Goat Valley Scheme: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार बकरी पालन को बढ़ावा दे रही है. उत्तराखंड पशुपालन विभाग की गोट वैली योजना (Goat Valley Scheme) ग्रामीणों और किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन रही है. इस योजना के तहत बकरी पालन शुरू करने वाले लोगों को 30 हजार रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही पशुपालन विभाग की ओर से मुफ्त में 10 बकरियां और 1 बकरा दिया जाता है. सरकार का लक्ष्य पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना और पलायन को रोकना है.
चकराता समेत पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ रहा बकरी पालन का चलन
उत्तराखंड के देहरादून जिले के चकराता समेत कई पहाड़ी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान और युवा इस योजना से जुड़ रहे हैं. पहाड़ी जलवायु बकरी पालन के लिए अनुकूल मानी जाती है, जिससे ग्रामीण कम लागत में इसे शुरू कर अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं. उत्तराखंड पशुपालन विभाग के अनुसार, गोट वैली योजना के जरिए ग्रामीण परिवारों को पशुपालन से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है. योजना के तहत पशुपालकों को प्रशिक्षण, सरकारी सहायता और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे वे वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन कर सकें.

गोट वैली योजना से मुफ्त बकरियां पाकर शुरू करें अपना व्यवसाय.
30 हजार रुपये का लोन और मुफ्त मिलेगी बकरी यूनिट
उत्तराखंड के पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने मीडिया से बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2022-23 में गोट वैली योजना की शुरुआत की गई थी. इसके बाद नवंबर 2023 से योजना को और तेजी से लागू किया गया. उन्होंने बताया कि योजना के तहत बकरी पालन शुरू करने वाले लाभार्थियों को पांच बकरियों के लिए 30 हजार रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा पशुपालन विभाग की ओर से लाभार्थी को 10 बकरियां और 1 बकरा मुफ्त दिया जाता है. इस तरह कुल 16 पशुओं की एक यूनिट तैयार हो जाती है, जिससे परिवार नियमित आय अर्जित कर सकता है. पशुपालन मंत्री के अनुसार, अब तक राज्य के करीब साढ़े पांच हजार लोग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं.
आईटीबीपी से सीधे जुड़ रहे पशुपालक, 48 घंटे में भुगतान
उत्तराखंड ने पशुपालकों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है. पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है, जिसने पशुपालकों को सीधे आईटीबीपी (ITBP) से जोड़ने की पहल की है. पहले उत्तरकाशी जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के पशुपालकों को भेड़ और बकरियां बेचने के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था. कई बार भुगतान मिलने में 6 से 8 महीने तक का समय लग जाता था. अब आईटीबीपी सीधे किसानों और पशुपालकों से भेड़, बकरी और मछली खरीद रही है. खरीद से पहले पशु चिकित्सकों की टीम पशुओं की जांच करती है. स्वस्थ पाए जाने के बाद खरीद प्रक्रिया पूरी की जाती है और किसानों के खाते में 48 घंटे के अंदर भुगतान पहुंच जाता है. इससे बिचौलियों की भूमिका भी कम हुई है.

गोट वैली योजना.
ऐसे करें गोट वैली योजना के लिए आवेदन
गोट वैली योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसान और ग्रामीण उत्तराखंड सरकार के अपुणि सरकार पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन के बाद पशुपालन विभाग की ओर से पात्रता की जांच की जाती है और योग्य लाभार्थियों को योजना से जोड़ा जाता है. इसके अलावा पशुपालन विभाग समय-समय पर गांवों में जागरूकता अभियान चलाता है, जहां किसानों को योजना, प्रशिक्षण और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है. इच्छुक व्यक्ति अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशुपालन विभाग के कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं. इस योजना से जुड़कर पहाड़ों के किसान बकरी पालन को आय का मजबूत साधन बना सकते हैं.