Owl Facts: जंगल की खामोश रात, ठंडी हवा और अचानक हू-हू की आवाज-यही पहचान है उल्लू की. यह पक्षी जितना शांत दिखाई देता है, उतना ही तेज और समझदार शिकारी भी होता है. सदियों से इंसान उल्लुओं को रहस्य, बुद्धिमानी और प्रकृति के संतुलन से जोड़कर देखता आया है. आज भी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी को यह पक्षी आकर्षित करता है. आइए जानते हैं उल्लुओं की दुनिया से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें, जो आपको हैरान कर सकती हैं.
तेज नजर और घूमने वाली गर्दन बनाती है खास
उल्लू की सबसे बड़ी ताकत उसकी नजर होती है. कुछ प्रजातियों की आंखें इंसानों की आंखों जितनी बड़ी होती हैं, लेकिन वे गोल नहीं बल्कि ट्यूब जैसी होती हैं. इसी वजह से उल्लू अपनी आंखें घुमा नहीं सकता. इस कमी को पूरा करने के लिए प्रकृति ने उसे एक खास क्षमता दी है-वह अपनी गर्दन को लगभग 270 डिग्री तक घुमा सकता है. उल्लू की आंखें कम रोशनी में भी बहुत साफ देख सकती हैं. रात में शिकार ढूंढने के लिए यह क्षमता उसे दूसरे पक्षियों से अलग बनाती है. उनकी आंखों में एक पारदर्शी झिल्ली भी होती है, जो शिकार के दौरान आंखों की सुरक्षा करती है.

रात में शिकार करने वाले उल्लू की रोचक जानकारी.
सुनने की शक्ति से पकड़ता है शिकार
उल्लू का सुनने का तरीका भी बेहद खास होता है. उसके कान एक-दूसरे से थोड़े अलग स्थान पर होते हैं, जिससे वह आवाज की दिशा तुरंत पहचान लेता है. यही कारण है कि वह बर्फ के नीचे छिपे छोटे जानवरों की हल्की सी आवाज भी सुन सकता है. उल्लू के चेहरे के आसपास गोल पंख होते हैं, जो आवाज को कानों तक पहुंचाने में मदद करते हैं. उसके पंख इतने मुलायम होते हैं कि उड़ते समय लगभग कोई आवाज नहीं होती. इसी वजह से शिकार को पता ही नहीं चलता कि खतरा पास आ चुका है. उल्लू अक्सर रात में शिकार करता है और चूहे, खरगोश, छोटे पक्षी और अन्य छोटे जानवर उसका भोजन होते हैं.

घोंसले बनाने में कम मेहनत करता है.
घोंसला बनाने और बच्चों की देखभाल का तरीका
उल्लू अपने घोंसले बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं करता. कई बार वह दूसरे पक्षियों के पुराने घोंसले, पेड़ों के खोखले हिस्से या जमीन के बिलों में रहता है. मादा उल्लू आमतौर पर नर से बड़ी होती है और अंडों को सेने का काम करती है. नर उल्लू इस दौरान भोजन लाकर मादा को देता है. आमतौर पर एक बार में दो से तीन अंडे दिए जाते हैं, जो लगभग एक महीने में फूटते हैं. कुछ प्रजातियां फरवरी और मार्च में घोंसले बनाना शुरू कर देती हैं. उल्लू के पंखों का रंग उसके आसपास के वातावरण जैसा होता है, जिससे वह आसानी से छिप सकता है. यह छिपाव उसे शिकार करने और खुद को सुरक्षित रखने में मदद करता है.

कई देशों में उल्लू को बुद्धिमानी का प्रतीक माना जाता है.
इंसानों के साथ पुराना रिश्ता
उल्लुओं का जिक्र हजारों साल पुराने चित्रों और कहानियों में मिलता है. मी़डिया रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस की गुफाओं में बर्फीले उल्लू की तस्वीरें मिली हैं. यूनान और रोम की पुरानी चीजों पर भी उल्लू के चित्र देखे गए हैं. कई देशों में उल्लू को बुद्धिमानी का प्रतीक माना जाता है. आज भी लोग जंगल में ओवल प्राउल जैसे कार्यक्रमों में जाकर उल्लुओं को देखने का आनंद लेते हैं. उनकी आवाज की नकल करने पर कई बार उल्लू पास भी आ जाता है, जिससे लोग उन्हें करीब से देख पाते हैं. उल्लू प्रकृति का एक अनोखा और उपयोगी पक्षी है. यह खेतों और जंगलों में चूहों जैसे जानवरों की संख्या को नियंत्रित करके पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. शांत स्वभाव, तेज इंद्रियां और रहस्यमयी जीवनशैली-यही उल्लू को सच में खास बनाती है.