चावल-दूध की डिश और फूल बेचकर कमाए पैसों से 11वीं की छात्रा का इलाज कराने की मुहिम, 30 लाख रुपये जुटा रहे युवा

Onam festival Flowers Money Use for Girl Treatment: ओणम त्यौहार पर फूलों की बिक्री और पारंपरिक चावल-दूध की डिश बेचकर 30 लाख रुपये जुटाने की कोशिश में कन्नूर के युवाओं ने मुहिम छेड़ी है. यह रकम 11वीं कक्षा की स्थानीय लड़की के गुर्दा के प्रत्यारोपण पर खर्च होनी है.

नोएडा | Updated On: 24 Aug, 2026 | 12:52 PM

केरलम के कन्नूर में चाला इलाके के युवाओं और स्थानीय लोगों ने ओणम के दौरान फूलों की बिक्री को 11वीं कक्षा की एक छात्रा के गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए धन जुटाने के अभियान में बदल दिया है. 10 दिनों तक चलने वाले ओणम फेस्टिवल में फूलों की खूब बिक्री होती है. छात्रा के इलाज के लिए 30 लाख रुपये जुटाने की मुहिम शुरू की गई है. इसके अलावा पारंपरिक चावल पायसम और दूध से बनने वाली खीर भी लोगों को बेचकर पैसा जुटाने की कोशिशों में युवा जुटे हैं. कुछ लोगों ने गुर्दा दान करने की भी पहल की है.

कन्नूर जिले के चाला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 11वीं कक्षा की छात्रा श्रीदेवीना गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसे सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है. उसके इलाज से परिवार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है तथा गुर्दा प्रतिरोपण एवं उसके बाद की देखभाल के लिए करीब 30 लाख रुपये की जरूरत है. स्थानीय युवाओं के एक समूह ‘चाला चांग्स’ ने धन जुटाने के लिए स्थानीय लोगों और व्यापारियों के साथ मिलकर अभियान शुरू किया है.

ढाई लाख फूलों की बिक्री का पैसा इलाज में देने की पहल

10 दिनों तक चलने वाले ओणम फेस्टिवल के दौरान फूलों की बिक्री इस अभियान का प्रमुख हिस्सा है. चाला इलाके में अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई दुकानों पर बिक्री के लिए कर्नाटक और अन्य स्थानों से करीब ढाई लाख रुपये के फूल मंगाए गए हैं. इस रकम को छात्रा के इलाज के लिए इकट्ठा करने की कोशिशें की जा रही हैं. ‘चाला चांग्स’ ग्रुप के सदस्य बशीर ने मीडिया को बताया कि हम पहले नियमित कारोबार करते थे, लेकिन इस बार हमने इस बच्ची की खातिर मुनाफे के बारे में नहीं सोचा है. उन्होंने कहा कि केवल मुनाफा नहीं बल्कि फूलों की बिक्री से मिलने वाली पूरी राशि श्रीदेवीना के इलाज पर खर्च की जाएगी.

इलाज की रकम जुटाने के लिए समिति गठित

स्थानीय लोगों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए धन जुटाने के मकसद से एक स्थानीय समिति गठित किए जाने के बाद यह पहल शुरू की गई. वहीं, कुछ लोग गुर्दा दान करने की इच्छा भी जता चुके हैं. एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि यहां जाति, धर्म या राजनीति की कोई बात नहीं है. सभी लोग इस बच्ची की जान बचाने के एक ही उद्देश्य से साथ आए हैं. समूह के सदस्यों के अनुसार चाला और कन्नूर के अन्य हिस्सों में फूलों की और दुकानें लगाई जा रही हैं तथा युवा एवं स्थानीय लोग बारी-बारी से इन्हें संभाल रहे हैं.

पायसम चावल की खीर बेचकर पैसा जुटाने की कोशिश भी

समूह के एक सदस्य ने कहा कि हम छात्रा के इलाज के लिए धन जुटाने के मकसद से पारंपरिक चावल पायसम और दूध से बनने वाली खीर को भी बेच रहे हैं. पूरी कोशिश की जा रही है कि उसे उचित इलाज मिले और वह अगले साल हमारे साथ खुशी-खुशी ओणम मना सके. स्थानीय लोगों ने चाला से होकर गुजरने वाले लोगों और अन्य लोगों से फूल खरीदकर तथा इलाज के लिए बनाए गए कोष में योगदान देकर इस अभियान का समर्थन करने की अपील की है.

Published: 24 Aug, 2026 | 12:46 PM

Topics: