कहीं आप भी तो नहीं खा रहे जानलेवा केमिकल से पके फल? एक्सपर्ट ने बताया पहचानने का तरीका
Chemically Ripened Fruits: आजकल बाजार में आम, केला और पपीता जैसे फलों को जल्दी पकाने के लिए कुछ जगहों पर कैल्शियम कार्बाइड जैसे हानिकारक केमिकल का अवैध इस्तेमाल किया जाता है, जो हेल्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं. फल नेचुरल रूप से एथिलीन गैस के जरिए पकते हैं, जो सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रक्रिया है. जबकि कार्बाइड से पके फल बाहर से तो पीले दिखते हैं, लेकिन अंदर से कच्चे और हानिकारक हो सकते हैं.
Calcium Carbide Treated Fruits: आम, केला और पपीता जैसे फल हर भारतीय घर का एक अहम हिस्सा हैं. ये स्वाद के साथ-साथ पोषण का भी बड़ा सोर्स माने जाते हैं. लेकिन आजकल बाजार में इन्हें जल्दी पकाने के लिए कई जगहों पर अवैध केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह समझना जरूरी हो गया है कि फल नेचुरल तरीके से पके हैं या रसायनों की मदद से.
बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, लोग रंग, गंध और बनावट देखकर ही फल खरीदें और भरोसेमंद जगह से ही खरीदारी करें. सुरक्षित तरीके से पके फल ही बेहतर पोषण और सेहत प्रदान करते हैं.
फलों के पकने की प्राकृतिक प्रक्रिया क्या है?
फल अपने आप प्राकृतिक तरीके से पकते हैं. इस प्रक्रिया में एक खास गैस बनती है, जिसे एथिलीन गैस कहते हैं. यह गैस फल के अंदर ही बनती है और धीरे-धीरे उसे पकाने का काम करती है. इसी वजह से फल का स्वाद मीठा हो जाता है, उसका रंग बदलने लगता है और वह नरम हो जाता है.
- स्टार्च का शुगर में बदलना, जिससे फल मीठा हो जाता है
- रंग का हरे से पीले या नारंगी में बदलना
- फल का नरम होना
- स्वाद और सुगंध का विकसित होना
आम, केला और पपीता जैसे फल “क्लाइमेक्टेरिक फल” होते हैं, यानी ये तोड़ने के बाद भी पकते रहते हैं.
कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल
कुछ व्यापारी फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग करते हैं. यह पानी के संपर्क में आकर एसीटिलीन गैस छोड़ता है, जिससे फल जल्दी पीले दिखाई देने लगते हैं.
इसके नुकसान:
- फल बाहर से पका दिखता है लेकिन अंदर कच्चा रह सकता है
- स्वाद और खुशबू कमजोर हो जाती है
- सिरदर्द, उल्टी और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं
- त्वचा और आंखों में जलन हो सकती है
- लंबे समय में शरीर पर विषैला असर पड़ सकता है
यह तरीका पूरी तरह बैन है, फिर भी कई जगहों पर इसका अवैध इस्तेमाल देखने को मिलता है.
एथिलीन गैस से प्राकृतिक पकाव
वैज्ञानिक रूप से सबसे सुरक्षित तरीका नियंत्रित एथिलीन गैस का उपयोग है. इसे आधुनिक रिपनिंग चैंबर में किया जाता है. इसके फायदे यह हैं कि फल समान रूप से पकते हैं, जिससे उनका रूप और बनावट प्राकृतिक रहती है. साथ ही इनका स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है, क्योंकि इनमें किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता. सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे फल खाने से स्वास्थ्य पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता और ये पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.
कैसे पहचानें असली और नकली पके फल?
- रंग देखकर: प्राकृतिक फल हल्के और एक जैसे रंग के होते हैं, जबकि केमिकल वाले फल बहुत ज्यादा चमकीले या गहरे पीले दिखते हैं.
- गंध से: प्राकृतिक फलों में ताजी और हल्की मीठी खुशबू होती है, जबकि केमिकल से पके फलों में महक कम या अजीब सी होती है.
- छूकर देखें: प्राकृतिक फल पूरे फल में एक जैसे नरम होते हैं, जबकि नकली या पके हुए फल बाहर से नरम लेकिन अंदर से सख्त हो सकते हैं.
खरीदारी के समय सावधानियां
फल हमेशा किसी भरोसेमंद दुकानदार या सीधे किसान बाजार से ही खरीदें, ताकि उनकी क्वालिटी पर भरोसा रहे. बहुत ज्यादा चमकदार या असामान्य गहरे पीले रंग वाले फलों से बचें, क्योंकि इनमें केमिकल होने का शक हो सकता है. कोशिश करें कि मौसम के हिसाब से ही फल खरीदें, क्योंकि ऐसे फल ज्यादा प्राकृतिक और सेहत के लिए अच्छे होते हैं. कटे-फटे, दबे हुए या खराब दिखने वाले फलों को बिल्कुल न लें, क्योंकि ये सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
घर पर ध्यान रखने योग्य बातें
फलों को खाने से पहले हमेशा साफ पानी से अच्छे से धो लेना चाहिए, ताकि उन पर लगी धूल या केमिकल निकल जाए. अगर संभव हो तो फलों का छिलका उतारकर ही खाएं, इससे ज्यादा सुरक्षा मिलती है. छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सिर्फ अच्छे और सुरक्षित फल ही देने चाहिए, क्योंकि उनकी सेहत ज्यादा नाजुक होती है. जो फल बहुत जल्दी या ज्यादा पके हुए लगें, उन्हें तुरंत खाने से बचें, क्योंकि वे पूरी तरह प्राकृतिक नहीं हो सकते.
सही तरीके से पके फल न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं. वहीं, रसायनों से पकाए गए फल शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं.