जमीन की कमी नहीं बनेगी रुकावट, अपनाएं ये आसान तरीका और बालकनी में उगाएं फलदार चीकू का पौधा

चीकू आमतौर पर बड़े पेड़ के रूप में जाना जाता है, लेकिन नई तकनीकों और ग्राफ्टेड पौधों की मदद से इसे सीमित जगह में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है. गमले में उगाया गया चीकू न केवल घर की हरियाली बढ़ाता है, बल्कि ताजा और शुद्ध फल भी देता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 26 Feb, 2026 | 08:23 AM

Chikoo cultivation: शहरों में तेजी से बढ़ती टेरेस गार्डनिंग ने लोगों की सोच बदल दी है. पहले जहां लोग केवल धनिया, मिर्च या टमाटर जैसी सब्जियां गमलों में उगाते थे, वहीं अब फलदार पौधों की ओर भी रुझान बढ़ रहा है. इसी कड़ी में चीकू की एक खास किस्म ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसे अब बिना खेत और बिना बगीचे के भी घर की छत या बालकनी में उगाया जा सकता है. सही तरीका अपनाया जाए तो यह पौधा कम ऊंचाई में ही फल देना शुरू कर देता है और स्वाद में भी बेहद मीठा होता है.

चीकू आमतौर पर बड़े पेड़ के रूप में जाना जाता है, लेकिन नई तकनीकों और ग्राफ्टेड पौधों की मदद से इसे सीमित जगह में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है. गमले में उगाया गया चीकू न केवल घर की हरियाली बढ़ाता है, बल्कि ताजा और शुद्ध फल भी देता है.

सही गमले का चुनाव सबसे जरूरी

अगर आप गमले में चीकू उगाना चाहते हैं तो सबसे पहले बड़े आकार का गमला चुनना जरूरी है. कम से कम 22 से 24 इंच चौड़ा और गहरा गमला उपयुक्त माना जाता है. गमले में नीचे पानी निकलने के लिए छेद होना चाहिए, ताकि जड़ों में पानी जमा न हो. पानी का ठहराव जड़ों को सड़ा सकता है और पौधे की बढ़वार रोक सकता है. गमले का आकार जितना बड़ा होगा, जड़ों को उतनी ही जगह मिलेगी और पौधा स्वस्थ रहेगा. शुरुआत में छोटा पौधा लगाने के बाद जरूरत पड़े तो बड़े गमले में शिफ्ट भी किया जा सकता है.

मिट्टी का सही मिश्रण बनाएं

गमले में चीकू लगाने के लिए साधारण बगीचे की मिट्टी पर्याप्त नहीं होती. मिट्टी को भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर बनाना जरूरी है. इसके लिए 50 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 से 40 प्रतिशत अच्छी तरह सड़ी गोबर खाद या वर्मी कम्पोस्ट और थोड़ी मात्रा में रेत या कोकोपीट मिलाना बेहतर रहता है. यह मिश्रण जड़ों को हवा और पोषण दोनों देता है.

मिट्टी तैयार करते समय उसमें थोड़ी नीम खली भी मिला दी जाए तो यह फफूंद और कीटों से बचाव में मदद करती है. हर दो से तीन महीने में जैविक खाद मिलाने से पौधे की सेहत बनी रहती है.

धूप और स्थान का ध्यान रखें

चीकू का पौधा धूप पसंद करता है. इसे रोज कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए. इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी आती हो. छाया में रखने से पौधे की बढ़वार धीमी हो सकती है और फल कम लगते हैं. बालकनी या छत पर ऐसी जगह चुनें जहां तेज हवा से पौधा गिर न सके. जरूरत हो तो सहारा देने के लिए लकड़ी की डंडी लगाई जा सकती है.

पानी देने का सही तरीका

गमले में लगे पौधों को जरूरत से ज्यादा पानी देना नुकसानदायक होता है. चीकू के पौधे में तभी पानी दें जब मिट्टी की ऊपरी परत लगभग एक इंच तक सूख जाए. लगातार गीली मिट्टी जड़ों को कमजोर बना सकती है. गर्मियों में पानी की मात्रा थोड़ी बढ़ाई जा सकती है, जबकि सर्दियों में कम पानी पर्याप्त रहता है. पानी देते समय ध्यान रखें कि गमले से अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल जाए. जलभराव से पौधा बीमार पड़ सकता है.

कम ऊंचाई में भी फल देने की क्षमता

गमले में लगाए गए ग्राफ्टेड चीकू के पौधे की खासियत यह है कि यह कम ऊंचाई में ही फल देना शुरू कर सकता है. उचित देखभाल के साथ पौधा डेढ़ से दो साल में फल देने लगता है. शुरुआत में कम संख्या में फल आते हैं, लेकिन समय के साथ उत्पादन बढ़ता जाता है. फल आकार में लंबे और स्वाद में मीठे होते हैं. घर पर उगाए गए फल रसायन मुक्त होते हैं, जिससे परिवार को सुरक्षित और ताजा फल मिलते हैं.

नियमित देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन

समय-समय पर सूखी या बीमार टहनियों को काट देना चाहिए. इससे नई शाखाएं निकलती हैं और पौधा मजबूत बनता है. कीटों से बचाव के लिए नीम तेल का हल्का छिड़काव किया जा सकता है. रासायनिक दवाओं के बजाय जैविक उपाय अपनाना बेहतर रहता है. हर तीन से चार महीने में जैविक खाद देने से पौधे की वृद्धि अच्छी रहती है और फल मीठे बनते हैं.

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