आम के लिए रामबाण रही बैगिंग विधि अचानक क्यों बनी मुसीबत, हिमसागर मैंगो का निर्यात रुका
Mango Export: बागवानी विभाग के अधिकारियों ने किसानों के बीच लगभग 2.5 लाख फ्रूट बैग बांटे थे और वे एक्सपोर्ट के लायक खेती के तरीकों को अपनाने वाले 50-60 बागों की निगरानी कर रहे थे. लेकिन, आम में संक्रामक बीमारी लगने से फल की क्वालिटी बुरी तरह प्रभावित हुई है.
आम की क्वालिटी को बेहतर करने के लिए रामबाण मानी गई बैगिंग विधि (Fruit Bagging Method) अचानक पश्चिम बंगाल के हिमसागर किस्म आम के लिए मुसीबत बन गई है. बैगिंग की वजह से आम की क्वालिटी, कलर बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे इसके एक्सपोर्ट को झटका लगा है. दुनियाभर के देशों में हिमसागर आम की खूब डिमांड रहती है और इस बार भी है, लेकिन आम खराब होने से निर्यात थम गया है. एक्सपर्ट का कहना है कि बैगिंग विधि के बाद मौसम में अचानक बदलाव से लगभग 15 फीसदी आम के फलों में फफूंदी बीमारी और काले धब्बे देखे जा रहा है.
क्या है आम की बैगिंग विधि
आम के फलों को कीड़ों, तेज धूप, बारिश और पक्षियों से बचाने के लिए उन पर विशेष कागज या कपड़े के फ्रूट बैगिंग यानी फ्रूट कवरिंग की जाती है और इसे ही बैगिंग विधि कहते हैं. इससे आम बिना दाग-धब्बों के साफ-सुथरे, बड़े और अधिक मीठे निकलते हैं, जिससे बाजार में उनका दाम कई गुना तक बढ़ जाता है. लेकिन, पश्चिम बंगाल के हिमसागर आम में बदलाव के चलते बैगिंग फंफूंद रोग और काले धब्बे पड़ गए हैं.
क्यों और कैसे खराब हुआ हिमसागर आम
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार एक्सपोर्टर्स का कहना है कि मौसम की वजह से होने वाली बीमारी के कारण आमों पर काले धब्बे पड़ गए हैं, जिससे बंगाल के मशहूर हिमसागर आमों का विदेशों में एक्सपोर्ट अनिश्चित हो गया है. आमों की सतह पर धब्बे तब पड़ते हैं जब उन्हें बैग में ढकने (बैगिंग) के दौरान लगातार बारिश होती है और उसके बाद तापमान बढ़ जाता है. ये धब्बे संक्रमण के शुरुआती संकेत होते हैं. बैगिंग में हर फल को पेड़ पर लगे रहने के दौरान ही सुरक्षात्मक बैग से ढका जाता है. इस तकनीक का इस्तेमाल आमों की दिखावट को बेहतर बनाने और कीड़ों व बीमारियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है.
रिजेक्ट होने के डर से अमेरिका नहीं भेजा
पश्चिम बंगाल के मालदा के एक बड़े फल एक्सपोर्टर ने कहा कि बैगिंग किए गए हिमसागर आमों पर काले धब्बों की समस्या को दूर करने की कोशिशें नाकाम रही हैं, जिससे कई फल एक्सपोर्ट या ऑर्गनाइज्ड रिटेल चेन के जरिए बिक्री के लायक नहीं रहे. सृष्टि फूड प्रोडक्ट्स के को-फाउंडर प्रसून चितलांगिया ने PTI को बताया कि हमें इस हफ्ते अमेरिका में आमों की पहली खेप भेजनी थी. हमें फलों पर काले धब्बों का डर था, और वही हुआ. अगर हम खेप एक्सपोर्ट करते, तो इम्पोर्टर उसे रिजेक्ट कर देता क्योंकि फलों पर धब्बे नहीं होने चाहिए, जो बीमारी का शुरुआती संकेत हैं.
उन्होंने इस समस्या के लिए फसल के मौसम के दौरान खराब मौसम की स्थितियों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि बैगिंग के समय लगातार बारिश और उसके बाद ज्यादा तापमान के कारण यह समस्या हुई. स्थिति खराब है, हमारे पास एक्सपोर्ट के बहुत सारे ऑर्डर हैं. एक्सपोर्टर ने पहले मालदा से इस सीजन की पहली विदेशी खेप के तौर पर अमेरिका में हिमसागर आमों की एक टन की खेप भेजने की योजना बनाई थी.
15 फीसदी आम खराब, लेकिन विदेशी मांग तेज
मालदा मैंगो मर्चेंट्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट उज्ज्वल साहा ने पीटीआई से कहा कि बैग में पैक किए गए लगभग 15 प्रतिशत फलों में बीमारी की खबरें आई हैं. लेकिन अभी भी लगभग तीन लाख बैग वाले आम उपलब्ध हैं और उन्हें एक्सपोर्ट किया जा सकता है. हिमसागर आमों के लिए ऑर्डर लगातार अच्छे बने हुए हैं. एक्सपोर्टर्स ने पहले अनुमान लगाया था कि इस सीजन में जिले से आम का एक्सपोर्ट 300-500 मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले साल पांच देशों में लगभग 15 मीट्रिक टन आम एक्सपोर्ट किए गए थे.
बीमारी की वजह से आई रुकावट के बावजूद एक्सपोर्टर्स का कहना है कि प्रीमियम मालदा आमों की विदेशी मांग जबरदस्त बनी हुई है, और बिना बीमारी वाले बागों से एक्सपोर्ट के लायक फलों की पहचान करने की कोशिशें जारी हैं.
राज्य बागवानी विभाग ने 2.5 लाख फ्रूट बैग बांटे थे
राज्य का बागवानी विभाग और एक्सपोर्टर्स फलों की क्वालिटी सुधारने और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स को पूरा करने के लिए फ्रूट बैगिंग, अच्छी खेती के तरीकों (GAP), वैज्ञानिक तरीके से तोड़ने और तोड़ने के बाद फलों को संभालने के तरीकों के जरिए एक्सपोर्ट ओरिएंटेड खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. अधिकारियों ने किसानों के बीच लगभग 2.5 लाख फ्रूट बैग बांटे थे और वे एक्सपोर्ट के लायक खेती के तरीकों को अपनाने वाले 50-60 बागों की निगरानी कर रहे थे. इस सीजन में एक्सपोर्ट बास्केट में हिमसागर, लंगड़ा, लक्ष्मण भोग और आम्रपाली जैसी प्रीमियम आम की किस्में, साथ ही मालदा और पड़ोसी मुर्शिदाबाद जिले की लीची शामिल होने की उम्मीद थी.