गन्ने की फसल पर खतरनाक कीटों का हमला, जानें बचाव का सही तरीका, वरना हो सकता है भारी नुकसान
Sugarcane Farming Tips: गन्ने की फसल पर इस समय कीटों का खतरा मंडरा रहा है. सालभर की मेहनत, भारी लागत और उम्मीदों से भरी खेती, लेकिन अगर सही समय पर सावधानी नहीं बरती, तो अंकुर बेधक और टॉप बोरर जैसे कीट कुछ ही दिनों में पूरी फसल को बर्बाद कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, यही वजह है कि गन्ने की खेती में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही रणनीति भी उतनी ही जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि आपकी फसल हरी-भरी रहे और मुनाफा भी अच्छा मिले, तो जरूरी है कि कीटों की पहचान, सही दवा और सही समय पर बचाव के उपायों को समझा जाए.

गन्ने को नकदी फसल माना जाता है, लेकिन इसमें एक साल की लंबी मेहनत और भारी लागत लगती है. ऐसे में अगर कीट लग जाएं, तो किसानों की पूरी सालभर की कमाई पर सीधा असर पड़ता है.

अंकुर बेधक और टॉप बोरर सबसे बड़ा खतरा: ये दोनों कीट गन्ने की नई और पेड़ी फसल को तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं. अंकुर बेधक तने में घुसकर पौधे को अंदर से सुखा देता है, जबकि टॉप बोरर पत्तियों को नुकसान पहुंचाकर विकास रोक देता है.

बुवाई के समय ही टकारटॉप हाइड्रोक्लोराइड’ (Cartap Hydrochloride) का इस्तेमाल करने से कीटों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. शुरुआती सुरक्षा ही आगे के नुकसान को रोकने की सबसे बड़ी कुंजी है.

अगर बाद में कीटों का प्रकोप दिखाई दे, तो कोराजेन (Chlorantraniliprole) को 150 मिलीलीटर कोराजेन को 200 से 400 लीटर पानी में मिलाकर पौधों की जड़ों के पास ड्रेचिंग करनी चाहिए. यह तरीका छिड़काव से ज्यादा प्रभावी माना जाता है.

अगर पौधे का ऊपरी हिस्सा सूखने लगे (डेड हार्ट) या पत्तियों में छर्रे जैसे छेद दिखें, तो समझ लें कि कीट सक्रिय हैं. ऐसे संकेत मिलते ही तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है.

कीटनाशक का उपयोग या फिर ड्रेचिंग हमेशा शाम के समय करना चाहिए और 24 घंटे के भीतर हल्की सिंचाई जरूरी है. इससे दवा जड़ों तक अच्छी तरह पहुंचती है और कीटों पर असर ज्यादा होता है.
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