26 हजार गांवों तक होगा सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार, कैबिनेट ने 2973 करोड़ की मंजूरी दी

MP Cabinet Decisions : डेयरी किसानों को लाभ देने के लिए दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार 26 हजार गांवों तक करने को मंजूरी दी गई है. इसके लिए फंड को भी स्वीकृति देते हुए किसानों से रोजाना दूध कलेक्शन और मिल्क प्रॉसेसिंग बढ़ाने को भी सहमति दी गई है.

नोएडा | Published: 2 Sep, 2026 | 12:35 PM

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने दुग्ध उत्पादन, डेयरी विकास और पशुपालकों को बढ़ावा देने के लिए सहकारी दुग्ध समितियों के विस्तार करने पर मुहर लगाई है. इसके अलावा डेयरी किसानों से दूध खरीदने वाले सांची ब्रांड और दुग्ध क्षेत्र के विकास के लिए 2 हजार 973 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. वहीं, 7 हजार की बजाय 26 हजार गांवों तक सहकारी दुग्ध समितियों के विस्तार पर भी मुहर लगी है. इससे दूध किसानों से उचित दर दूध खरीद और समय पर भुगतान पक्का होगा.

दुग्ध ढांचा विकास के लिए 2973 करोड़ का फंड मंजूर

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी दुग्ध प्रणाली और सांची दूध ब्रांड के उन्नयन के उद्देश्य से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है. एमपी स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड और संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन और प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, डेयरी फेडरेशन के साथ जुड़े दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के कोलेबोरेशन एग्रीमेंट को भी मंजूरी दी है. इसके तहत ये सभी संस्थाएं दुग्ध उत्पादन विकास पर एक दूसरे की सहयोगी बनकर काम करेंगी.

26 हजार गांवों तक पहुंचेंगी दुग्ध सहकारी समितियां

डेयरी विकास योजना के तहत अगले 5 साल में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7331 ग्रामों से बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई है. इसके तहत सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 26,000 गांवों तक किया जाएगा. इस निर्णय से मिल्क कलेक्शन 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन किया जाएगा. इसके साथ ही मिल्क प्रॉसेसिंग कैपेसिटी को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर करने का टारगेट रखा गया है. दुग्ध पैकेट बिक्री 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन लीटर करने का लक्ष्य है.

नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान कवरेज तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य

डेयरी विकास योजना के लिए राज्य शासन की ओर से 500 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अनुदान और इसके अतिरिक्त भारत सरकार की योजनाओं पर स्वीकृति के तहत अनुमानित 241 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. इसके तहत पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को 15 फीसदी से बढाकर 50 फीसदी किया जाएगा. इसके तहत उन्नत नस्ल के पशुओं को तैयार करने के लिए लैब समेत अन्य ढांचे को विकसित किया जाएगा.

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