रबी फसलों का रकबा 644 लाख हेक्टेयर पार…गेहूं की बुवाई पूरी, दलहन-तिलहन में आई तेजी

सरकार ने इस रबी सीजन के लिए कुल 171.14 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें 119 मिलियन टन गेहूं, 15.86 मिलियन टन चावल, 16.57 मिलियन टन दलहन, 3.17 मिलियन टन पोषक अनाज, 14.5 मिलियन टन मक्का और 2.05 मिलियन टन जौ शामिल हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 13 Jan, 2026 | 08:47 AM

Rabi sowing 2026: देश के किसानों के लिए नए साल की शुरुआत उम्मीद भरी रही है. रबी सीजन में इस बार खेतों में हलचल ज्यादा दिखी है और बुवाई का रकबा न सिर्फ पिछले साल से आगे निकल गया है, बल्कि लंबे समय के औसत को भी पार कर चुका है. जनवरी के दूसरे हफ्ते तक रबी फसलों की बुवाई जिस रफ्तार से आगे बढ़ी है, उसने सरकार और कृषि विशेषज्ञों दोनों को भरोसा दिया है कि इस बार उत्पादन बेहतर रह सकता है.

कुल रबी बुवाई सामान्य से ऊपर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 9 जनवरी तक देश में रबी फसलों की कुल बुवाई 644.29 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. यह रकबा पिछले साल की इसी अवधि के 626.64 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 2.8 प्रतिशत ज्यादा है. इतना ही नहीं, यह रकबा पिछले दस वर्षों के औसत 637.81 लाख हेक्टेयर से भी ऊपर निकल चुका है. बीते सप्ताह अकेले करीब 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई बुवाई हुई, जिससे कुल आंकड़ा और मजबूत हुआ.

गेहूं की बुवाई लगभग पूरी, रकबा रिकॉर्ड स्तर पर

रबी की सबसे अहम फसल गेहूं की बुवाई अब लगभग पूरी मानी जा रही है. इस बार गेहूं का कुल रकबा 334.17 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो 2 जनवरी के आंकड़े के बराबर है, यानी अब नई बुवाई नहीं हो रही. पिछले साल गेहूं का रकबा 328.04 लाख हेक्टेयर था और उसी के दम पर रिकॉर्ड 117.94 मिलियन टन उत्पादन हुआ था. इस बार रकबा उससे भी ज्यादा है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि पैदावार भी मजबूत रह सकती है.

कर्नाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के अनुसार, मौजूदा मौसम गेहूं की बढ़वार और कल्ले निकलने के लिए अनुकूल है. पहली सिंचाई दिसंबर में पूरी हो चुकी है और अब दूसरी सिंचाई के साथ यूरिया की दूसरी खुराक दी जा रही है, जिससे फसल की स्थिति बेहतर बनी हुई है.

सरकार ने तय किया 171.14 मिलियन टन का लक्ष्य

सरकार ने इस रबी सीजन के लिए कुल 171.14 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें 119 मिलियन टन गेहूं, 15.86 मिलियन टन चावल, 16.57 मिलियन टन दलहन, 3.17 मिलियन टन पोषक अनाज, 14.5 मिलियन टन मक्का और 2.05 मिलियन टन जौ शामिल हैं. इसके अलावा 15.07 मिलियन टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य है, जिसमें 13.9 मिलियन टन सरसों शामिल है.

दलहन और चना-मसूर में बढ़ा रकबा

दलहनों की बुवाई में भी इस बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कुल दलहन रकबा 136.36 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 132.61 लाख हेक्टेयर से करीब 2.8 प्रतिशत ज्यादा है. चने का रकबा बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 91.22 लाख हेक्टेयर था. यानी इसमें 5.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. मसूर का रकबा भी 18.12 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल 17.66 लाख हेक्टेयर था. दिसंबर के आखिरी हफ्ते के बाद चने की बुवाई में कोई बदलाव नहीं हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि इसकी बुवाई पूरी हो चुकी है.

तिलहन, सरसों और रबी धान की स्थिति

तिलहनों का कुल रकबा 96.86 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 93.33 लाख हेक्टेयर से 3.8 प्रतिशत ज्यादा है. इसमें अकेले सरसों का रकबा 89.36 लाख हेक्टेयर रहा, जो एक साल पहले 86.57 लाख हेक्टेयर था.

रबी धान की बुवाई में भी इस बार अच्छी बढ़त देखने को मिली है. रकबा बढ़कर 21.71 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 19.49 लाख हेक्टेयर था, यानी करीब 11.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी.

मक्का और जौ में जोरदार बढ़त

मक्का की बुवाई इस बार 25.24 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के 23.49 लाख हेक्टेयर से 7.4 प्रतिशत ज्यादा है. जौ की बुवाई पूरी हो चुकी है और इसका रकबा 7.36 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल 6.08 लाख हेक्टेयर था. यह सामान्य रकबे 5.63 लाख हेक्टेयर से भी करीब 21 प्रतिशत ज्यादा है.

ज्वार में थोड़ी गिरावट, लेकिन मोटे अनाज मजबूत

रबी ज्वार की बुवाई में इस बार थोड़ी कमी देखने को मिली है. रकबा 21.36 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 22.66 लाख हेक्टेयर था, यानी करीब 5.7 प्रतिशत की गिरावट. हालांकि इसके बावजूद कुल पोषक और मोटे अनाजों का रकबा बढ़कर 55.20 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 53.17 लाख हेक्टेयर था.

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