चीनी उद्योग ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाने की मांग की, केंद्रीय मंत्री से की बातचीत
चीनी उद्योग ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाने की मांग की है. ISMA ने खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की. उद्योग का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने से कच्चे तेल के आयात में कमी, किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
चीनी उद्योग ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाने की मांग उठाई है. उद्योग का कहना है कि अनाज आधारित डिस्टिलरी के मुकाबले चीनी मिलों ने अपने तय लक्ष्य के अनुसार ज्यादा एथेनॉल की आपूर्ति की है. इसी वजह से उन्होंने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी से एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने पर विचार करने का आग्रह किया है. बताया जा रहा है कि सरकार भी इस मुद्दे पर विचार कर रही है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन की क्षमता अधिक है और मांग कम होने के कारण कई प्लांट खाली पड़े हैं. हालांकि मंत्री ने कहा है कि एलपीजी और कच्चे तेल की मौजूदा स्थिति सामान्य होने के बाद इस विषय पर आगे फैसला लिया जाएगा.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर और महानिदेशक दीपक बल्लानी ने 11 मार्च को खाद्य मंत्री से मुलाकात की और चीनी व बायो-एनर्जी क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा की. दीपक बल्लानी ने कहा कि भारत कच्चे तेल और एलपीजी के आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए वैश्विक तनाव या भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ता है. ऐसे में गन्ने से बनने वाले एथेनॉल जैसे बायोफ्यूल को सिर्फ कृषि या पर्यावरण की पहल नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा का अहम आधार माना जाना चाहिए.
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से किसानों को फायदा
उन्होंने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से पहले ही कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने और लाखों किसानों को स्थिर आय देने में मदद मिली है. अगर सरकार एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाने के लिए स्पष्ट नीति बनाती है, तो इससे वैश्विक ईंधन कीमतों के झटकों से देश को बचाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी आएगी. बैठक में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बदलते भू-राजनीतिक हालात के असर, भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग को तेज करने, इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और E20 से आगे की रणनीति पर भी चर्चा की गई.
कंपनियों को करीब 119 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति
मौजूदा एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) के नवंबर से फरवरी के बीच चीनी उद्योग ने तेल विपणन कंपनियों को करीब 119 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की है, जो उसके कुल 292 करोड़ लीटर के लक्ष्य का लगभग 41 प्रतिशत है. इसमें से 94 करोड़ लीटर एथेनॉल गन्ने के रस से, 21 करोड़ लीटर बी-हैवी मोलासेस से और 4 करोड़ लीटर सी-हैवी मोलासेस से तैयार किया गया है. वहीं अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादकों ने करीब 209 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की है, जो उनके 766 करोड़ लीटर के लक्ष्य का लगभग 27 प्रतिशत है. इसमें 123 करोड़ लीटर मक्का से, 69 करोड़ लीटर भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा उपलब्ध कराए गए चावल से और 17 करोड़ लीटर 100 प्रतिशत टूटे हुए चावल से तैयार किया गया है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है
भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ का कहना है कि भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम तेजी से एक महत्वपूर्ण पहल बन रहा है. इससे आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो रही है, साथ ही चीनी उद्योग, बायो-एनर्जी और कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है. भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ ने कहा है कि भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ाने और मजबूत बायोएनर्जी सिस्टम विकसित करने से आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सकती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है.
संस्था के अनुसार, देश में एथेनॉल की आपूर्ति 2014 में 38 करोड़ लीटर से बढ़कर अब 660 करोड़ लीटर से ज्यादा हो गई है. इससे किसानों को करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है और कच्चे तेल के आयात में कमी आने से लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत भी हुई है.