Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार को प्लेन क्रैश में निधन हो गया. इस हादसे में उनके साथ चार और लोगों की भी मौत हो गई. अचानक उनके चले जाने से महाराष्ट्र के साथ- साथ पूरे देश में शोक की लहर है. खासकर महाराष्ट्र के किसानों, कोऑपरेटिव सेक्टर, शुगर इंडस्ट्री को बहुत बड़ा धक्का लगा है. क्योंकि उन्होंने इन तीनों सेक्टरों के उत्थान के लिए बहुत काम किया था. कहा जा रहा है कि अजित पवार लोकल बॉडी इलेक्शन में प्रचार करने के लिए अपने इलाके में जा रहे थे. तभी बारामती के पास लैंडिंग के दौरान नियंत्रण खोने से विमान हादसे का शिकार हो गया.
अजित पवार का जीवन और करियर महाराष्ट्र के कोऑपरेटिव सेक्टर से गहराई से जुड़ा हुआ था, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. उन्होंने 22 साल की उम्र में पुणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (PDCCB) के डायरेक्टर के रूप में अपना सफर शुरू किया और धीरे-धीरे PDCCB के चेयरमैन बन गए. उनके नेतृत्व में बैंक का कारोबार 558 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया. वे महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक के निदेशक और कुछ समय के लिए चेयरमैन भी रहे.
पवार का प्रभाव सिर्फ बैंकिंग तक सीमित नहीं था. वे मालेगांव और बारामती शुगर फैक्ट्रियों समेत कई कोऑपरेटिव और निजी शुगर मिलों, APMC और दूध सहकारी समितियों पर भी असर रखते थे, जिससे ग्रामीण उत्पादकों को बाजार और विकास योजनाओं से जोड़ने वाला मजबूत नेटवर्क बन गया. उन्होंने बरामती अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की स्थापना की और Cooperation Minister के रूप में भी कार्य किया.
गन्ना किसानों के लिए क्रेडिट बढ़ाया
2025 में उन्होंने मालेगांव कोऑपरेटिव शुगर मिल के बोर्ड चुनाव में हिस्सा लिया और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण पद जीतकर शुगर सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत की. दशकों के दौरान उन्होंने कोऑपरेटिव बैंकिंग में आधुनिक तकनीक अपनाई, गन्ना किसानों के लिए क्रेडिट बढ़ाया और सहकारी संस्थाओं को राज्य की विकास योजनाओं से जोड़ा. उनकी अचानक मौत से राजनीति, कोऑपरेटिव सेक्टर और महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया. नेता, किसान और सहकारी उन्हें एक दूरदर्शी नेता के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने जमीनी संस्थाओं को राज्य शासन से जोड़कर एक स्थायी और मजबूत विरासत छोड़ी.
कोऑपरेटिव और शुगर इंडस्ट्री की गहरी समझ
यशवंतराव चव्हाण, वसंतदादा पाटिल और शरद पवार की तरह अजीत पवार को भी कोऑपरेटिव और शुगर इंडस्ट्री की गहरी समझ रखने वाले नेता के रूप में जाना जाता था. उनकी राजनीति काफी हद तक शुगर सेक्टर के इर्द-गिर्द रही और उन्होंने महाराष्ट्र के कोऑपरेटिव सेक्टर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई. पश्चिमी और दक्षिणी महाराष्ट्र की कई कोऑपरेटिव और निजी चीनी मिलें सीधे या परोक्ष रूप से उनके प्रभाव में काम कर रही थीं. उन्होंने हमेशा टिकाऊ कृषि विकास, नई तकनीक अपनाने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने वाली नीतियों पर जोर दिया. 1984 के बाद अजित पवार 2025 में मालेगांव कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का चुनाव जीतकर अपनी स्थिति और मजबूत की.
1991 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर
अजित पवार का चार दशक से भी लंबा राजनीतिक सफर 1991 में बारामती से विधायक बनने के साथ शुरू हुआ. कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास मंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों के हित में कई काम किए. यही वजह है कि उन्हें ग्रामीण विकास और खेती पर विशेष ध्यान देने के कारण ‘महाराष्ट्र का सिंचाई मैन’ कहा जाता था. उनके प्रयासों से राज्य में चेक डैम, बैराज और नहरों का निर्माण हुआ, जिससे लाखों हेक्टेयर जमीन को सिंचाई सुविधा मिली और किसानों को सूखे से राहत मिली. उनका खेती-किसानी से उनका गहरा जुड़ाव रहा. उन्होंने कृषि में स्थायी विकास, नई तकनीक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम पहल कीं.
अजित पवार ने किसानों के लिए कौन-सी योजनाएं शुरू कीं
अपने कार्यकाल के दौरान अजित पवार ने कृषि क्षेत्र में कई योजनाओं और पहलों पर काम किया. उदाहरण के लिए, उन्होंने कृषि क्षेत्र में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) तकनीक के उपयोग पर जोर दिया और इसे किसानों के लिए उत्पादकता बढ़ाने तथा लागत कम करने के साधन के रूप में अपनाने की पहल की. इसके अलावा, उन्होंने पंप सेटों के लिए मुफ्त बिजली की व्यवस्था, किसान क्रॉप लोन के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज जैसी नीतियों के प्रस्ताव तथा बजट में कृषि को समर्थन देने के लिए भारी प्रावधान किए थे.
कृषि विकास के लिए अजित पवार का योगदान
अजित पवार का कृषि विकास में योगदान व्यापक रहा है. उन्होंने टेक्नोलॉजी आधारित कृषि सुधार, सिंचाई परियोजनाएं, जल प्रबंधन और एक तालुका-एक मार्केट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों के लिए बाजार पहुंच और उत्पादन क्षमता में सुधार पर जोर दिया. बजट प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि शामिल की ताकि किसानों को बेहतर समर्थन, बाजार ज्यादा मजबूती और लागत नियंत्रण मिले.