हरियाणा यूरिया खाद का बड़ा घोटाला सामाने आया है. सरकारी संस्था हैफेड के एनीमल फीड प्लांट में एग्रीकल्चर ग्रेड बदलकर टेक्निकल ग्रेड के रूप में खाद खपाई जा रही थी. इसके अलावा फर्जी बिल बनाए जा रहे थे. मामले में शिकायत के बाद उप कृषि निदेशक ने जांच कराई तो मामला खुला. दिल्ली की फर्म ने हैफेड में कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके यह घोटाला कर रहे थे. खाद घोटाले का यह मामला पूरे प्रदेश में पैर पसार रहा है. मुख्यमंत्री और राज्यपाल को इस पर कार्रवाई के लिए चिट्ठी भेजी गई है.
खरीफ सीजन की फसलों के लिए खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं. उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है. इसकी वजह घोटाला बताई जा रही है. भारतीय किसान एकता किसान के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि हैफेड के फीड प्लांट में बिना नाम लिखे टेक्निकल यूरिया के कट्टे उतारे जाने की सूचना मिली थी. मौके पर संगठन के पदाधिकारियों को भेजा गया है. तो पाया गया कि एग्रीकल्चर ग्रेड यूरिया को टेक्निकल ग्रेड के नाम पर खपाया जा रहा था और फर्जी बिल बनाकर मोटी रकम का घोटाला किया गया है.
टेक्निकल ग्रेड यूरिया से सस्ती होने के चलते हो रहे घोटाले
एग्रीकल्चर ग्रेड की यूरिया खाद को केवल कृषि कार्यों के लिए बिक्री किया जाता है और इस्तेमाल किया जाता है. सरकार इसे 266 रुपये प्रति 50 किलो बोरी की कीमत पर बेचती है. वहीं, टेक्निकल ग्रेड की यूरिया को औद्योगिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे पशु चारा, प्लाइवुड बनाने समेत कुछ अन्य कार्यों में किया जाता है. टेक्निकल ग्रेड यूरिया पर सरकार सब्सिडी नहीं देती है और इसलिए यह 50 किलो की बोरी 3250 रुपये में बिकती है. अब कृषि कार्य के लिए सब्सिडी वाली यूरिया का टेक्निकल ग्रेड यूरिया की जगह इस्तेमाल कर घोटाला किया जा रहा है.
हैफेड फीड प्लांट में कृषि ग्रेड वाली यूरिया खपा रहे थे
बीकेई प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने बताया कि यूरिया खाद घोटाले की तार पूरे देश में फैले हैं. औलख ने कहा कि हमें सूचना मिली कि सिरसा जिले में हैफेड एनिमल फीड प्लांट सकताखेड़ा डबवाली में भी बिना किसी कंपनी का नाम लिखे गट्टों में टेक्निकल ग्रेड के नाम से यूरिया खाद भरकर सप्लाई की जा रही है, जिसको लेकर बीकेई से गुरपिंदर काहलो, सरबजीत कंबोज तथा लीला साहुवाला बीकेई टीम सहित सकताखेड़ा हैफेड प्लांट पहुंचे तो देखा कि वहां बिना किसी कंपनी का नाम लिखे टेक्निकल ग्रेड के गट्टों में नीम कोटेड यूरिया खाद पड़ी हुई थी.
दिल्ली की फर्म और हैफेड की मिलीभगत से घोटाला
कृषि कार्य वाली यूरिया का घोटाला पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सिरसा कृषि उपनिदेशक सुखदेव सिंह को लिखित शिकायत भेजी. उन्होंने गुण नियंत्रण अधिकारी अमित कुमार को जांच के लिए मौके पर भेजा, जिन्होंने प्लांट में पहुंचकर जांच के लिए यूरिया खाद के नमूने भरे. किसान नेता औलख ने बताया कि गुप्ता केमिकल दिल्ली की फर्म द्वारा सकत्ताखेड़ा तथा रोहतक फीड प्लांट में एग्रीकल्चर ग्रेट की नीम कोटेड यूरिया को गट्टे बदलकर टेक्निकल ग्रेड लिखकर फर्जी बिलिंग के माध्यम से यूरिया खाद की सप्लाई दी गई है.

हैफेड फीड प्लांट में पकड़ी गई एग्रीकल्चर ग्रेड यूरिया.
267 रुपये वाली यूरिया 1647 रुपये बेच रहे
किसान नेता ने कहा कि दिल्ली की गुप्ता केमिकल फर्म द्वारा मिलीभगत करके हैफेड को 1647.28 रुपये प्रति 50 किलो बोरी यूरिया खाद दी गई है, जबकि टेक्निकल यूरिया खाद का नैशनल तथा इंटरनैशनल भाव इससे ढाई गुना अधिक है. ऐसे में कोई कंपनी कैसे कम रेट में यूरिया खाद सप्लाई कर सकती है. इससे पहले दिल्ली की ही दूसरी फर्म मनीषा ट्रेडिंग कंपनी द्वारा पंजाब में वेरका तथा मार्कफेड में सप्लाई की गई फर्जी टेक्निकल ग्रेड की 3250 रुपये प्रति बोरी सप्लाई की गई थी. उसके भी सैंपल फेल आए हैं, वह भी एग्रीकल्चर ग्रेड वाली नीम कोटेड यूरिया पाई गई है, जिसकी कीमत 267 रुपये है और उसे 1650 रुपये से ऊपर की कीमत पर बेचकर घपलेबाजी की गई.
कृषि मंत्री को शिकायती पत्र देकर जांच अभियान चलाएंगे
लखविंदर औलख ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक भारत तथा भारतीय किसान एकता बीकेई के अभियान से देशव्यापी यूरिया खाद घोटाले का पदार्फाश किया जा रहा है. जल्द ही पंजाब के राज्यपाल तथा कृषि मंत्री भारत सरकार से मिलकर उन्हें शिकायती पत्र सौंपे जाएंगे. उन्होंने कहा कि किसानों के हक की यूरिया लूटने वालों, जीएसटी चोरों, फर्जी पैकिंग करने वालों सहित इसमें शामिल सभी घोटालेबाजों के तथ्यों सहित खुलासे की जाएंगे.