अनुसार, जायद फसलों की बुवाई 15.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 14.75 लाख हेक्टेयर था. यानी इस बार करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जायद फसलें मई तक बोई जाती हैं. पहले इनका आंकड़ा रबी या खरीफ में ही जोड़ दिया जाता था, लेकिन अब इनकी अलग से निगरानी की जा रही है. इससे साफ तस्वीर सामने आ रही है कि किसान इस सीजन को गंभीरता से ले रहे हैं.

धान में 2.7 प्रतिशत की कमी

इस बार धान का रकबा 2.7 प्रतिशत घटकर 12.80 लाख हेक्टेयर रह गया है. पिछले साल यह 13.16 लाख हेक्टेयर था. धान पानी पर ज्यादा निर्भर फसल है, इसलिए कई इलाकों में किसान कम पानी वाली फसलों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. हालांकि गिरावट बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन यह संकेत देती है कि खेती के पैटर्न में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है.

मोटे अनाजों में तेज उछाल

जायद सीजन में मोटे अनाजों (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) का रकबा इस बार काफी बढ़ा है. पिछले साल जहां यह केवल 50,000 हेक्टेयर था, वहीं इस साल यह बढ़कर 82,000 हेक्टेयर हो गया है.

मक्का की बुवाई 0.48 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.63 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है. इसके अलावा ज्वार का रकबा 0.03 लाख हेक्टेयर, रागी 0.09 लाख हेक्टेयर और बाजरा 0.06 लाख हेक्टेयर तक दर्ज किया गया है. सरकार द्वारा मोटे अनाज को बढ़ावा देने और बाजार में बढ़ती मांग का असर साफ दिखाई दे रहा है.

तिलहन में बड़ी छलांग

तिलहन फसलों के तहत कुल रकबा पिछले साल 0.59 लाख हेक्टेयर था, जो इस बार बढ़कर 0.99 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसमें मूंगफली का हिस्सा सबसे ज्यादा है, जिसका रकबा 0.87 लाख हेक्टेयर है. सूरजमुखी और तिल दोनों का क्षेत्र लगभग 0.06-0.06 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है. मूंगफली की बढ़ती मांग और अच्छे दाम किसानों को इस फसल की ओर आकर्षित कर रहे हैं.

दलहन में भी बढ़त, मूंग सबसे आगे

जायद सीजन में दलहन फसलों का रकबा 0.50 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 0.58 लाख हेक्टेयर हो गया है. मूंग की बुवाई 0.44 लाख हेक्टेयर में की गई है, जबकि उड़द 0.10 लाख हेक्टेयर में बोई गई है. खरीफ सीजन 2025-26 के लिए दालों का उत्पादन अनुमान 7.41 मिलियन टन है, जो 2024-25 के 7.73 मिलियन टन से कम है. ऐसे में जायद दलहन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य समर पल्सेस के प्रमुख उत्पादक हैं.

जलाशयों में 64 प्रतिशत पानी

जायद फसलों की अच्छी शुरुआत के पीछे पानी की उपलब्धता भी बड़ा कारण है. केंद्रीय जल आयोग के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का 64 प्रतिशत है.

मौजूदा भंडारण 118.140 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत और सामान्य स्तर से 25 प्रतिशत अधिक है. पर्याप्त पानी होने से सिंचाई को लेकर किसानों का भरोसा बढ़ा है.

पिछले वर्षों का रिकॉर्ड

पिछले पांच सालों में जायद फसलों का औसत रकबा 75.37 लाख हेक्टेयर रहा है. 2024-25 में यह रिकॉर्ड 83.92 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया था. देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन में जायद फसलों की हिस्सेदारी 19.11 मिलियन टन रही थी, जो कुल उत्पादन का 5.3 प्रतिशत है.

बदलता रुझान, नई उम्मीद

इस साल के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि किसान बाजार, पानी और सरकारी नीतियों को ध्यान में रखकर फसल चुन रहे हैं. मक्का, मूंगफली और दालों में बढ़ता रकबा यही संकेत देता है. अगर मौसम अनुकूल रहा और सिंचाई की स्थिति बनी रही, तो जायद सीजन का उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी.

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