चीनी की कीमतों में शनिवार को बाजार में अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली. मिलों से टेंडर के जरिए बिकने वाली चीनी के दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल तक घट गए, लेकिन खुदरा बाजार में चीनी की कीमत एक बार फिर बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. महाराष्ट्र के सोलापुर स्थित लोकनेते बाबूराव पाटील एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने S-30 ग्रेड की चीनी 5,850 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेची. एक कारोबारी के मुताबिक, मिल ने 70 टन चीनी बेची और अन्य खरीदारों को भी इसी भाव पर चीनी देने की पेशकश की. वहीं, एक अन्य टेंडर में S-30 ग्रेड चीनी का भाव शुक्रवार के 6,600 रुपये से घटकर 6,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गया. वहीं, M-30 ग्रेड का भाव भी 6,725 रुपये से घटकर 6,225 रुपये प्रति क्विंटल हो गया.
रिटेल बाजार में चीनी ने फिर बनाया रिकॉर्ड
थोक भाव में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में चीनी की कीमत बढ़ गई. उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को चीनी का औसत खुदरा भाव 60.26 रुपये प्रति किलो पहुंच गया. शुक्रवार को चीनी 58.23 रुपये प्रति किलो बिक रही थी. यानी एक दिन में खुदरा कीमत 2.03 रुपये प्रति किलो बढ़ गई. इससे आम लोगों के किचन बजट पर चीनी की बढ़ती कीमतों का असर और बढ़ सकता है.
क्या बोले खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने चीनी की बढ़ती कीमतों को ‘बेवजह’ बताया है. उन्होंने कहा कि चीनी के दाम बढ़ने के पीछे बाजार की वास्तविक स्थिति जिम्मेदार नहीं है. देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक और उपलब्धता मौजूद है. उन्होंने एक निजी टीवी चैनल से कहा कि मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमत कुछ ही समय में 48 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो हो गई है. उनके मुताबिक, इतनी तेजी स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने आरोप लगाया कि सट्टेबाजी, जमाखोरी और ज्यादा मुनाफा कमाने की कोशिशों के कारण कीमतों में कृत्रिम बढ़ोतरी हुई है.
जल्द घट सकते हैं खुदरा दाम
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, मिलों के टेंडर में चीनी के दाम घटने का असर खुदरा बाजार में भी जल्द दिखाई दे सकता है. माना जा रहा है कि सोमवार से खुदरा कीमतों में गिरावट शुरू हो सकती है. खाद्य सचिव ने कहा कि सीजन के अंत तक देश में करीब 33-35 लाख टन चीनी का स्टॉक बचने की उम्मीद है. वहीं, करीब 15 अक्टूबर से शुरू होने वाली शुरुआती पेराई से 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध हो सकती है. इससे त्योहारी सीजन की मांग आसानी से पूरी होने की उम्मीद है.
चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र का बड़ा कदम
देश में चीनी की कीमतों में जून से अब तक 35 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है. त्योहारी सीजन के दौरान अक्टूबर तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहेगी या नहीं, इसको लेकर चिंता बढ़ी है. कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है. साथ ही सरकार ने चीनी के बड़े खरीदारों के लिए भी स्टॉक की सीमा तय की है. 1 सितंबर से महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक खरीदार 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे. इसका मकसद जमाखोरी रोकना और बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है.