संयुक्त किसान मोर्चा का ऐलान.. एमएसपी गारंटी और पूर्ण कर्जमाफी लेकर रहेंगे, 25 अगस्त तक अभियान
Samyukt Kisan Morcha: संयुक्त किसान मोर्चा की प्रमुख मांगों में सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के फॉर्मूले के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी शामिल है. मोर्चा ने कहा है कि उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो 26 नवंबर से आंदोलन होगा.
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी अभियान शुरू किया है. संगठन के बयान के अनुसार 25 अगस्त 2026 तक देशभर में सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे. किसान प्रतिनिधि गांवों से जुलूस के रूप में निकलकर अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और उनसे केंद्र व राज्य सरकारों पर किसानों के हित में नीतिगत फैसले लेने का दबाव बनाने की अपील करेंगे. मोर्चा ने कहा है कि उनकी मांगों पर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो 26 नवंबर से आंदोलन होगा.
एमएसपी गारंटी, कर्जमाफी और वेतन की मांग
किसान मोर्चा की प्रमुख मांगों में सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के फॉर्मूले के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी शामिल है. इसके अलावा संगठन किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी, युवाओं के लिए रोजगार और मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन की मांग कर रहा है. SKM ने कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका पर रोक लगाने, सहकारी खेती को बढ़ावा देने और राज्यों को अधिक वित्तीय अधिकार देने की मांग भी रखी है.
केंद्र ने 2021 की लंबित मांगें अब तक पूरी नहीं कीं
किसान संगठन का कहना है कि 9 दिसंबर 2021 को किसान आंदोलन के बाद केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है. SKM के अनुसार MSP, किसानों के कर्ज, बिजली से जुड़े मुद्दों और किसानों पर दर्ज मुकदमों की वापसी जैसे विषय अभी भी लंबित हैं. संगठन चाहता है कि सांसद और विधायक इन मुद्दों को संसद तथा विधानसभा में उठाकर सरकार पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाएं.
ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूती की जरूरत
SKM ने राज्यों के टैक्स पूल में हिस्सेदारी बढ़ाने की भी मांग की है. संगठन के मुताबिक, राज्यों को मिलने वाला हिस्सा मौजूदा 31 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाना चाहिए, ताकि खेती के संकट से निपटने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के पास अधिक संसाधन हों. संगठन का कहना है कि यह अभियान केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी इसमें शामिल किया गया है.
सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है तो 26 नवंबर से आंदोलन होगा
संयुक्त किसान मोर्चा ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 26 नवंबर 2026 से बड़ा और लंबा किसान आंदोलन शुरू किया जा सकता है. संगठन का कहना है कि सांसदों और विधायकों को दिए जाने वाले ज्ञापन के जरिए किसानों, मजदूरों और ग्रामीण आबादी से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी.