Trout Farming : अब तक ट्राउट मछली का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में ठंडे पहाड़ी इलाके ही आते थे. माना जाता था कि यह मछली सिर्फ बर्फीले पानी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ही पाली जा सकती है. लेकिन अब यह धारणा बदल रही है. भारत में पहली बार गर्म और मैदानी इलाके में ठंडे पानी की ट्राउट मछली की इनलैंड फार्मिंग शुरू की गई है. यह पहल मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो दिखाती है कि आधुनिक तकनीक के सहारे अब सीमाएं टूट रही हैं.
नई तकनीक ने बदली ट्राउट फार्मिंग की सोच
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस इनलैंड ट्राउट फार्मिंग में रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम यानी RAS तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. इस तकनीक में पानी को बार-बार साफ करके फिर से इस्तेमाल किया जाता है. तापमान, ऑक्सीजन और पानी की गुणवत्ता पूरी तरह नियंत्रण में रहती है. इसी वजह से गर्म इलाकों में भी ठंडे पानी की मछली को पाला जा रहा है. इससे पानी की बचत होती है और मछलियों को बीमारियों से भी काफी हद तक बचाया जा सकता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक से सालभर उत्पादन संभव हो पाता है.
तेलंगाना में शुरू हुई देश की पहली इनलैंड यूनिट
यह देश की पहली इनलैंड ट्राउट फार्मिंग यूनिट तेलंगाना में शुरू की गई है. यह यूनिट तेलंगाना में स्थापित की गई है. आमतौर पर यह इलाका गर्म जलवायु के लिए जाना जाता है, ऐसे में यहां ठंडे पानी की मछली का उत्पादन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. यह परियोजना बताती है कि अब ट्राउट जैसी प्रीमियम मछली की खेती सिर्फ पहाड़ी राज्यों तक सीमित नहीं रहेगी.
बड़े पैमाने पर उत्पादन से बढ़ेगा बाजार
इस इनलैंड यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 1,200 टन बताई जा रही है. अभी तक ट्राउट मछली का पालन सीमित इलाकों में होने के कारण बाजार में इसकी उपलब्धता कम रहती थी. नई व्यवस्था से उत्पादन बढ़ेगा और सप्लाई बेहतर होगी. इससे भविष्य में ट्राउट मछली आम लोगों तक भी अपेक्षाकृत आसान दामों पर पहुंच सकती है. इसके साथ ही मत्स्य पालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है.
एक ही जगह पूरी व्यवस्था, आयात पर लगेगा ब्रेक
इस फार्मिंग यूनिट की खास बात यह है कि यहां पूरी व्यवस्था एक ही जगह बनाई गई है. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसमें मछली का बीज तैयार करने से लेकर पालन, प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज और पैकिंग तक की सुविधा मौजूद है. यहां से मछली सीधे बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाई जाएगी. इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उपभोक्ताओं को ज्यादा ताजा और सुरक्षित ट्राउट मछली मिल सकेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की इनलैंड फार्मिंग से ट्राउट मछली के आयात पर निर्भरता भी कम होगी और देश का घरेलू सीफूड बाजार मजबूत होगा.