बारिश से कश्मीर के 100 करोड़ के नर्सरी कारोबार को मिली नई रफ्तार, 30 प्रतिशत गिरावट के बाद बढ़ी मांग

हाल ही में हुई बारिश ने मिट्टी में फिर से नमी ला दी है, जिससे किसानों ने दोबारा पौधारोपण शुरू कर दिया है. खासकर सेब के बाग लगाने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद अहम होता है. बारिश के बाद खेतों की स्थिति सुधरने से नर्सरी से पौधों की मांग अचानक बढ़ गई है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 24 Mar, 2026 | 11:35 AM

Rainfall impact: कश्मीर घाटी में मौसम के बदले मिजाज ने एक बार फिर किसानों और बागवानों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है. फरवरी और मार्च की शुरुआत में पड़े लंबे सूखे ने जहां खेती और बागवानी को गहरा झटका दिया था, वहीं अब हालिया बारिश ने हालात को संभाल लिया है. लगभग 100 करोड़ रुपये के नर्सरी सेक्टर में आई गिरावट अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है और बाजार में फिर से रौनक दिखने लगी है.

सूखे ने रोका था खेती का काम

ग्रेटर कश्मीर की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी और मार्च की शुरुआत में बारिश की भारी कमी ने पूरे कश्मीर में पौधारोपण का काम लगभग बंद कर दिया था. उस समय मिट्टी में नमी बिल्कुल नहीं थी और तापमान सामान्य से काफी ज्यादा था.

मौसम विभाग के मुताबिक, इस दौरान तापमान 3 से 11 डिग्री सेल्सियस तक सामान्य से अधिक रहा. वहीं श्रीनगर में फरवरी के महीने में केवल 5.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 1960 के बाद सबसे कम मानी गई.

इस सूखे के कारण खेतों की मिट्टी सख्त हो गई थी और पौधों को लगाने की स्थिति ही नहीं बची थी. शोपियां के किसानों के अनुसार, बिना नमी के पौधे जिंदा नहीं रह सकते, इसलिए किसानों ने पौधारोपण रोक दिया था.

नर्सरी कारोबार पर पड़ा भारी असर

कश्मीर का नर्सरी सेक्टर हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है. लेकिन इस बार सूखे ने इस कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया. वहीं कुलगाम के काइमोह इलाके में स्थित ‘इंसाफ नर्सरी’ के मालिक जाहिद भट ने बताया कि फरवरी में बिक्री में 25 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आई थी. किसान पौधे खरीदने से बच रहे थे, क्योंकि उन्हें डर था कि सूखी जमीन में पौधे टिक नहीं पाएंगे.

काइमोह को कश्मीर का सबसे बड़ा नर्सरी हब माना जाता है, जहां 400 से ज्यादा नर्सरी काम कर रही हैं. यहां से सेब समेत कई फलों के पौधे पूरे घाटी में भेजे जाते हैं.

बारिश ने बदली तस्वीर, फिर शुरू हुआ पौधारोपण

हाल ही में हुई बारिश ने मिट्टी में फिर से नमी ला दी है, जिससे किसानों ने दोबारा पौधारोपण शुरू कर दिया है. खासकर सेब के बाग लगाने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद अहम होता है. बारिश के बाद खेतों की स्थिति सुधरने से नर्सरी से पौधों की मांग अचानक बढ़ गई है. कारोबारी अब पहले की तुलना में ज्यादा ऑर्डर मिलने की बात कह रहे हैं और बाजार में फिर से हलचल देखने को मिल रही है.

किसानों और व्यापारियों में बढ़ा भरोसा

इस बदलाव ने किसानों और नर्सरी मालिकों दोनों का भरोसा बढ़ाया है. जाहिद भट बताते हैं कि अब मांग तेजी से बढ़ रही है और कारोबार में स्पष्ट सुधार नजर आ रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे पौधों की जड़ मजबूत होती है और आगे चलकर अच्छी पैदावार मिलती है. अगर शुरुआत में ही पौधे सही तरीके से लग जाएं, तो आने वाले वर्षों में उत्पादन बेहतर रहता है.

सही समय पर बारिश से बचा सीजन

अगर बारिश और देर से होती, तो इस साल का पूरा पौधारोपण सीजन खतरे में पड़ सकता था. लेकिन समय पर हुई बारिश ने नुकसान को काफी हद तक रोक लिया है. अब किसान उम्मीद कर रहे हैं कि वे शुरुआती नुकसान की भरपाई कर पाएंगे और आने वाले समय में बेहतर उत्पादन हासिल करेंगे. घाटी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बागवानी का बड़ा योगदान है, ऐसे में इस सेक्टर का संभलना बेहद जरूरी था.

मौसम अब अनुकूल हो गया है और किसानों के लिए हालात बेहतर होते दिख रहे हैं. नर्सरी मालिकों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मांग और बढ़ेगी और कारोबार पूरी तरह से पटरी पर लौट आएगा.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

ज्ञान का सम्मान क्विज

किस फसल को सफेद सोना कहा जाता है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
गेहूं को फसलों का राजा कहा जाता है.
विजेताओं के नाम
नसीम अंसारी, देवघर, झारखंड.
रमेश साहू, रायपुर, छत्तीसगढ़

लेटेस्ट न्यूज़