धान की तरह होती है मखाने की खेती, आसानी से उगा सकते हैं किसान.. 5 महीने में फसल तैयार
मखाने की खेती सिर्फ मिथिलांचल तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के प्रधान वैज्ञानिक और प्रभारी डॉ. इंदु शेखर सिंह ने किसान इंडिया से कहा कि धान उगाने वाले राज्य में किसान आसानी से मखाना उगा सकते हैं. नर्सरी नवंबर में तैयार करें. फरवरी से बुवाई शुरू हो जाती है.
Makhana Farming: जब मखाने की बात होती है तो लोग सबसे पहले बिहार के मिथिलांचल का नाम लेते हैं. ऐसा लगता है कि सिर्फ वहां की मिट्टी, पानी और हवा मखाने की खेती के लिए सही है, लेकिन ऐसा नहीं है. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के प्रधान वैज्ञानिक और प्रभारी डॉ. इंदु शेखर सिंह के अनुसार, जिस राज्य में धान उगता है, वहां के किसान आसानी से मखाना भी उगा सकते हैं. मखाने की खेती और धान की खेती लगभग एक जैसी होती है और दोनों को फसल के दौरान लगातार पानी की जरूरत होती है. सबसे खास बात यह है कि मखाने की खेती में धान की तुलना में ज्यादा मुनाफा होता है.
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के प्रधान वैज्ञानिक और प्रभारी डॉ. इंदु शेखर सिंह ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि मखाने की खेती के लिए कोई खास तरह की मिट्टी, पानी और हवा की जरूरत नहीं होती है. जिस राज्य के किसान धान उगा रहे हैं, वे अपने खेत में मखाने की खेती भी कर सकते हैं. बस इसके लिए कुछ सावधानियां बरतनी होगी. डॉ. इंदु शेखर सिंह ने बताया कि मखाने की बुवाई करने से पहले धान की तरह की नर्सरी तैयारी की जाती है. नर्सरी तैयार करने के लिए नवंबर का महीने सबसे बेस्ट होता है. तीन महीने में नर्सरी तैयार हो जाती है. इसके बाद पौधों को पहले से तैयार खेत में बुवाई कर दें.
मखाना वैज्ञानिक डॉ. इंदु शेखर सिंह
बुवाई से पहले ऐसे तैयार करें खेत
डॉ. इंदु शेखर सिंह ने कहा कि मखाना की खेती शुरू करने से पहले ऐसी जमीन चुनें जिसमें जल धारण करने की क्षमता अच्छी हो. इसके बाद खेत की मेड़ पर मिट्टी भरकर इसे चारो तरफ से दो फीट ऊंचा कर दें, ताकि पानी बहकर बाहर ना जा पाए. फिर खेत तैयार करने के लिए 1-2 बार जुताई करें और फिर 1-2 दिन धूप और हवा के लिए खाली छोड़ दें. इसके बाद खेती में 1.5 फीट तक पानी भर दें और फिर जुताई कर खेत तैयार कर लें. डॉ. इंदु शेखर सिंह ने कहा कि अगर आपने नवंबर में नर्सरी तैयार करने के लिए बुवाई की है, तो फरवरी तक पौधे तैयार हो जाएंगे. इसके बाद आप पहले से तैयार खेत में मखाने के पौधे की बुवाई कर सकते हैं.
कितने महीने में तैयार हो जाती है फसल
डॉ. इंदु शेखर सिंह ने बताया कि अगर आपने फरवरी की शुरुआत में मखाने की बुवाई की है, 5 महीने बाद जून-जुलाई तक फसल तैयार हो जाएगी. लेकिन इस दौरान खेत में पानी की कमी नहीं होने दें. खेत में हमेशा 1.5 फीट पानी रखें. उन्होंने कहा कि बुवाई के समय यूरियाा, डएपी और पोटाश का इस्तेमाल करनाा बेहतर रहेगा. इससे फसल की ग्रोथ अच्छी होती है. वहीं, बीच-बीच में जरूरत के हिसाब से यूरिया का छिड़काव करते रहें. उन्होंने बताया कि एक एकड़ में मखाने की खेती करने पर 1.50 लाख रुपये की लागत आएगी, लेकिन शुद्ध मुनाफा 2 लाख रुपये से भी ज्यादा होगा.
खेत में रखें साफ-सफाई
डॉ. इंदु शेखर सिंह ने कहा कि जिस तरह के धान के खेत से घास निकाली जाती है, ठीक उसी तरह मखाने के खेत में भी एक बार घास की सफाई करनी पड़ती है. वहीं, अगर पौधे कमजोर दिखाई पड़ रहे हैं, तो किसान NPK का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि एक एकड़ में खेती करने पर 12 क्विंटल तक मखाने का उत्पादन हो सकता है.
बिहार में कितना है मखाना का रकबा
बिहार में भारत के लगभग 80 से 90 फीसदी मखाना का उत्पादन होता है, जिससे करीब 10 लाख परिवार मखाना की खेती और प्रसंस्करण से जुड़े हुए हैं. यह फसल मुख्य रूप से उत्तर बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र खासकर दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा और आसपास के जिलों में में उगाई जाती है. ऐसे मखाना की खेती अब 35,000- 40,000 हेक्टेयर तक फैल चुकी है. इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 2025-2031 के लिए 476.03 करोड़ रुपये के बजट के साथ केंद्रीय योजना मंजूर की है. साथ ही मखाना बोर्ड भी बनाया गया है.