चीनी के दाम काबू करने की तैयारी, सरकार ने बदले आयात के नियम.. 2 महीने में बिक्री अनिवार्य

Sugar Import: चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने आयातित कच्ची चीनी के नियम सख्त कर दिए हैं. अब आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन करने के बाद दो महीने के भीतर घरेलू बाजार में बेचना जरूरी होगा. सरकार ने पहले ही 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 25 Aug, 2026 | 11:25 AM

Raw Sugar Import India: देश में बढ़ती चीनी की कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने आयात की गई कच्ची चीनी को लेकर नियम और सख्त कर दिए हैं. नए नियम के तहत विदेश से मंगाई गई कच्ची चीनी को रिफाइन करने के बाद 2 महीने के भीतर घरेलू बाजार में बेचना जरूरी होगा. सरकार का मकसद बाजार में जल्द से जल्द चीनी की सप्लाई बढ़ाना और बढ़े हुए दाम को नीचे लाना है. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के खुदरा भाव में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है.

आयातित चीनी की बिक्री के लिए सिर्फ 2 महीने की समय सीमा

चीनी के बढ़ते दाम को देखते हुए केंद्र सरकार पहले ही 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दे चुकी है. अब सरकार ने सोमवार को नई अधिसूचना जारी करके आयात की गई चीनी की बिक्री को लेकर समय सीमा तय कर दी है. पहले आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन करके 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचने की व्यवस्था थी. अब सरकार ने इसे घटाकर सिर्फ 2 महीने कर दिया है. यानी आयातक चीनी को लंबे समय तक अपने पास रोककर नहीं रख सकेंगे. इससे सरकार को उम्मीद है कि आयातित चीनी जल्दी बाजार में आएगी और उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम होगा.

पहले भी सरकार ने उठाए कई कदम

चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार पहले भी कई फैसले ले चुकी है. सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति दी थी. इसके अलावा व्यापारियों और बड़े पैमाने पर चीनी इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी लागू की गई. इनमें कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियां जैसे बड़े खरीदार शामिल हैं.

इससे पहले मई में सरकार ने घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए 30 सितंबर तक कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी. राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे.

आखिर चीनी इतनी महंगी क्यों हुई?

देश में गन्ने की पैदावार अच्छी होने के बावजूद चीनी के भाव तेजी से बढ़े हैं. इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. ज्यादा बारिश और खेतों में जलभराव के कारण गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा. कुछ इलाकों में कीटों के हमले से भी फसल प्रभावित हुई है. इसके अलावा त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने और कुछ कारोबारियों द्वारा मुनाफे के लिए ज्यादा स्टॉक जमा करने से भी बाजार में कीमतें बढ़ी हैं.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलो पहुंच गई. एक महीने पहले यह 48.73 रुपये प्रति किलो थी. यानी करीब 29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. कुछ बाजारों में कीमत 75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई, जबकि मॉडल कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो रही.

मिलों से निकलते ही बढ़ गए दाम

चीनी मिलों से निकलने वाली कीमत यानी एक्स-मिल रेट भी अचानक बढ़ी है. करीब 7 से 10 दिनों के भीतर यह 47-48 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 62 रुपये प्रति किलो हो गई. सरकार ने इतनी तेज बढ़ोतरी को अनुचित बताया है और बाजार पर नजर रखने की बात कही है.

देश में चीनी की कमी नहीं

चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि, सरकार उत्पादन में कमी को लेकर चिंतित है. उनके मुताबिक, अल नीनो के कारण गन्ने की फसल पर भी असर पड़ा है. इसका असर सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में कृषि उत्पादन, खासकर चीनी के उत्पादन पर पड़ा है. उन्होंने बताया कि भारत में हर साल करीब 280 लाख टन चीनी की जरूरत होती है. वहीं, देश के पास इस समय जरूरत से 20-25 लाख टन ज्यादा चीनी का स्टॉक मौजूद है.

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Published: 25 Aug, 2026 | 11:20 AM

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