करीब दो महीने तक लगातार बढ़ने के बाद सोमवार को चीनी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों के बाद मिलों में खुले बाजार और रिटेल बिक्री के लिए चीनी के दाम नीचे आए हैं. महाराष्ट्र में चीनी की एक्स-मिल और टेंडर कीमतें 20 अगस्त को 6,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गई थीं. सोमवार को एस-30 ग्रेड चीनी के दाम घटकर 5,500 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए. यानी इसमें 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई. वहीं, एम-30 ग्रेड चीनी की कीमत भी 6,950 रुपये से घटकर 6,100 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गई.
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को चीनी का खुदरा भाव मामूली गिरकर 63.05 रुपये प्रति किलो हो गया, जो रविवार को रिकॉर्ड 63.12 रुपये प्रति किलो था. चेन्नई, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों में चीनी के दाम कम से कम 3 रुपये प्रति किलो घटे. सरकार की ओर से कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति देने के बाद चीनी की कीमतों में गिरावट शुरू हो गई है. पुणे में पिछले सप्ताह 72 रुपये प्रति किलो के मुकाबले वीकेंड पर चीनी का भाव करीब 20 फीसदी गिरकर 60 रुपये प्रति किलो रह गया.
10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क मुक्त आयात
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है. यह आयात 31 अक्टूबर तक किया जा सकेगा. उद्योग के मुताबिक, करीब 4 लाख टन चीनी रास्ते में है और 15 अक्टूबर तक त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए और चीनी देश में पहुंच सकती है. सरकार ने बड़े थोक खरीदारों के लिए भी चीनी का स्टॉक रखने की सीमा घटा दी है. अब हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी खरीदने वाले थोक खरीदारों को अपनी मासिक जरूरत के सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रखने की अनुमति होगी. यह नियम 1 सितंबर से लागू होगा.
चीनी उत्पादन का अनुमान घटा
खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी मिलों से 17, 18 और 19 अगस्त को बेची गई चीनी का ब्योरा भी मांगा है. इन कदमों से मिलों और थोक खरीदारों पर स्टॉक कम करने का दबाव बढ़ा है. जून से चीनी के दाम 35 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुके थे. त्योहारी सीजन से पहले घरेलू मांग पूरी होने को लेकर चिंता के कारण कीमतों में तेजी आई थी. मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था. इसमें इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की गई चीनी भी शामिल है. इसके अलावा, निर्यात पर रोक लगने से पहले 8 लाख टन चीनी का निर्यात किया जा चुका है.
कच्ची चीनी के वायदा भाव में गिरावट
सरकार के आयात फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखा. कच्ची चीनी के अक्टूबर वायदा भाव 18.26 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंचने के बाद घटकर 17.16 सेंट रह गए. लंदन में सफेद चीनी का भाव भी 558 डॉलर प्रति टन से गिरकर 534.80 डॉलर प्रति टन हो गया. चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने सफाई दी है. सरकार ने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने की वजह इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का ज्यादा इस्तेमाल होना नहीं है.
सरकार ने आंकड़ों से दी सफाई
सरकार के मुताबिक, एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 फीसदी थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 9 फीसदी रह गई है. साथ ही, देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का से तैयार होता है. सरकार ने चीनी के निर्यात को भी सप्लाई से जुड़ी एक वजह बताया. केंद्र ने 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन 8 लाख टन चीनी के निर्यात के बाद बाकी निर्यात पर रोक लगा दी गई.