चीनी क्यों हो रही है महंगी? सरकार ने किया खुलासा, लाल सड़न रोग से घटा गन्ना उत्पादन

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. सरकार ने लाल सड़न रोग और अल नीनो को उत्पादन में कमी की वजह बताया है. त्योहारों से पहले सप्लाई बनाए रखने के लिए कच्ची चीनी के अस्थायी आयात का फैसला लिया गया है. वहीं, विपक्ष ने गन्ना किसानों के भुगतान और एथनॉल नीति पर सवाल उठाए हैं.

नोएडा | Updated On: 24 Aug, 2026 | 08:02 AM

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि लाल सड़न रोग (Red Rot) और अल नीनो जैसी मौसम की स्थिति के कारण गन्ने का उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसका असर चीनी के उत्पादन पर पड़ा है और कीमतें बढ़ी हैं. वहीं, विपक्षी नेताओं ने सरकार की चीनी नीति पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने किसानों को गन्ने का भुगतान, चीनी के लिए गन्ने के इस्तेमाल और एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की डायवर्जन नीति को लेकर सरकार से जवाब मांगा है.

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा बाजार में चीनी की कीमत  20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलो थी. 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी एक महीने में चीनी के दाम करीब 7.5 रुपये प्रति किलो बढ़े हैं. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश में चीनी का उत्पादन कम होने को लेकर सरकार चिंतित है. उन्होंने इसकी वजह गन्ने की फसल में लगे रेड रॉट रोग और अल नीनो को बताया. इन दोनों कारणों से भारत के साथ-साथ दुनियाभर में कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है.

हर साल करीब 280 लाख टन चीनी की जरूरत

प्रल्हाद जोशी ने कहा कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं. इनमें कच्ची चीनी का अस्थायी आयात भी शामिल है. उन्होंने बताया कि भारत में हर साल करीब 280 लाख टन चीनी की जरूरत होती है. हालांकि, मौजूदा समय में देश के पास जरूरत से 20 से 25 लाख टन से ज्यादा चीनी का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है. सरकार का कहना है कि त्योहारों के दौरान चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता न हो, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

विपक्ष ने सरकार की नीति पर उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत में हर साल करीब 280 लाख टन चीनी की जरूरत होती है. फिलहाल देश में जरूरत से 20-25 लाख टन से ज्यादा चीनी का स्टॉक मौजूद है. उन्होंने कहा कि त्योहारों का सीजन नजदीक है और इस दौरान चीनी की मांग बढ़ सकती है. इसलिए सरकार ने सप्लाई बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें कच्ची चीनी का अस्थायी आयात भी शामिल है.

विपक्ष ने चीनी नीति पर साधा निशाना

चीनी की कीमतों का मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है. विपक्षी नेताओं ने सरकार से चीनी उत्पादन, गन्ना किसानों के भुगतान और एथनॉल बनाने के लिए गन्ने के इस्तेमाल को लेकर सवाल किए हैं. कांग्रेस महासचिव और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गन्ना किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से किसान गन्ने की खेती से पीछे हट रहे हैं. उन्होंने चीनी के आयात पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भारत पहले चीनी का निर्यात करने वाला देश था, फिर अब आयात की जरूरत क्यों पड़ रही है.

इथेनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल पर सवाल

वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी चीनी के साथ-साथ आलू, प्याज और लहसुन जैसी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई. उन्होंने गन्ने को इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने पर भी सवाल उठाए. मनीष तिवारी ने कहा कि अगर चीनी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला गन्ना इथेनॉल के जरिए वाहनों के ईंधन में इस्तेमाल होगा, तो चीनी के उत्पादन के लिए कच्चा माल कम पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि इससे किन कारोबारी हितों को फायदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों का सीधा बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है.

Published: 24 Aug, 2026 | 07:57 AM

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