चीनी हुई सस्ती! थोक भाव 300 रुपये तक गिरे, जानें आपके शहर में क्या है खुदरा कीमत

चीनी के मिल गेट भाव में मंगलवार को करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई, लेकिन खुदरा कीमत रिकॉर्ड 63.97 रुपये प्रति किलो पहुंच गई. उद्योग को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में खुदरा भाव 60 रुपये से नीचे आ सकते हैं. सरकार के शुल्क मुक्त आयात, स्टॉक निगरानी और जमाखोरी पर कार्रवाई से कीमतों पर दबाव बढ़ा है.

नोएडा | Updated On: 26 Aug, 2026 | 08:07 AM

चीनी के थोक भाव (मिल गेट ) में मंगलवार को एक बार फिर गिरावट आई. मिल गेट पर चीनी की कीमत करीब 300 रुपये प्रति क्विंटल तक घट गई, लेकिन इसका असर खुदरा बाजार में पूरी तरह नहीं दिखा. मंगलवार को एस-ग्रेड चीनी का मिल गेट भाव 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर खुला, जबकि सोमवार को यह 5,500-5,700 रुपये  प्रति क्विंटल था. दिन खत्म होने तक भाव और गिरकर 5,200-5,260 रुपये प्रति क्विंटल रह गया. इसी तरह एम-ग्रेड चीनी का भाव मंगलवार को 5,400-5,600 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि सोमवार को यह 5,700-6,100 रुपये प्रति क्विंटल था. वहीं, उद्योग का कहना कि मौजूदा भाव पर भी चीनी खरीदने वाले ग्राहक बहुत कम हैं. इससे संकेत मिल रहा है कि थोक बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिविजन के मुताबिक, देश में चीनी की औसत खुदरा  कीमत बढ़कर 63.97 रुपये प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. सोमवार को यह 63.05 रुपये प्रति किलो थी. चीनी उद्योग के मुताबिक, आने वाले दो-तीन दिनों में खुदरा बाजार में भी मिल गेट कीमतों में आई गिरावट का असर दिख सकता है. इसके बाद चीनी की खुदरा कीमत 60 रुपये प्रति किलो से नीचे आने की उम्मीद है.

मिल गेट भाव गिरने से जल्द सस्ती हो सकती है चीनी

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी उत्पादक राज्यों से बाहर खुदरा कीमतें अभी ज्यादा हैं. हालांकि, मिल गेट कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है. ऐसे में अगले कुछ दिनों में खुदरा भाव भी घटकर 60 रुपये प्रति किलो से नीचे आ सकते हैं. वहीं, चेन्नई में भाव घटकर 67 रुपये प्रति किलो और मुंबई व दिल्ली में 62 रुपये प्रति किलो रह गया. एक दिन में कीमतों में करीब 2-3 फीसदी प्रति किलो की कमी आई.

10 लाख टन शुल्क मुक्त आयात से चीनी के दाम पर दबाव

चीनी की कीमतों में हालिया गिरावट के पीछे सरकार का 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात का फैसला प्रमुख कारण माना जा रहा है. इसके अलावा सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए कई राज्यों में कारोबारियों पर कार्रवाई तेज की है. सरकार चीनी मिलों के भौतिक स्टॉक की निगरानी भी कर रही है. वहीं, हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी खरीदने वाले थोक खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट घटाकर 15 दिनों की जरूरत के बराबर कर दी गई है. इन कदमों से बाजार में बढ़ती कीमतों पर दबाव बना है.

सप्लाई घटने से बढ़े चीनी के रेट

देश में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी की शुरुआत कर्नाटक की एक चीनी मिल से हुई. उद्योग के मुताबिक, इस मिल ने सबसे पहले चीनी का भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया. इसके बाद राज्य और दूसरे राज्यों की कई मिलों ने भी इसी तरह कीमतें बढ़ानी शुरू कर दीं. दक्षिण भारत के एक चीनी कारोबारी ने सवाल उठाया कि जिन मिलों ने तय कोटे से ज्यादा चीनी बेची या स्टॉक रोककर रखा, उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई? कारोबारी के मुताबिक, अचानक बाजार में चीनी की सप्लाई कम हो गई, जिससे कारोबारियों को ज्यादा कीमत पर चीनी खरीदनी पड़ी.

ग्लोबल बाजार में भी चीनी के भाव बढ़े

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी की कीमतों में मामूली तेजी रही. न्यूयॉर्क के इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज में अक्टूबर रॉ शुगर फ्यूचर्स बढ़कर 17.44 सेंट प्रति पाउंड हो गया, जबकि स्पॉट कीमत 17.66 सेंट रही. वहीं, लंदन में व्हाइट शुगर की कीमत घटकर 525.50 डॉलर प्रति टन रह गई, जो पिछले दिन 534.80 डॉलर प्रति टन थी.

Published: 26 Aug, 2026 | 07:59 AM

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