100 करोड़ की नर्सरी इंडस्ट्री पर मौसम की मार, कश्मीर के किसान कर रहे बारिश का इंतजार

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब की खेती का बहुत बड़ा योगदान है. घाटी के हजारों किसान सेब के बागों पर निर्भर हैं. हर साल किसान नए पौधे लगाकर अपने बागों को बढ़ाते हैं या पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे लगाते हैं. लेकिन इस बार सूखी मिट्टी और बढ़ते तापमान के कारण किसान नई पौध लगाने से हिचक रहे हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 6 Mar, 2026 | 07:30 AM

kashmir nursery industry crisis: कश्मीर घाटी में इस बार मौसम के असामान्य बदलाव ने बागवानी से जुड़े कारोबार को बड़ा झटका दिया है. सामान्य से ज्यादा तापमान और बारिश की भारी कमी के कारण यहां की पौध नर्सरियों का काम प्रभावित हो गया है. बताया जा रहा है कि घाटी में लगभग 100 करोड़ की नर्सरी इंडस्ट्री इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है.

बिजनेसलाइन की खबर के अनुसार, कश्मीर में सेब, अखरोट और अन्य फलदार पौधों की नर्सरी बड़े पैमाने पर लगाई जाती है. हर साल फरवरी और मार्च के बीच किसान नए पौधे लगाकर अपने बागों का विस्तार करते हैं. लेकिन इस बार मौसम की अनिश्चितता के कारण किसान नए पौधे लगाने से बच रहे हैं, जिससे नर्सरी मालिकों की बिक्री में भारी गिरावट आई है.

सामान्य से 11 डिग्री ज्यादा दर्ज हुआ तापमान

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार घाटी में फरवरी के मध्य से दिन का तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो इस समय के सामान्य तापमान से लगभग 11 डिग्री अधिक है. इतना ही नहीं, इस साल बारिश भी बहुत कम हुई है. मौसम विभाग के अनुसार फरवरी महीने में श्रीनगर में सिर्फ 5.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो वर्ष 1960 के बाद फरवरी महीने का सबसे कम वर्षा रिकॉर्ड माना जा रहा है. मौसम में आए इस बदलाव ने खेती और बागवानी से जुड़े कामों का पूरा चक्र बिगाड़ दिया है.

सेब की खेती पर सबसे ज्यादा असर

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब की खेती का बहुत बड़ा योगदान है. घाटी के हजारों किसान सेब के बागों पर निर्भर हैं. हर साल किसान नए पौधे लगाकर अपने बागों को बढ़ाते हैं या पुराने पेड़ों की जगह नए पौधे लगाते हैं. लेकिन इस बार सूखी मिट्टी और बढ़ते तापमान के कारण किसान नई पौध लगाने से हिचक रहे हैं. इससे नर्सरी कारोबार पर सीधा असर पड़ा है.

नर्सरी मालिकों की बिक्री में आई गिरावट

कुलगाम जिले के काइमोह (Qaimoh) ब्लॉक में स्थित इंसाफ नर्सरी (Insaaf Nurseries) के मालिक जाहिद भट ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस साल बिक्री में काफी गिरावट आई है. उन्होंने कहा कि किसान सूखी मिट्टी और असामान्य गर्मी के कारण पौधे खरीदने से बच रहे हैं. इसके चलते उनकी बिक्री में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आई है. जाहिद भट के अनुसार, आमतौर पर मार्च के पहले सप्ताह तक उनकी अधिकांश पौध बिक जाती है, लेकिन इस साल स्थिति बिल्कुल अलग है.

काइमोह बना हुआ है नर्सरी का बड़ा केंद्र

कश्मीर घाटी में काइमोह क्षेत्र को नर्सरी खेती का बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां 400 से ज्यादा नर्सरियां हैं जो घाटी के अलग-अलग इलाकों में पौधे सप्लाई करती हैं. यहां की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए नर्सरी खेती पर निर्भर है. खासतौर पर सेब के पौधों की मांग सबसे ज्यादा रहती है. लेकिन इस बार मौसम की मार ने इस पूरे क्षेत्र के कारोबार को प्रभावित कर दिया है.

कई नर्सरी में पौधे अब भी पड़े हैं बिना बिके

काइमोह क्षेत्र के एक अन्य नर्सरी मालिक ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इतनी तेजी से तापमान बढ़ते हुए बहुत कम देखा है. उनके मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में मार्च के पहले सप्ताह तक लगभग पूरा स्टॉक बिक जाता है, लेकिन इस बार करीब 40 प्रतिशत पौधे अभी भी बिना बिके पड़े हैं.

किसानों को मिट्टी में नमी की कमी की चिंता

किसानों का कहना है कि सूखी मिट्टी में पौधे लगाने से उनका जीवित रहना मुश्किल हो सकता है. शोपियां (Shopian) के सेब उत्पादक ने बताया कि खेतों में नमी बहुत कम है. अगर इस समय पौधे लगाए भी जाएं तो ज्यादा गर्मी के कारण उनके बचने की संभावना कम रहती है. इसी वजह से कई किसान फिलहाल बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

बागवानी विशेषज्ञ भी जता रहे चिंता

कश्मीर के मध्य और उत्तर क्षेत्र के कई बागवानी विशेषज्ञों ने भी इस मौसम को चिंताजनक बताया है. उनका कहना है कि बदलते मौसम के कारण इस साल पौधारोपण का पूरा सीजन प्रभावित हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो नर्सरी कारोबार के साथ-साथ सेब की खेती पर भी इसका असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है.

मौसम पर टिकी किसानों की उम्मीद

फिलहाल कश्मीर के किसान और नर्सरी मालिक दोनों आने वाली बारिश का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर जल्द बारिश हो जाती है तो पौधारोपण का काम फिर से शुरू हो सकता है और नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है. लेकिन अगर मौसम इसी तरह असामान्य बना रहा तो घाटी की 100 करोड़ की नर्सरी इंडस्ट्री को इस साल बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.

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Published: 6 Mar, 2026 | 07:30 AM

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