3 करोड़ की लागत से बनेगा हिमाचल का पहला ट्राउट फिश सेंटर, अब गांवों में ही मिलेगा रोजगार

ट्राउट मछली की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. होटल, रेस्टोरेंट और बड़े शहरों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में किसान कम जगह और कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सरकार लोगों को इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है. स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें ट्राउट पालन से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 19 Feb, 2026 | 12:09 PM

Himachal Pradesh trout centre: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियां अब एक नई पहचान बनाने जा रही हैं. कांगड़ा जिले की बोह घाटी में राज्य का पहला ट्राउट मछली केंद्र स्थापित किया जा रहा है. यह कदम न केवल मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर देने के लिए भी उठाया गया है. सरकार का मानना है कि इस परियोजना से इलाके की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.

क्या है ट्राउट मछली और क्यों है खास

ट्राउट एक ठंडे पानी में पाई जाने वाली मीठे पानी की मछली है. यह साफ, तेज बहने वाली नदियों में अच्छे से बढ़ती है. हिमाचल की पहाड़ी नदियां ट्राउट के लिए बिल्कुल अनुकूल मानी जाती हैं, क्योंकि यहां पानी ठंडा और ऑक्सीजन से भरपूर होता है. राज्य में पहले से रेनबो और ब्राउन ट्राउट जैसी प्रजातियां पब्बर, ब्यास, तीर्थन, उहल और बास्पा नदियों में पाई जाती हैं.

अब कांगड़ा की बोह घाटी में ट्राउट हैचरी बनाई जा रही है, जहां मछलियों के बीज तैयार किए जाएंगे और उन्हें पालन के लिए किसानों को दिया जाएगा. इससे संगठित तरीके से ट्राउट उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.

सरकार ने दिए 3 करोड़ से ज्यादा रुपये

इस परियोजना के लिए करीब 3.03 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं. जानकारी के मुताबिक, हैचरी का ज्यादातर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. आने वाले समय में यहां नियमित रूप से ट्राउट मछली का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा.

शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस केंद्र की घोषणा सरकार के पहले बजट में की गई थी. उनका कहना है कि इससे कांगड़ा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सीधा फायदा होगा.

युवाओं और किसानों के लिए मौका

ट्राउट मछली की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. होटल, रेस्टोरेंट और बड़े शहरों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में किसान कम जगह और कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सरकार लोगों को इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है.

स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें ट्राउट पालन से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है. इससे गांवों में ही रोजगार के अवसर पैदा होंगे और लोगों को बाहर पलायन नहीं करना पड़ेगा.

बिक्री और सप्लाई की भी व्यवस्था

मछली की बिक्री को आसान बनाने के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं. बर्फ के डिब्बों से लैस पांच मोटरसाइकिलें दी गई हैं, ताकि ताजी मछली सीधे बाजार तक पहुंचाई जा सके. जल्द ही एक और मोटरसाइकिल जोड़ी जाएगी.

शाहपुर और धर्मशाला में दो फिश स्टॉल भी खोले जाएंगे, जहां लोगों को ताजी ट्राउट मछली मिलेगी. इससे किसानों को अच्छा दाम मिलेगा और उपभोक्ताओं को ताजा उत्पाद.

पर्यटन को मिलेगा नया सहारा

बोह घाटी पहले से अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है. अब ट्राउट केंद्र बनने से यहां मछली पालन और फिशिंग पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है. प्रकृति प्रेमी और मछली पकड़ने के शौकीन यहां आकर नया अनुभव ले सकेंगे.

कुल मिलाकर, कांगड़ा में बनने वाला यह ट्राउट केंद्र केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि स्थानीय विकास की दिशा में बड़ा कदम है. इससे रोजगार, आय और पर्यटन तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है.

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Published: 19 Feb, 2026 | 12:05 PM

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