यूरिया के काले कारोबार का खुलासा, पुलिस ने जब्त की 60 टन खाद.. अब तेज हुई जांच

तमिलनाडु के कोयंबटूर में किसानों ने सरकारी सब्सिडी वाली करीब 60 टन नीम-कोटेड यूरिया के अवैध भंडारण और प्रोसेसिंग का खुलासा किया. पुलिस ने यूरिया जब्त कर जांच शुरू कर दी है. किसानों का आरोप है कि PMBJP की यूरिया का दुरुपयोग कर उसे निजी प्रोसेसिंग के बाद दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा था.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 5 Jul, 2026 | 04:18 PM

Urea Black Marketing: तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के तिरुमलैयमपालयम गांव में किसानों ने सरकारी सब्सिडी वाली नीम-कोटेड यूरिया के एक अवैध भंडारण और प्रोसेसिंग केंद्र का खुलासा किया. किसानों को अपनी खेती के पास एक निजी गोदाम में करीब 60 टन यूरिया का भंडार मिला. सूचना मिलने पर केजी चावड़ी पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया. पुलिस ने मामले की आगे की जांच के लिए इसे संबंधित विभागों को सौंप दिया है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों का आरोप है कि यह यूरिया प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (PMBJP) के तहत किसानों में बांटने के लिए था. लेकिन बड़ी मात्रा में इसे अवैध रूप से बेंगलुरु से लाया गया और यहां प्रोसेस करने के बाद कथित तौर पर केरल भेजा जा रहा था. दरअसल, यह मामला तमिलनाडु-केरल सीमा के पास स्थित कोम्मंडमपराई गांव का है, जहां आसपास के किसान मुख्य रूप से टमाटर, भिंडी, लोबिया और नारियल की खेती करते हैं. पुलिस के अनुसार, यह गोदाम केरल निवासी आसिफ के. अली का है, जिसे स्थानीय किसान बालकृष्णन की जमीन लीज पर लेकर कुछ महीने पहले बनाया गया था. करीब एक महीने पहले यहां उर्वरक की प्रोसेसिंग शुरू हुई थी.

3,000 से ज्यादा सब्सिडी वाली यूरिया की बोरियां मिलीं

स्थानीय किसान पी. कृष्णासामी ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह एक सामान्य निजी गोदाम है. लेकिन कर्नाटक और दूसरे राज्यों से लगातार ट्रकों के आने-जाने पर उन्हें शक हुआ. शनिवार को किसानों ने दो ट्रकों को रोककर चालकों से पूछताछ की. इसके बाद जब गोदाम की जांच की गई तो वहां सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया की 3,000 से ज्यादा बोरियां मिलीं. किसानों का आरोप है कि यहां यूरिया को तरल और पेस्ट के रूप में प्रोसेस किया जा रहा था, जिसे बाद में केरल भेजने की तैयारी थी. मामले की जांच जारी है.

45 किलो नीम-कोटेड यूरिया की कीमत कितनी है

किसानों के अनुसार, प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (PMBJP) के तहत 45 किलो नीम-कोटेड यूरिया की एक बोरी किसानों को 266.50 रुपये में मिलती है, जबकि इसकी वास्तविक बाजार कीमत 1,457.29 रुपये है. दुरुपयोग रोकने के लिए आधार सत्यापन के बाद एक किसान को अधिकतम दो बोरी ही दी जाती है. ऐसे में स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि एक निजी कंपनी के पास सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया की इतनी बड़ी मात्रा कैसे पहुंच गई. सामाजिक कार्यकर्ता आर. सिलंबरासन ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है.

उर्वरक मिले पानी को सीधे जमीन में छोड़ा जा रहा था

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि यूनिट से उर्वरक मिले पानी को सीधे जमीन में छोड़ा जा रहा था, जिससे भूजल प्रदूषित  होने का खतरा है. इसके अलावा, सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया का बड़े पैमाने पर निजी प्रोसेसिंग में इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कृषि विभाग से उर्वरक की खरीद और पर्यावरण नियमों के संभावित उल्लंघन की विस्तृत जांच करने को कहा है.

एक और संदिग्ध रासायनिक यूनिट का पता चला

शनिवार को तिरुमलैयमपालयम पंचायत के पिचनूर गांव में भी एक और संदिग्ध रासायनिक यूनिट का पता चला. तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB), पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने यहां जांच की. निरीक्षण के दौरान यूनिट के अंदर सरकारी सब्सिडी वाली कई टन नीम-कोटेड यूरिया रखी मिली. टीएनपीसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्थानीय लोगों ने यूनिट से रासायनिक पदार्थों वाला पानी अवैध रूप से छोड़े जाने की शिकायत की थी, जिसके बाद जांच की गई. वहीं, सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया की अवैध खरीद और इस्तेमाल की जांच कृषि विभाग कर रहा है.

 

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Published: 5 Jul, 2026 | 04:11 PM

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