मछली पालकों को सस्ती मिलेगी बिजली, एक्वाकल्चर तकनीक से जुड़े 5.21 लाख किसानों को लाभ   

Aquaculture farmers Power Subsidy Scheme: मछली पालकों को एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने पर सस्ती दर पर बिजली दी जा रही है. एक्वाकल्चर तकनीक में एरेटर मशीन और तापमान संतुलन के लिए कई मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. यह मशीनें बिजली से चलती हैं. ऐसे में मछली किसानों को एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करने के इरादे से बिजली सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 19 Feb, 2026 | 12:09 PM

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई तरह की योजनाओं के जरिए किसानों लाभ पहुंचा रही हैं. मछली पालन को आधुनिक तकनीक यानी एक्वाकल्चर के जरिए मत्स्य पालन करने वाले किसानों को सस्ती दर पर बिजली देने की घोषणा की गई है. हालांकि, पहले से भी किसानों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है. लेकिन, अब आंध्र प्रदेश सरकार ने इसका लाभ ज्यादा किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की है और मछली पालकों को जिला पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग में आवेदन करने को कहा है.

आंध्र प्रदेश सरकार राज्य के मछली पालकों को एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने पर सस्ती दर पर बिजली दे रही है. एक्वाकल्चर तकनीक में एरेटर मशीन और तापमान संतुलन के लिए कई मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. यह मशीनें बिजली से चलती हैं. ऐसे में मछली किसानों को एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करने के इरादे से किसानों को केवल 1.5 रुपये प्रति यूनिट दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है.

5.2 लाख किसानों को मिल रहा लाभ, 50 हजार को और देने की घोषणा

आंध्र प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री गोट्टीपति रवि कुमार ने घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार एक्वाकल्चर किसानों को Rs 1.5 प्रति यूनिट पर सब्सिडी वाली बिजली दे रही है. यह लाभ पाने वाले किसानों की संख्या को बढ़ाया जाएगा ताकि मछली उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सके. विधानसभा में उन्होंने कहा कि 5.2 लाख एक्वाकल्चर किसानों को सब्सिडी वाली दर पर बिजली मिल रही है और 50,000 अतिरिक्त बिजली कनेक्शन मंज़ूर किए गए हैं.

एक्वाकल्चर तकनीक के लिए 2.35 रुपये प्रति यूनिट की बिजली सब्सिडी

मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (APERC) के अनुसार एक्वाकल्चर के लिए बिजली की दर  3.85 रुपये प्रति यूनिट होनी चाहिए, लेकिन सरकार सिर्फ 1.5 रुपये प्रति यूनिट पर बिजली दे रही है और बाकी 2.35 रुपये की सब्सिडी दे रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक्वा किसानों की भलाई और लगातार विकास के लिए कमिटेड है. एक्वा किसानों के लिए एक जैसी बिजली सब्सिडी कैसे लागू करने को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार एक्वाकल्चर एक्टिविटीज के लिए बिजली सब्सिडी सपोर्ट को असरदार तरीके से लागू कर रही है. उन्होंने बताया कि एक्वाकल्चर पावर सप्लाई के लिए जोन और नॉन जोन सिस्टम को फॉलो किया जा रहा है.

फिशरीज डिपार्टमेंट में आवेदन करें किसान

एक्वाकल्चर तकनीक से मछली उत्पादन करने वाले किसानों की पहचान के लिए फिशरीज डिपार्टमेंट किसानों का डेटा भेज रहा है और एलिजिबल बेनिफिशियरीज की पहचान बड़े पैमाने पर की जा रही है.  उन्होंने कहा कि बेनिफिशियरीज की पहचान प्रोसेस में कोई गड़बड़ी नहीं है. एक्वाकल्चर तकनीक अपनाकर मछली पालन करने वाले किसानों से अपील की गई है कि वे अपने जिले के फिजरीज डिपार्टमेंट से संपर्क कर बिजली सब्सिडी का लाभ लें और आवेदन करें.

बिजली सब्सिडी पाने की पाबंदियों को हटाया

मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के तहत नोटिफाइड एक्वाकल्चर जोन पॉलिसी ने फायदे सिर्फ 10 एकड़ तक ही सीमित कर दिए थे. हमने इन पाबंदियों को बदला है और फायदों का दायरा बढ़ाने के लिए किसान हितैषी फैसले लिए हैं. YSRC के कार्यकाल की तुलना में मौजूदा सरकार ने 50,000 अतिरिक्त एक्वाकल्चर बिजली कनेक्शन मंजूर किए हैं. अभी राज्य भर में 5.21 लाख एक्वा किसान जो बिजली सब्सिडी पा रहे हैं.

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