Expert Tips: किसानों के लिए खतरे की घंटी, कद्दू वर्गीय फसलों पर मंडरा रहा बुकनी रोग का खतरा

Powdery Mildew In vegetables: लौकी, कद्दू, तरोई और खीरा जैसी फसलों में बुकनी रोग (पाउडरी मिल्ड्यू) तेजी से फैल रहा है. इस बीमारी में पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसी परत जम जाती है, जिससे पौधों की बढ़वार और पैदावार प्रभावित होती है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय पर पहचान कर उचित फफूंदनाशी का छिड़काव करने और फसलों की नियमित निगरानी रखने की सलाह दी है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 5 Jun, 2026 | 06:00 AM

Crop Disease Management: कद्दू, लौकी, तरोई और खीरा जैसी सब्जियां उगाने वाले किसानों के लिए इन दिनों एक बड़ी परेशानी सामने आ रही है. कई जगहों पर फसलों में बुकनी रोग (पाउडरी मिल्ड्यू) तेजी से फैल रहा है. यह एक फफूंद से होने वाली बीमारी है, जो पौधों की पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसी परत बना देती है. धीरे-धीरे यह पूरे पौधे को प्रभावित करने लगती है और फसल को नुकसान पहुंचाती है. अगर समय पर इसकी पहचान और इलाज न किया जाए, तो उत्पादन काफी कम हो सकता है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को इस बीमारी के शुरुआती लक्षण पहचानने और बचाव के सही तरीके अपनाने चाहिए.

क्या है बुकनी रोग?

बिहार की राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक एसके सिंह कहते हैं कि बुकनी रोग, जिसे पाउडरी मिल्ड्यू या दहिया रोग भी कहा जाता है, एक फफूंद से फैलने वाली बीमारी है. यह बीमारी सबसे ज्यादा लौकी, कद्दू, तरोई, खीरा और दूसरी कद्दूवर्गीय फसलों में देखने को मिलती है. जब मौसम में नमी बढ़ जाती है और तापमान इसके अनुकूल होता है, तो यह रोग बहुत तेजी से फैलने लगता है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि शुरुआत में यह बीमारी ज्यादा गंभीर नहीं लगती, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरी फसल को प्रभावित कर सकती है. यही वजह है कि किसानों के लिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर इलाज करना बहुत जरूरी है, ताकि फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सके.

ऐसे करें बीमारी की पहचान

बुकनी रोग के लक्षण पहचानना काफी आसान होता है. इसकी शुरुआत पत्तियों के ऊपर छोटे-छोटे सफेद धब्बों से होती है. पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे पत्तियों पर किसी ने आटा या सफेद पाउडर छिड़क दिया हो. धीरे-धीरे ये सफेद धब्बे बढ़ने लगते हैं और पूरी पत्ती पर फैल जाते हैं. इसके बाद पत्तियों का हरा रंग फीका पड़ने लगता है और पौधा कमजोर दिखाई देने लगता है. अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाए, तो पूरी पत्ती सफेद परत से ढक जाती है, जिससे पौधे की बढ़वार और फसल दोनों प्रभावित होती हैं.

फसल को कैसे पहुंचाता है नुकसान?

जब पत्तियों पर सफेद फफूंद की परत फैल जाती है, तो पौधे ठीक से भोजन नहीं बना पाते. इससे उनकी बढ़वार पर असर पड़ता है और पौधे कमजोर होने लगते हैं. धीरे-धीरे पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और बाद में सूखकर खराब हो जाती हैं. पत्तियों के खराब होने का असर फलों पर भी पड़ता है. फल ठीक से विकसित नहीं हो पाते, जिससे उत्पादन कम हो जाता है. इस वजह से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बीमारी ज्यादा फैल जाए, तो फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों पर बुरा असर पड़ता है.

समय रहते करें उपचार

अगर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो बुकनी रोग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इसके लिए प्रभावित फसल में थायोफैनेट मिथाइल 70 फीसदी WP दवा का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. दवा का घोल बनाने के लिए 1 लीटर पानी में 2 ग्राम दवा मिलाएं और फिर इसे पूरे पौधे पर अच्छी तरह छिड़कें. समय पर और सही मात्रा में किया गया छिड़काव बीमारी को फैलने से रोकने में मदद करता है और फसल को नुकसान से बचा सकता है.

नियमित निगरानी है सबसे बड़ा बचाव

फसल को बीमारियों से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है खेत की नियमित निगरानी करना. किसानों को समय-समय पर अपनी फसल की जांच करते रहना चाहिए, ताकि बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज किया जा सके. अगर पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखाई दें, तो उन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए. शुरुआत में ही बीमारी पर काबू पा लिया जाए, तो कम खर्च में फसल को बचाया जा सकता है और बड़े नुकसान से भी बचा जा सकता है.

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Published: 5 Jun, 2026 | 06:00 AM

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